Credit Score : सिबिल रिपोर्ट में 'Written Off' दिखने का क्या है असली मतलब? जानें 7 साल तक पीछा करने वाले इस दाग को मिटाने का तरीका
बैंक द्वारा बैलेंस शीट से लोन हटाने का मतलब कर्ज माफी नहीं, भविष्य में नया ऋण लेने में आती है भारी अड़चन
Credit Score : आज के समय में घर खरीदना हो, गाड़ी लेनी हो या फिर कोई पर्सनल जरूरत हो, बैंक से लोन लेना आम बात हो गई है। लोन लेने और उसे चुकाने की इस पूरी प्रक्रिया में आपकी साख का पैमाना आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर होता है। अक्सर कई लोग अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते हैं और किसी पुराने डिफॉल्ट हो चुके लोन के आगे अंग्रेजी में "Written Off" (रिटन ऑफ) लिखा देखकर चैन की सांस लेते हैं। उन्हें लगता है कि बैंक ने उनका कर्ज माफ कर दिया है और अब उन्हें कोई पैसा नहीं देना होगा। लेकिन वित्तीय मामलों के जानकारों की मानें तो असल में यह कोई राहत नहीं है, बल्कि आपके वित्तीय भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। दैनिक ट्रिब्यून के इस एक्सप्लेनर में हम विस्तार से जानेंगे कि 'Written Off' का असल मतलब क्या है, इसके क्या नुकसान हैं और इस गंभीर स्थिति से कैसे उबरा जा सकता है।
'Written Off' का असली मतलब क्या है?
जब कोई व्यक्ति बैंक से लोन लेता है और किन्हीं कारणों से लगातार 6 महीने (180 दिन) तक अपनी ईएमआई (EMI) नहीं भर पाता है, तो बैंकिंग नियमों के अनुसार बैंक सबसे पहले उस अकाउंट को एनपीए (NPA) यानी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर देता है।
बैलेंस शीट साफ करने की प्रक्रिया एनपीए घोषित होने के बाद जब बैंक को लगता है कि बार-बार नोटिस देने के बावजूद अब इस लोन की वसूली मुश्किल है, तो वह अपनी बुकलेट और बैलेंस शीट को साफ करने के लिए उस लोन को 'नुकसान' के कॉलम में डाल देता है। इसी कागजी कार्रवाई को बैंकिंग की भाषा में 'Written Off' कहा जाता है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि बैंक की नजर में व्यक्ति एक डिफॉल्टर बन चुका है; बैंक ने सिर्फ कागजों में नुकसान मानकर अपनी टैक्स देनदारी कम की है, लेकिन असल में कर्जदार को माफ नहीं किया है। कानूनी तौर पर आप उस कर्ज को चुकाने के लिए अब भी उत्तरदायी हैं।
वित्तीय भविष्य पर 'Written Off' के गंभीर नुकसान
अगर आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में यह स्टेटस आ गया है, तो इसके कई गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
सिबिल स्कोर में आती है भारी गिरावट
रिटन ऑफ का सीधा असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ता है। इस एक नेगेटिव मार्क की वजह से आपका क्रेडिट स्कोर 300 से 400 पॉइंट तक नीचे गिर सकता है। स्कोर कम होने का मतलब है कि आप बैंकिंग सिस्टम की नजर में एक अविश्वसनीय ग्राहक बन चुके हैं।
7 साल तक बंद हो जाते हैं कर्ज के रास्ते
एक बार जब आपका लोन राइट-ऑफ हो जाता है, तो यह दाग आपकी सिबिल रिपोर्ट पर अगले 7 साल तक बना रहता है। कोई भी नया बैंक जब आपकी रिपोर्ट में यह स्टेटस देखेगा, तो वह तुरंत आपका लोन रिजेक्ट कर देगा। उनकी नजर में आप एक 'हाई रिस्क' (उच्च जोखिम) वाले कस्टमर बन चुके होते हैं, जिन्हें दोबारा पैसा देना खतरे से खाली नहीं है। इसके अलावा, रिकवरी एजेंसियां इस स्थिति में भी पैसा वसूलने के लिए आपके दरवाजे पर आ सकती हैं।
'Settled' और 'Written Off' में क्या अंतर है?
लोग अक्सर इन दोनों शब्दों के बीच काफी कंफ्यूज रहते हैं। इन दोनों स्थितियों का आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर अलग-अलग, लेकिन नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
सेटलमेंट भी है एक नेगेटिव मार्क '
सेटल्ड' (Settled) का मतलब है कि आपने बैंक से मोलभाव करके अपनी पूरी बकाया राशि से कम पैसे देकर मामला निपटाया है। बैंक यह मान लेता है कि कुछ न मिलने से कुछ मिलना बेहतर है। वहीं, 'रिटन ऑफ' की स्थिति का मतलब है कि बैंक ने आपसे वसूली की सारी उम्मीदें छोड़ दी हैं। दोनों ही मामलों में भविष्य में नया लोन लेना लगभग असंभव हो जाता है, क्योंकि बैंक ऐसे ग्राहकों पर भरोसा नहीं करते जो अपना पूरा कर्ज नहीं चुकाते।
अपनी बिगड़ी साख को कैसे सुधारें ? (कदम दर कदम गाइड)
अपनी बिगड़ी हुई वित्तीय साख को बचाने का कोई शॉर्टकट नहीं है। इसे रातों-रात ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन सही प्रक्रिया अपनाकर आप अपनी प्रोफाइल को सुधार सकते हैं। इसके लिए आपको ये जरूरी कदम उठाने होंगे:
बैंक से संपर्क कर पूरा बकाया चुकाएं : सबसे पहले उस बैंक की ब्रांच में जाएं जहां से लोन लिया था और अपना कुल बकाया (आउटस्टैंडिंग अमाउंट) पूछें। इसमें मूलधन के साथ ब्याज और पेनल्टी भी शामिल होगी। बैंक आपको कम पैसों में 'सेटलमेंट' करने का ऑफर दे सकता है, लेकिन ऐसा भूलकर भी न करें। हमेशा पूरा पैसा (Full Payment) चुकाने की ही कोशिश करें।
एनओसी (NOC) प्राप्त करना है अनिवार्य : जैसे ही आप पूरा पैसा चुकाते हैं, बैंक से एनडीसी (No Dues Certificate) या एनओसी (No Objection Certificate) जरूर ले लें। यह भविष्य के लिए आपका सबसे बड़ा कानूनी सबूत है कि आपने उस बैंक का एक-एक पैसा चुका दिया है।
सिबिल में डिस्प्यूट दर्ज करना : पूरा पैसा जमा होने के बाद बैंक को इसकी जानकारी सिबिल को देनी होती है, जिसमें आमतौर पर 30 से 45 दिन का समय लगता है। अगर इसके बाद भी आपकी रिपोर्ट में स्टेटस अपडेट न हो, तो सिबिल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर डिस्प्यूट (Dispute) दर्ज करें और अपनी एनओसी की कॉपी अपलोड करें। सिबिल बैंक से वेरिफिकेशन करके आपका रिकॉर्ड सुधार देगा।
कब टलेगा खतरा और क्या रखें ध्यान ?
जब पूरी प्रक्रिया के बाद आपकी सिबिल रिपोर्ट से 'Written Off' हटकर 'Closed' दिखाई देने लगे, तभी समझें कि आपकी प्रोफाइल अब खतरे से बाहर है। भविष्य के लिए हमेशा ध्यान रखें कि अपनी किश्तें, क्रेडिट कार्ड बिल और लोन की देनदारियां तय समय पर चुकाएं। एक साथ कई लोन लेने से बचें क्योंकि इससे डिफॉल्ट का खतरा काफी बढ़ जाता है। पैसों की कमी होना आम बात है, लेकिन बैंकिंग व्यवस्था में अपनी साख (भरोसा) खो देना बहुत बड़ी बात है, क्योंकि इसे वापस पाने में कई साल लग जाते हैं।

