CHB के प्रस्ताव से 1.5 लाख निवासियों को राहत की उम्मीद, मकानों में बदलाव नियमित करने और फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की तैयारी
Chandigarh Housing Board Relief : स्वतंत्र मकानों में जरूरत के अनुसार किए गए निर्माण को नियमित करने और बहुमंजिला फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की अनुमति देने पर विचार; जानिए किसे मिलेगा लाभ, क्या होंगी शर्तें और आवंटियों को आगे क्या करना होगा
Chandigarh Housing Board Relief : चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के करीब 35 हजार स्वतंत्र मकानों और फ्लैटों में रहने वाले लगभग 1.5 लाख निवासियों को राहत मिल सकती है। बोर्ड के निदेशक मंडल के समक्ष स्वतंत्र मकानों में जरूरत के अनुसार किए गए निर्माण को नियमित करने और बहुमंजिला फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की अनुमति देने के दो प्रस्ताव रखे गए हैं। इनका उद्देश्य पुराने निर्माण संबंधी मामलों का समाधान करना और फ्लैटों में रहने वाले बुजुर्गों तथा अन्य जरूरतमंद निवासियों की आवाजाही आसान बनाना है। प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय और उनकी शर्तें आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होंगी।
1. क्या हैं दोनों प्रस्ताव और किसे मिलेगा लाभ?
CHB के प्रस्तावों में स्वतंत्र मकानों में पहले से किए गए जरूरत आधारित बदलावों को निर्धारित नियमों के तहत नियमित करने और बहुमंजिला फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की अनुमति देने की बात कही गई है।
पहला प्रस्ताव स्वतंत्र मकानों से जुड़ा है। जिन आवंटियों ने परिवार की जरूरतों के अनुसार अपने मकानों में बदलाव, विस्तार या दोबारा निर्माण किया है, उन्हें निर्धारित नियमों के तहत इन निर्माणों को नियमित कराने का अवसर मिल सकता है।
दूसरा प्रस्ताव बहुमंजिला फ्लैटों में लिफ्ट लगाने से संबंधित है। इससे पुराने फ्लैटों में रहने वाले लोगों को लिफ्ट लगाने का कानूनी रास्ता मिल सकता है। इसका विशेष लाभ बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी का सामना करने वाले निवासियों को हो सकता है।
2. मकानों में बदलाव नियमित करने की जरूरत क्यों पड़ी ?
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रहने वाले कई परिवारों ने समय के साथ अपनी जरूरतों के अनुसार निर्माण में बदलाव किए। परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ने, अतिरिक्त जगह की जरूरत और आवासीय सुविधाओं में बदलाव के कारण मकानों के कुछ हिस्सों का विस्तार किया गया या दोबारा निर्माण हुआ।
इनमें से कई बदलाव बोर्ड की औपचारिक मंजूरी के बिना किए गए। इसके चलते आवंटियों को नोटिस और जुर्माने का सामना करना पड़ा। कई मामलों में यह परेशानी मकान आवंटित होने के बाद से बनी हुई है।
अब प्रस्ताव के जरिए ऐसे जरूरत आधारित निर्माण को निर्धारित भवन नियमों के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों के समाधान के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।
प्रशासक ने क्या निर्देश दिए ?
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने ‘द ट्रिब्यून’ से बातचीत में कहा कि उन्होंने CHB को इन बदलावों को एक बार में नियमित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने लिफ्ट लगाने की अनुमति को भी जनहित और मानवीय आधार पर जरूरी बताया। उनके अनुसार, आवंटियों को मकान आवंटित होने के बाद से नोटिस और जुर्माने का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उनकी वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि, प्रशासक ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
3. स्वतंत्र मकानों में निर्माण नियमित कैसे होगा?
प्रस्ताव के अनुसार, स्वतंत्र मकानों में बदलाव, दोबारा निर्माण और पुनर्निर्माण की अनुमति चंडीगढ़ बिल्डिंग रूल्स (CBR) में निर्धारित मरला-आधारित मकान मानकों के अनुसार दी जाएगी।
इसमें निर्माण से जुड़े दो महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं:
- ग्राउंड कवरेज : भूखंड के कुल क्षेत्रफल का वह हिस्सा जिस पर भवन का निर्माण किया जा सकता है।
- फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) : भूखंड के क्षेत्रफल के मुकाबले भवन की सभी मंजिलों के कुल निर्मित क्षेत्र का अनुपात।
यदि पहले जारी किए गए जरूरत आधारित बदलाव संबंधी आदेशों में ग्राउंड कवरेज या FAR की सीमा, मौजूदा बिल्डिंग रूल्स से अधिक निर्धारित थी, तो प्रस्ताव के अनुसार ऐसी स्थिति में अधिक सीमा लागू होगी।
पहले से किए गए निर्माण पर क्या होगा?
प्रस्ताव में मौजूदा वैध निर्माण को संरक्षण देने का प्रावधान है। इसके लिए आवंटियों को फैसले की औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद तीन महीने के भीतर CHB को इसकी जानकारी देनी होगी।
इसका अर्थ है कि आवंटियों को समयसीमा के भीतर अपने निर्माण का विवरण बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। हालांकि, यह राहत हर प्रकार के उल्लंघन पर स्वत: लागू नहीं होगी। जिन मामलों में नियमों के तहत उल्लंघन को नियमित नहीं किया जा सकता, उनमें कार्रवाई का सवाल बना रह सकता है।
4. फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की प्रक्रिया क्या होगी?
बहुमंजिला CHB फ्लैटों में लिफ्ट लगाने के लिए आवंटियों को पंजीकृत आर्किटेक्ट के माध्यम से आवेदन करना होगा। प्रस्ताव में इसके लिए ऑफलाइन आवेदन और स्व-प्रमाणन की व्यवस्था रखी गई है।
आवेदन के साथ दो प्रमुख दस्तावेज देने होंगे:
- स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट: भवन की संरचनात्मक स्थिरता से संबंधित प्रमाणपत्र। इसके लिए CBR-2017 के फॉर्म-J का उल्लेख किया गया है।
- संशोधित बिल्डिंग प्लान: लिफ्ट लगाने के बाद भवन की संशोधित योजना। CHB को आवेदन पर 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा।
लिफ्ट लगाने के लिए जगह कहां से मिलेगी?
लिफ्ट लगाने के लिए भवन की मौजूदा बनावट और उपलब्ध जगह को ध्यान में रखा जाएगा। प्रस्ताव के मुताबिक, यदि बिल्डिंग लाइन के भीतर पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, तो लिफ्ट लगाने के लिए आसपास की सरकारी जमीन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
लेकिन इसके साथ महत्वपूर्ण शर्त जुड़ी है। सरकारी जमीन के इस्तेमाल से आवंटी को उस जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलेगा। यह व्यवस्था सीमित अपवाद के रूप में प्रस्तावित है और इसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की सामान्य अनुमति नहीं माना जाएगा।
लिफ्ट की जगह की गणना में क्या छूट मिलेगी ?
बहुमंजिला फ्लैटों में लिफ्ट वेल यानी लिफ्ट के लिए निर्धारित जगह को ग्राउंड कवरेज और FAR की गणना से बाहर रखने का प्रस्ताव है। यह छूट स्वतंत्र मकानों पर लागू नहीं होगी। यानी फ्लैटों और स्वतंत्र मकानों के लिए इस मामले में अलग-अलग नियम प्रस्तावित हैं।
5. क्या सभी फ्लैट निवासियों की सहमति जरूरी होगी ?
लिफ्ट लगाने के लिए आवेदन जमा करने के समय ब्लॉक के अन्य सभी निवासियों की सहमति अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि, लिफ्ट लगाने और उसके रखरखाव में खर्च की हिस्सेदारी का सवाल महत्वपूर्ण रहेगा। प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई निवासी शुरुआत में सहमति नहीं देता, लेकिन बाद में लिफ्ट की स्थापना और रखरखाव के खर्च में हिस्सा देने के लिए तैयार हो जाता है, तो उसे लिफ्ट के इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाना है, जबकि खर्च और उपयोग से जुड़े मामलों को भी ध्यान में रखना है।
6. प्रस्तावों के पीछे कौन-सी समिति और अदालती आदेश हैं ?
दोनों प्रस्ताव 11 मई, 2026 को गठित एक समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति को आवंटियों द्वारा किए गए निर्माण संबंधी बदलावों का आकलन करने, यह पहचानने कि किन बदलावों की अनुमति दी जा सकती है और संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों पर विचार करने का जिम्मा दिया गया था।
इस प्रक्रिया में दो न्यायिक आदेशों को भी ध्यान में रखा गया है :-
- 21 अप्रैल, 2022 का पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश।
- 10 जनवरी, 2023 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश।
इन आदेशों के तहत CHB को अपने आवासीय भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणित करने की जरूरत बताई गई थी। इसीलिए प्रस्ताव में निर्माण नियमित करने के साथ सुरक्षा प्रमाणपत्र और संशोधित भवन योजना जैसी शर्तें शामिल की गई हैं।
7. बोर्ड की मंजूरी के बाद क्या होगा ?
यदि बोर्ड दोनों प्रस्तावों को मंजूरी देता है, तो आगे की प्रक्रिया में CHB विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करेगा। इसके साथ ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (OBPAS) को भी अपडेट किया जाएगा, ताकि आवेदनों को नई व्यवस्था के अनुसार संसाधित किया जा सके।
जब तक ऑनलाइन सिस्टम अपडेट नहीं होता, तब तक आवेदन ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से लिए जाएंगे।
इसका मतलब है कि बोर्ड की मंजूरी के बाद भी आवंटियों को विस्तृत नियमों और आवेदन प्रक्रिया के औपचारिक रूप से जारी होने का इंतजार करना होगा।
8. आवंटियों को अभी क्या तैयारी करनी चाहिए ?
स्वतंत्र मकानों में बदलाव कराने वाले आवंटियों को अपने निर्माण का विवरण और उपलब्ध दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। प्रस्ताव के अनुसार, उन्हें पंजीकृत आर्किटेक्ट से योजना तैयार करवाने और जहां जरूरी हो, संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र लेने की जरूरत पड़ सकती है।
आवंटियों को फैसले की औपचारिक अधिसूचना जारी होने की तारीख पर ध्यान देना होगा। निर्माण संबंधी जानकारी देने के लिए तीन महीने की समयसीमा इसी अधिसूचना के बाद शुरू होगी।
लिफ्ट लगवाने की इच्छा रखने वाले फ्लैट निवासियों को पंजीकृत आर्किटेक्ट से संपर्क कर भवन की स्थिति का आकलन करवाना होगा। आवेदन के साथ संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणपत्र और संशोधित भवन योजना देनी होगी।
केवल बोर्ड की बैठक की तारीख को तीन महीने की समयसीमा की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। इसके लिए औपचारिक अधिसूचना की तारीख महत्वपूर्ण होगी।
9. इस प्रस्ताव का निवासियों के लिए क्या मतलब है?
CHB के स्वतंत्र मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए यह प्रस्ताव पुराने निर्माण संबंधी मामलों को नियामकीय दायरे में लाने का अवसर बन सकता है। इससे उन आवंटियों को राहत मिलने की संभावना है, जिन्होंने अपनी वास्तविक जरूरतों के अनुसार मकानों में बदलाव किए थे और लंबे समय से नोटिस या जुर्माने का सामना कर रहे हैं।
बहुमंजिला फ्लैटों में रहने वाले लोगों के लिए लिफ्ट लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था रोजमर्रा की आवाजाही को आसान बना सकती है। इसका विशेष महत्व बुजुर्गों और चलने-फिरने में कठिनाई का सामना करने वाले निवासियों के लिए है।
लेकिन राहत का वास्तविक दायरा बोर्ड के अंतिम फैसले, अधिसूचना, भवन नियमों और सुरक्षा संबंधी शर्तों से तय होगा। सरकारी जमीन पर मालिकाना हक या अतिक्रमण की सामान्य अनुमति इस प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है।
एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संभावित लाभार्थी | करीब 1.5 लाख निवासी |
| आवासीय इकाइयां | करीब 35 हजार CHB स्वतंत्र मकान और फ्लैट |
| पहला प्रस्ताव | स्वतंत्र मकानों में जरूरत आधारित निर्माण नियमित करना |
| दूसरा प्रस्ताव | बहुमंजिला फ्लैटों में लिफ्ट लगाने की अनुमति |
| निर्माण की सूचना | अधिसूचना के बाद तीन महीने |
| लिफ्ट आवेदन पर जवाब | 30 दिनों के भीतर |
| अगला कदम | बोर्ड का अंतिम फैसला, SOP और OBPAS अपडेट |

