चंडीगढ़ की पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना बदहाल, साइकिलों की चोरी और तोड़फोड़ से घटा लोगों का रुझान
कई डॉकिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त, साइकिलों की हालत खराब; ऑपरेटर पर दो साल में करीब 2.75 करोड़ रुपये का जुर्माना
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत वर्ष 2020 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर शुरू की गई चंडीगढ़ की पब्लिक बाइक शेयरिंग (PBS) योजना अब बदहाल स्थिति में पहुंच गई है।
साइकिलों में तोड़फोड़, चोरी, डॉकिंग स्टेशनों को नुकसान, खराब रखरखाव और कम इस्तेमाल के कारण योजना अपनी चमक खोती जा रही है। शहर के कई हिस्सों में टूटी साइकिलें, क्षतिग्रस्त डॉकिंग स्टेशन, उखड़ी हुई फर्श और उगी घास लोगों को इस सुविधा का इस्तेमाल करने से हतोत्साहित कर रहे हैं।
मार्च 2025 में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) के बंद होने के बाद इस परियोजना का संचालन नगर निगम (MC) को सौंप दिया गया था। इसके बाद से नगर निगम ने योजना के संचालनकर्ता स्मार्ट बाइक टेक प्राइवेट लिमिटेड पर समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने के आरोप में कई बार जुर्माना लगाया है।
जून में साइकिलों की कमी पर 15.86 लाख का जुर्माना
नगर निगम ने 13 जुलाई को जारी नोटिस में कंपनी पर 15.86 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह जुर्माना जून 2026 में निर्धारित संख्या में स्मार्ट साइकिलें जमीन पर उपलब्ध नहीं होने के कारण लगाया गया। नोटिस में कहा गया कि एजेंसी से मिले जून 2026 के सेवा स्तर के आंकड़ों के आधार पर साइकिलों की उपलब्धता के लिए जुर्माना निर्धारित किया गया है। पिछले दो वर्षों में ऐसे जुर्मानों की कुल राशि करीब 2.75 करोड़ रुपये हो चुकी है।
कंपनी को यह परियोजना वर्ष 2020 में आवंटित की गई थी और अनुबंध शुरू में 10 साल के लिए किया गया था। समझौते के अनुसार कंपनी नगर निगम को करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह लाइसेंस फीस देती है। उसे डॉकिंग स्टेशनों पर लगाए गए विज्ञापन पैनलों से आय अर्जित करने की भी अनुमति है।
10 रुपये प्रति घंटे में मिलती है साइकिल
इस सेवा का इस्तेमाल मोबाइल एप के जरिये किया जा सकता है। उपयोगकर्ता को डिजिटल वॉलेट में निर्धारित राशि रखनी होती है। डॉकिंग स्टेशन पर साइकिल पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद उसका लॉक खुल जाता है। साइकिल किराये की दर 10 रुपये प्रति घंटे है।
शहर के कई डॉकिंग स्टेशनों का जायजा लेने पर बड़ी संख्या में साइकिलें गायब मिलीं, जबकि जो साइकिलें उपलब्ध थीं, उनमें से कई खराब हालत में थीं। कुछ की सीटें टूटी हुई थीं और अन्य हिस्से भी क्षतिग्रस्त थे। कई डॉकिंग स्टेशन भी रखरखाव के अभाव में बदहाल नजर आए।
नियमित उपयोगकर्ता राजीव ने कहा कि बाइक शेयरिंग सेवा की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। उनके अनुसार, पहले साइकिलों की हालत अच्छी थी, लेकिन अब अधिकांश साइकिलें या तो डॉकिंग स्टेशन से गायब रहती हैं या अच्छी स्थिति में नहीं होतीं।
कंपनी ने चोरी और तोड़फोड़ को बताया बड़ी समस्या
नगर निगम के नोटिस के जवाब में स्मार्ट बाइक टेक प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि वह लगातार चोरी, तोड़फोड़, दुरुपयोग और अतिक्रमण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। कंपनी का दावा है कि इन समस्याओं का उसके संचालन पर गंभीर असर पड़ रहा है और ये उसके उचित नियंत्रण से बाहर हैं।
कंपनी ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उसके अनुसार, ऐसे मामलों को लेकर स्थानीय पुलिस में 70 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। कंपनी ने नगर निगम पर भी जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक सहयोग या हस्तक्षेप नहीं करने का आरोप लगाया।
कंपनी के मुताबिक, कई जगह रैक को हटाने या क्षतिग्रस्त करने की घटनाएं सामने आई हैं, खासकर आवासीय इलाकों के आसपास। कई मामलों में स्थानीय निवासियों और दुकानदारों द्वारा डॉकिंग क्षेत्र का इस्तेमाल निजी वाहनों की पार्किंग के लिए किए जाने का भी आरोप लगाया गया। कंपनी ने कहा कि इन समस्याओं को पहले चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के समक्ष भी उठाया गया था।
विपक्ष ने साधा निशाना
चंडीगढ़ आप के अध्यक्ष विजय पाल सिंह ने आरोप लगाया कि नगर निगम की कोई भी परियोजना ठीक से नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि ऐसी परियोजनाओं पर खर्च की जा रही है, जिनसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे।
चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने बाइक शेयरिंग योजना को एक और असफल स्मार्ट सिटी परियोजना बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि योजना ठीक ढंग से संचालित हो और शहरवासियों को इसका लाभ मिले।
वहीं, महापौर सौरभ जोशी ने कहा कि वह मामले को देखेंगे और शहरवासियों के हित में परियोजना को बेहतर बनाने के उपाय तलाशेंगे। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि साइकिलें अच्छी स्थिति में रहें और परियोजना सुचारू रूप से संचालित हो।

