Explainer : चंडीगढ़ की सड़कों पर हर चार दिन में एक मौत क्यों, जानिये कहां चूक रहा है सिस्टम
12.5 लाख की आबादी वाले चंडीगढ़ में 14.27 लाख वाहन रजिस्टर्ड, वाहन घनत्व में देश में सबसे आगे सिटी ब्यूटीफुल
Chandigarh Speed vs Safety : जिस शहर को आप सुव्यवस्थित सेक्टरों, चौड़ी सड़कों और अनुशासित यातायात के लिए जानते हैं, वहीं अब हर चार दिन में एक व्यक्ति सड़क पर जान गंवा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 के बीच शहर में 987 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इनमें 407 लोगों की मौत हुई और 836 घायल हुए। औसतन हर दो दिन में एक हादसा, हर चार दिन में एक मौत और लगभग हर दो दिन में एक व्यक्ति घायल हुआ। सवाल साफ है। आखिर कहां चूक रहा है सिस्टम।
वाहनों का विस्फोट, शहर पर दबाव
चंडीगढ़ में 14.27 लाख वाहन पंजीकृत हैं, जबकि आबादी लगभग 12.5 लाख है। यानी प्रति 1000 निवासियों पर 1142 वाहन। राष्ट्रीय औसत 280 है। इस तुलना से स्पष्ट है कि वाहन घनत्व के मामले में यह शहर देश में शीर्ष पर है।
हर दिन 104 नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। यदि यही रफ्तार जारी रही तो वाहन संख्या 15 लाख के पार पहुंच जाएगी। शहर की मूल डिजाइन दशकों पहले बनी थी, जब प्रति परिवार वाहन संख्या सीमित थी। आज एक परिवार में दो या तीन वाहन सामान्य हैं। पार्किंग का दबाव, जंक्शनों पर भीड़ और हाई स्पीड कॉरिडोर, सभी मिलकर जोखिम बढ़ा रहे हैं।
पांच साल का ट्रेंड, कहां बिगड़ी तस्वीर
- 2022 सबसे गंभीर वर्ष रहा। 237 दुर्घटनाएं और 203 घायल मामले दर्ज हुए। यह पांच साल का उच्चतम स्तर था।
- 2023 में 67 घातक दुर्घटनाएं दर्ज हुईं।
- 2024 में सुधार दिखा। कुल दुर्घटनाएं घटकर 169 रहीं और घायल 133।
- 2025 में फिर उछाल आया। घातक दुर्घटनाएं 15.3 प्रतिशत बढ़कर 83 हो गईं। मौतों की संख्या 86 पहुंच गई और कुल दुर्घटनाएं 191 दर्ज हुईं।
दो वर्षों की गिरावट एक ही वर्ष में लगभग समाप्त हो गई। यह बताता है कि सुधार अस्थायी था, स्थायी नहीं।
ब्लैक स्पॉट जो हादसों को दे रहे न्योता
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 500 मीटर का वह हिस्सा जहां तीन वर्षों में पांच या अधिक गंभीर दुर्घटनाएं या 10 मौतें हों, ब्लैक स्पॉट माना जाता है।
- 2023 से 2025 के बीच चार ब्लैक स्पॉट चिन्हित हुए।
- सबसे चिंताजनक खंड NH-05 पर हल्लोमाजरा से पोल्ट्री फार्म चौक के बीच है। यहां नौ दुर्घटनाएं और नौ मौतें दर्ज हुईं।
- शहरी क्षेत्र में कालाग्राम, हाउसिंग बोर्ड लाइट प्वाइंट मध्य मार्ग और मिल्क कॉलोनी धनास लाइट प्वाइंट पर पांच या अधिक दुर्घटनाओं में पांच पांच मौतें हुईं।
इन स्थानों पर हाई ट्रैफिक वॉल्यूम, मिश्रित यातायात और कई बार सिग्नल अनुशासन की कमी प्रमुख कारण माने जाते हैं।
सिस्टम की चूक कहां
पहला : वाहन संख्या की तुलना में सार्वजनिक परिवहन की सीमित स्वीकृति। निजी वाहनों पर निर्भरता अधिक है।
दूसरा : स्पीड कंट्रोल का व्यवहारिक पालन कमजोर। चौड़ी और सीधी सड़कों पर गति सीमा का उल्लंघन आम है।
तीसरा : रेड लाइट जंपिंग और लेन अनुशासन की कमी।
चौथा : पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचे की सीमित उपलब्धता।
पांचवां : ट्रैफिक इंजीनियरिंग सुधारों का समय पर क्रियान्वयन नहीं होना।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सड़क सुरक्षा केवल चालान से नहीं सुधरती। डिजाइन, प्रवर्तन और व्यवहार परिवर्तन, तीनों का संतुलन जरूरी है।
राष्ट्रीय तस्वीर में चंडीगढ़ की अलग चुनौती
- देश में 2023 के दौरान 4,64,029 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। 1.73 लाख मौतें और 4.47 लाख घायल हुए।
- दिल्ली 5,715 दुर्घटनाओं और 1,457 मौतों के साथ शीर्ष पर रहा। बेंगलुरु और जयपुर भी उच्च संख्या में रहे।
संख्या के लिहाज से चंडीगढ़ महानगरों से पीछे है, लेकिन प्रति व्यक्ति वाहन घनत्व और घातक अनुपात इसे अलग श्रेणी में खड़ा करता है। छोटा शहर, बड़ी वाहन संख्या, सीमित विस्तार।
प्रशासन क्या कर रहा है
- चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस ने सेफ सिस्टम अप्रोच पर आधारित रोड सेफ्टी डायलॉग और वर्कशॉप शुरू की है।
- मैनुअल एटीसी सिग्नलों को आईटीएमएस आधारित एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। सीसीटीवी निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है।
- पूर्व मार्ग पर ट्रिब्यून चौक से ट्रांसपोर्ट चौक तक साइकिल ट्रैक को अलग किया जा रहा है।
- ट्रिब्यून चौक से एयरपोर्ट लाइट प्वाइंट तक सड़क चौड़ी की जा रही है।
- छह स्थानों पर पेलिकन लाइट और 61 स्थानों पर ब्लिंकर लगाए गए हैं। सेक्टर 29 और 30 डिवाइडर पर आयरन ग्रिल के साथ साइकिल ट्रैक विकसित किया गया है।
- रोड सेफ्टी इम्प्लीमेंटेशन सेल हर घातक दुर्घटना स्थल का निरीक्षण कर सुधारात्मक सिफारिशें देता है।
सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए बहुस्तरीय प्रयास जारी : डीजीपी
डीजीपी डॉ सागर प्रीत हुड्डा ने स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ की सड़कों पर होने वाली हर मौत प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सख्त प्रवर्तन के साथ साथ स्मार्ट ट्रैफिक इंजीनियरिंग और निरंतर जन जागरूकता अभियान को समान प्राथमिकता दी जा रही है। निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है, ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बिना किसी अपवाद के कार्रवाई की जा रही है।
एसएसपी ट्रैफिक सुमेर प्रताप सिंह ने बताया कि शहर में प्रतिदिन 100 से अधिक नए वाहन पंजीकृत हो रहे हैं, जिससे यातायात दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में टीमें चौबीस घंटे स्पीड मॉनिटरिंग और अन्य उल्लंघनों पर नजर रख रही हैं। हाई रिस्क जंक्शनों को सुरक्षित बनाने के लिए इंजीनियरिंग विभागों के साथ समन्वय कर संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं, ताकि दुर्घटनाओं में स्थायी कमी लाई जा सके।
आगे की राह
विशेषज्ञों का कहना है कि चंडीगढ़ को निजी वाहन निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस नीति बनानी चाहिए।
- क्या सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत किया जाए।
- क्या स्कूल स्तर से सड़क सुरक्षा शिक्षा अनिवार्य की जाए।
- क्या स्पीड मॉनिटरिंग को पूरी तरह ऑटोमेटेड बनाया जाए।
- हर चार दिन में एक मौत केवल एक संख्या नहीं है। यह एक परिवार की त्रासदी है।
- 2025 की वृद्धि स्पष्ट संकेत है कि यदि प्रयास सतत और समन्वित नहीं हुए तो सुधार क्षणिक ही रहेगा।

