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Chandigarh Laws Explained : चंडीगढ़ में क्यों लागू हैं पंजाब के 238 और हरियाणा के 7 कानून? समझिए धारा 87 का पूरा खेल

लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दी जानकारी; पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारा 87 के तहत केंद्र सरकार अधिसूचना जारी कर राज्य के कानून चंडीगढ़ में लागू कर सकती है

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Chandigarh Laws Explained : चंडीगढ़ में इस समय पंजाब के 238 और हरियाणा के सात अधिनियम लागू हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये आंकड़े चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर हैं।

चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी जरूर है, लेकिन यह एक केंद्रशासित प्रदेश है। इसलिए दोनों राज्यों में लागू हर कानून स्वत: चंडीगढ़ में लागू नहीं हो जाता। किसी राज्य के कानून को यहां लागू करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।्र

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धारा 87 में है कानून लागू करने का प्रावधान

इस पूरी व्यवस्था में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 अहम है। इसके तहत केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर किसी राज्य में लागू कानून को चंडीगढ़ में भी लागू कर सकती है। केंद्र सरकार जरूरत के अनुसार उस कानून को कुछ प्रतिबंधों या संशोधनों के साथ लागू कर सकती है।

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यानी पंजाब या हरियाणा की विधानसभा में कोई कानून पारित होने भर से वह चंडीगढ़ में लागू नहीं हो जाता। उसके लिए केंद्र की ओर से अलग अधिसूचना जरूरी होती है।

कानून चंडीगढ़ में कैसे पहुंचता है?

सरकार के अनुसार, राज्य के किसी कानून को चंडीगढ़ में लागू करने का प्रस्ताव चंडीगढ़ प्रशासन स्थानीय जरूरतों के आधार पर शुरू करता है। इसके बाद प्रस्ताव का उसके नीति उद्देश्य और कानूनी प्रभाव के आधार पर अलग-अलग परीक्षण किया जाता है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राज्य के कानूनों को चंडीगढ़ में लागू करने के लिए अलग से कोई व्यापक नीति जरूरी नहीं है। इसके लिए पहले से एक स्थापित प्रक्रिया मौजूद है और प्रत्येक प्रस्ताव को उसके गुण-दोष के आधार पर देखा जाता है।

आसान भाषा में प्रक्रिया

स्थानीय जरूरत सामने आई → चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रस्ताव शुरू किया → प्रस्ताव का परीक्षण हुआ → केंद्र ने फैसला किया → अधिसूचना जारी हुई → कानून चंडीगढ़ में लागू हुआ।

238 पंजाब कानून का मतलब क्या ?

लोकसभा में दिए आंकड़े बताते हैं कि चंडीगढ़ में पंजाब के 238 अधिनियम फिलहाल लागू हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि पंजाब में लागू सभी कानून चंडीगढ़ में भी लागू हैं।

किसी कानून की चंडीगढ़ में स्थिति जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि उसे धारा 87 के तहत यहां विस्तारित किया गया है या नहीं और इसके लिए केंद्र की अधिसूचना जारी हुई है या नहीं।

इंडिया कोड के रिकॉर्ड में धारा 87 के तहत चंडीगढ़ में अलग-अलग कानूनों के विस्तार की कई अधिसूचनाएं दर्ज हैं। इनमें पंजाब के साथ-साथ हरियाणा और अन्य राज्यों से जुड़े कानूनों के विस्तार के उदाहरण भी मिलते हैं।

हरियाणा के 7 कानून भी लागू

चंडीगढ़ में पंजाब के कानूनों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन यहां हरियाणा के सात अधिनियम भी लागू हैं। यह भी धारा 87 की व्यवस्था को समझने में महत्वपूर्ण है।

धारा 87 किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। इसमें केंद्र सरकार को किसी राज्य में अधिसूचना की तारीख पर लागू कानून को चंडीगढ़ तक विस्तारित करने की शक्ति दी गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि चंडीगढ़ में केवल पंजाब के कानून ही लागू किए जा सकते हैं।

क्या हर नया राज्य कानून चंडीगढ़ में लागू होगा ?

नहीं।

राज्य में नया कानून बनने और उसके चंडीगढ़ में लागू होने के बीच कानूनी प्रक्रिया होती है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बिना संबंधित राज्य कानून को चंडीगढ़ में लागू नहीं माना जा सकता।

धारा 87 में स्पष्ट है कि केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से किसी राज्य में लागू अधिनियम को चंडीगढ़ तक विस्तारित कर सकती है। साथ ही वह कानून को आवश्यक संशोधनों या प्रतिबंधों के साथ लागू कर सकती है।

क्यों बनाई गई ऐसी व्यवस्था?

पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत पंजाब के पुनर्गठन के साथ हरियाणा का गठन हुआ और चंडीगढ़ को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। अधिनियम में चंडीगढ़ के प्रशासन और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के लिए अलग व्यवस्था की गई।

ऐसे में यह जरूरी था कि जरूरत पड़ने पर किसी राज्य में पहले से लागू कानून को चंडीगढ़ तक विस्तारित करने का कानूनी रास्ता उपलब्ध हो। धारा 87 इसी उद्देश्य के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान है।

अदालत में भी पहुंच चुका है मामला

धारा 87 के तहत केंद्र की शक्तियों को अदालत में चुनौती भी दी जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने Ramesh Birch बनाम Union of India मामले में इस प्रावधान की वैधता पर विचार किया था।

इस मामले में सवाल था कि केंद्र सरकार धारा 87 के तहत किसी राज्य में बाद में लागू हुए कानून को भी चंडीगढ़ तक विस्तारित कर सकती है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 87 के तहत केंद्र की शक्ति को बरकरार रखा।

इसका मतलब है कि धारा 87 केवल 1966 में मौजूद कानूनों तक सीमित नहीं है। अधिसूचना के समय किसी राज्य में लागू कानून को निर्धारित प्रक्रिया के तहत चंडीगढ़ में विस्तारित किया जा सकता है।

सरकार ने अलग नीति की जरूरत क्यों नहीं मानी ?

लोकसभा में नित्यानंद राय के जवाब के अनुसार, राज्य के कानूनों को चंडीगढ़ में लागू करने के लिए अलग से कोई व्यापक नीति बनाने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि पहले से स्थापित प्रक्रिया के तहत हर प्रस्ताव की अलग-अलग जांच की जाती है।

इसमें स्थानीय जरूरत, कानून के उद्देश्य और उसके कानूनी प्रभाव को देखा जाता है। यानी किसी कानून के विस्तार का फैसला सामान्य फार्मूले से नहीं, बल्कि संबंधित प्रस्ताव के आधार पर किया जाता है

पूरी व्यवस्था एक नजर में

सवालजवाब
चंडीगढ़ में पंजाब के कितने अधिनियम लागू हैं?238
हरियाणा के कितने अधिनियम लागू हैं?7
राज्य का कानून चंडीगढ़ में स्वत: लागू होता है?नहीं
मुख्य कानूनी प्रावधानपंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87
कानून कौन विस्तारित करता है?केंद्र सरकार
कैसे?राजपत्र में अधिसूचना के जरिए
क्या संशोधन संभव है?हां, आवश्यक प्रतिबंध या संशोधन के साथ
प्रस्ताव कौन शुरू करता है?चंडीगढ़ प्रशासन, स्थानीय जरूरत के आधार पर

सरकार के जवाब का सार

लोकसभा में दिए जवाब से साफ है कि चंडीगढ़ में राज्य कानूनों की लागू स्थिति स्वचालित नहीं बल्कि अधिसूचना आधारित है। पंजाब के 238 और हरियाणा के सात अधिनियम फिलहाल यहां लागू हैं। किसी नए राज्य कानून को चंडीगढ़ में लागू करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन स्थानीय जरूरत के आधार पर प्रस्ताव शुरू कर सकता है और केंद्र सरकार धारा 87 के तहत उस पर फैसला लेकर अधिसूचना जारी कर सकती है। -एजेंसी इनपुट के साथ

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