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चंडीगढ़ में किरायेदारी के लिए नए नियम लागू: मकान मालिक-किरायेदार के लिए क्या बदला, जानें 7 बड़े बदलाव

किरायेदारी समझौते की ऑनलाइन सूचना अनिवार्य; किराया प्राधिकरण, न्यायालय और अधिकरण की त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू

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चंडीगढ़ में किरायेदार और मकान मालिक के बीच किराये, भुगतान और परिसर के कब्जे से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू हो गई है। चंडीगढ़ प्रशासन के संपदा विभाग ने संघ राज्य क्षेत्र चंडीगढ़ किरायेदारी नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इसके तहत किरायेदारी समझौते की सूचना ऑनलाइन देना अनिवार्य होगा और विवादों के निपटारे के लिए किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की व्यवस्था की गई है।

नियमों के अनुसार मकान मालिक और किरायेदार को किरायेदारी समझौता होने के दो माह के भीतर संयुक्त रूप से या अलग-अलग ऑनलाइन माध्यम से किराया प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी होगी। सूचना मिलने के सात दिन के भीतर प्राधिकरण पक्षकारों को विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) जारी करेगा। यह पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल पर ई-रसीद के रूप में भेजी जाएगी।

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किराया नहीं लिया तो प्राधिकरण में जमा करा सकेंगे

किराया प्राधिकरण को गठन के तीन माह के भीतर स्थानीय भाषा और प्रशासक द्वारा निर्धारित अन्य भाषाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म स्थापित करना होगा। इस पर किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे।

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रिकॉर्ड और दस्तावेज गोपनीय रखे जाएंगे और इन तक केवल संबंधित पक्षकारों तथा अधिकृत अधिकारियों की पहुंच होगी। यदि मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है या रसीद जारी नहीं करता तो किरायेदार लगातार दो माह तक आरटीजीएस, एनईएफटी, चेक या डिमांड ड्राफ्ट जैसे माध्यमों से भुगतान कर सकेगा। इसके बाद भी भुगतान स्वीकार नहीं होने पर किरायेदार राशि किराया प्राधिकरण के पास जमा करा सकेगा।

किराये, बिजली, पानी, रखरखाव और सुरक्षा जैसे अन्य शुल्कों के निर्धारण या संशोधन के लिए भी किराया प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा सकेगा। किरायेदारी अवधि के दौरान मकान मालिक अथवा उसकी मृत्यु की स्थिति में कानूनी उत्तराधिकारी आवश्यक दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ परिसर का कब्जा वापस लेने के लिए किराया न्यायालय में आवेदन कर सकेंगे।

15 दिन में देना होगा जवाब, 60 दिन में अपील पर फैसला

किराया प्राधिकरण के समक्ष दायर आवेदन पर दूसरे पक्ष को 15 दिन के भीतर जवाब देना होगा। कारण दर्ज होने पर यह अवधि अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाई जा सकती है। किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के 60 दिन के भीतर अपील पर निर्णय करना होगा। सामान्यतः केवल एक स्थगन की अनुमति होगी। किराया न्यायालय के आदेशों का निष्पादन नोटिस की तामील के 30 दिन के भीतर करना होगा।

पक्षकार स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि अथवा अधिवक्ता के माध्यम से कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। पक्षकारों के बीच अलग व्यवस्था न होने पर बकाया किराये और अन्य शुल्कों तथा सुरक्षा राशि या अग्रिम किराये की वापसी पर ब्याज भारतीय स्टेट बैंक की उच्चतम एमसीएलआर से दो प्रतिशत अधिक दर से निर्धारित किया जाएगा।

उपायुक्त-सह-संपदा अधिकारी निशांत कुमार यादव, आईएएस ने कहा कि नए नियम मकान मालिकों और किरायेदारों के संबंधों में सुगमता, पारदर्शिता और निश्चितता लाएंगे। साथ ही विवादों के समाधान के लिए सुव्यवस्थित तंत्र सुनिश्चित होगा।

ये हैं सात बड़े बदलाव

किरायेदारी समझौता ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य

  1. मिलेगा यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर। मकान मालिक और किरायेदार को समझौता होने के दो माह के भीतर किराया प्राधिकरण को ऑनलाइन इसकी सूचना देनी होगी।
  2. सूचना मिलने के सात दिन के भीतर किराया प्राधिकरण दोनों पक्षों को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) जारी करेगा। यह पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल पर ई-रसीद के रूप में मिलेगी।
  3. मकान मालिक किराया न ले तो प्राधिकरण में जमा कर सकेंगे। अगर मकान मालिक किराया लेने से इनकार करता है या रसीद नहीं देता, तो किरायेदार पहले लगातार दो महीने RTGS, NEFT, चेक या डिमांड ड्राफ्ट से भुगतान का प्रयास कर सकेगा। इसके बाद किराया प्राधिकरण के पास राशि जमा कराई जा सकेगी।
  4. किराया विवाद के लिए तीन स्तर की व्यवस्था। विवादों के निपटारे के लिए किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की व्यवस्था होगी। इससे किरायेदारी से जुड़े मामलों के लिए अलग संस्थागत तंत्र उपलब्ध होगा।
  5. आवेदन पर 15 दिन में जवाब देना होगा। किराया प्राधिकरण के समक्ष दायर आवेदन पर दूसरे पक्ष को 15 दिन के भीतर जवाब देना होगा। कारण दर्ज होने पर यह अवधि अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाई जा सकती है।
  6. अपील पर 60 दिन में फैसला। किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के 60 दिन के भीतर अपील पर निर्णय करना होगा। सामान्य तौर पर केवल एक स्थगन की अनुमति होगी।
  7. बकाया किराये और सुरक्षा राशि पर ब्याज का प्रावधान। पक्षकारों के बीच अलग व्यवस्था न होने पर बकाया किराये व अन्य शुल्क तथा सुरक्षा राशि/अग्रिम किराये की वापसी पर ब्याज एसबीआई की उच्चतम एमसीएलआर से 2 प्रतिशत अधिक दर से निर्धारित किया जाएगा।
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