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Explainer : नोटिस के साये से बाहर आएगा चंडीगढ़ : 15 साल बाद 'किस्तों' में मिली राहत, पर शर्तों की 'लाल रेखा' बरकरार

CHB की नीड-बेस्ड पॉलिसी बहाल ; क्या मनीमाजरा से सेक्टर-63 तक के आवंटियों का बरसों पुराना 'दाग' होगा साफ ?

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CHB Need-Based Policy : चंडीगढ़ के हाउसिंग बोर्ड (CHB) घरों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए यह साल बड़ी सौगात लेकर आया है। वह शहर, जो अपनी वास्तुकला की कड़ाई और 'ली कार्बूज़िए' के सख्त नियमों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, अब अपने ही नागरिकों की 'मजबूरी' में किए गए बदलावों को अपनाने को तैयार है।

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने 3 जनवरी 2023 के नियमों को कुछ सुधार के साथ फिर से लागू कर दिया है। यह उन लोगों की जीत है जो अपने घर को 'अवैध' होने के नोटिस से बचाने के लिए 15 साल से संघर्ष कर रहे थे।

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फाइलों में दफन 15 साल का 'वनवास' (2010 - 2026)

नीड-बेस्ड पॉलिसी का सफरनामा भावनाओं, कोर्ट केस और सरकारी फाइलों के उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।

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2010 का दशक : यह वह दौर था जब पहली बार आधिकारिक तौर पर यह मुद्दा उठा कि बढ़ते परिवारों के लिए छोटे फ्लैट्स में 'जरूरत के हिसाब से बदलाव' (Need-based changes) अपरिहार्य हैं।

2013-14 की सख्ती : हाउसिंग बोर्ड ने अचानक हजारों घरों को नोटिस भेजने शुरू किए। बुलडोजर की गूंज ने लोगों को पहली बार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की दहलीज तक पहुंचाया।

2019 का 'डेमोकल्स स्वॉर्ड': चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 के नाम पर नियमों को और कड़ा कर दिया गया। पेनल्टी की राशि लाखों में पहुंच गई और आवंटियों के ऊपर 'रिज़म्पशन' (मकान का कब्जा वापस लेना) की तलवार लटकने लगी।

 3 जनवरी 2023 : चंडीगढ़ प्रशासन ने भारी जन-दबाव के बाद एक व्यापक राहत अधिसूचना जारी की, लेकिन खुशियां कुछ समय के लिए ही थी।

10 जनवरी 2023 का झटका : ठीक सात दिन बाद सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक 'FAR फ्रीज' आदेश आया। इस आदेश के बाद पूरी प्रक्रिया पर रोक लग गई थी।

फरवरी 2026 : लंबी कानूनी माथापच्ची और दिल्ली से मिली हरी झंडी के बाद प्रशासक ने अधिसूचना के मुख्य क्लॉजों को दोबारा जीवित किया और अधिसूचना जारी की।

 वह 'सुप्रीम' पेच, जिसने रोक दी थी राहत की लहर

जनवरी 2023 में जब पहली बार यह पॉलिसी सार्वजनिक हुई थी, तो सेक्टर-41, 44 और 47 की तंग गलियों में ढोल-नगाड़े बजे थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 'अपार्टमेंटलाइजेशन' पर रोक लगाने वाले फैसले ने एक तकनीकी पेच फंसा दिया। प्रशासन के सामने संकट था कि अगर वे FAR (Floor Area Ratio) बढ़ाते हैं, तो यह अदालत की अवमानना होगी।

अब 2026 में, प्रशासन ने एक  बीच का रास्ता निकाला है। प्रशासन ने केवल उन्हीं बदलावों को मंजूरी दी है, जो शहर के बुनियादी ढांचे जैसे बिजली, पानी और सीवरेज पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालते।

राहत की 'ग्रीन विंडो': आपके लिए क्या-क्या बदला?

प्रशासन ने अधिसूचना के क्लॉज 2–21, 24 और 26–28 को हरी झंडी दी है। इसका व्यावहारिक मतलब क्या है, इसे बारीकी से समझें :

आंतरिक पुनर्गठन (Internal Reconfiguration) : यदि आपने परिवार बढ़ने पर कमरे के अंदर की दीवार खिसकाई है या किचन/बाथरूम की जगह बदली है, तो अब घबराएं नहीं। बशर्ते वह दीवार Non-load bearing (जो बिल्डिंग का भार न उठा रही हो) होनी चाहिए।

बालकनी का कवच : मनीमाजरा या सेक्टर-29 के उन पुराने फ्लैट्स में जहां बारिश का पानी और धूल सीधे अंदर आती थी, अब बालकनी को ग्रिल या शीशे से ढंकना पूरी तरह वैध है।

पीछे का आंगन (Rear Courtyard) : ग्राउंड फ्लोर के आवंटियों ने जो पीछे के हिस्से को कवर किया है, उसे अब शर्तों के साथ नियमित कराया जा सकेगा। यह पहले 'अतिक्रमण' की श्रेणी में आता था।

छत की सुरक्षा : छत पर 1.5 मीटर तक की मुंडेर (Parapet Wall) को मंजूरी मिल गई है। सुरक्षा के लिहाज से इसे एक बड़ी राहत माना जा रहा है।

किसे मिलेगी कितनी राहत?

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट्स को चार श्रेणियों में बांटा गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए राहत का दायरा अलग है :

EWS और LIG फ्लैट्स (सेक्टर 29, 30, 41, 47, 56 आदि) 

राहत : कमरों के बीच की दीवार हटाकर जगह बड़ी करना या अतिरिक्त टॉयलेट बनाना अब वैध है।

प्रतिबंध : साझा गलियारे (Common Area) या सार्वजनिक सीढ़ियों पर कब्जा करना अभी भी वर्जित है।

MIG और HIG फ्लैट्स (सेक्टर 40, 44, 45, 46, 61 आदि)

राहत : बालकनी को कवर करना और किचन की जगह बदलना अब कानूनी है।

प्रतिबंध : मुख्य बीम या पिलर (कॉलम) को काटना या कमजोर करना सख्त मना है।

 रो-हाउस और मरला मकान (सेक्टर 43, 46, मनीमाजरा)

राहत : घर के पीछे के आंगन (Back Courtyard) को कवर करना अब शर्तों के साथ मान्य है।

प्रतिबंध : घर के सामने का डिजाइन (Front Facade) बदलना अभी भी मना है।

स्वतंत्र मकान (सेक्टर 38-वेस्ट, 43, मनीमाजरा)

राहत : पुराने छोटे-मोटे निर्माणों को पेनल्टी भरकर रेगुलर कराया जा सकेगा।

प्रतिबंध : छत के ऊपर पूरी तीसरी मंजिल बनाना अभी भी पूरी तरह अवैध है।

 कम्पाउंडिंग फीस का गणित : राहत की कीमत

प्रशासन ने इस नीति के पीछे 'यूजर पे' (User Pay) का सिद्धांत रखा है। यह राहत मुफ्त नहीं है, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित शुल्क देना होगा :

नाममात्र शुल्क : EWS फ्लैट्स के लिए फीस को न्यूनतम रखा गया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर बोझ न पड़े।

HIG के लिए प्रीमियम : बड़े फ्लैट्स में, जहां कवर एरिया ज्यादा बढ़ाया गया है, वहां फीस का स्लैब ऊपर है।

लोगों का दर्द : स्थानीय आवंटियों का कहना है कि यह 'राहत' नहीं, बल्कि 'वसूली' है। प्रशासन का तर्क है कि इस राजस्व से बोर्ड पुराने सेक्टरों के इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, सीवरेज) को अपग्रेड करेगा।

साझी दीवार और पड़ोसियों का विवाद : नया समाधान

नीड-बेस्ड बदलावों में सबसे ज्यादा झगड़ा पड़ोसियों के बीच 'कॉमन वॉल' और रोशनी को लेकर होता है। 2026 की संशोधित नीति में यह प्रावधान किया गया है कि यदि बदलाव बिल्डिंग कोड के भीतर है और पूरी संरचना की सुरक्षा को नुकसान नहीं पहुंचाता, तो पड़ोसी बेवजह अड़ंगा नहीं लगा पाएंगे। प्रशासन ने 'म्युचुअल कंसेंट' को प्राथमिकता दी है, लेकिन सुरक्षा मानकों को सर्वोपरि रखा है।

'जेई राज' से मुक्ति का डिजिटल रास्ता

आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन और 'सेल्फ-सर्टिफिकेशन' की तर्ज पर लाया गया है। उस 'इंस्पेक्टर राज' को खत्म करना है जहां जूनियर इंजीनियर (JE) नोटिस का डर दिखाकर परेशान करते थे। हालांकि, इसके लिए आपको CHB के 'इम्पैनल्ड आर्किटेक्ट्स' और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से 'सेफ्टी सर्टिफिकेट' लेना ही होगा। यह सुरक्षा के लिहाज से एक अनिवार्य कदम है।

 समय का तकाजा : क्या यह 'लास्ट चांस' है ?

प्रशासन ने संकेत दिया है कि आवंटियों को आवेदन के लिए 6 से 9 महीने की समय सीमा दी जाएगी। यदि इस अवधि के भीतर आवंटी कम्पाउंडिंग फीस जमा नहीं करते, तो उन्हें 'अवैध निर्माण' के पुराने भारी-भरकम जुर्माने फिर से देने पड़ सकते हैं। समय सीमा खत्म होने के बाद मकान खाली कराने (Resumption) के नोटिस दोबारा भेजे जा सकते हैं।

 कहां है नियमों की 'लाल रेखा'? (क्या अभी भी अवैध है?)

राहत मिली है, लेकिन कुछ सीमाओं को पार करना फिलहाल नाममुकिन है :

अतिरिक्त मंजिल (Third Floor) : जिन्होंने छत पर पूरा कमरा या तीसरी मंजिल बना ली है, उनके लिए कोई राहत नहीं है। FAR फ्रीज के कारण इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती।

फ्रंट फेस (Front Facade) : शहर की एकरूपता बनाए रखने के लिए घर के सामने के लुक में बदलाव को अभी भी सख्ती से रोका जाएगा।

सार्वजनिक भूमि : घर की सीमा के बाहर सरकारी जमीन या ग्रीन बेल्ट पर किया गया कब्जा कभी वैध नहीं होगा।

 केस स्टडीज : ज़मीनी हकीकत और राहत का प्रभाव

केस 1 : सेक्टर-41 के 'तंग आशियाने' और प्राइवेसी की जंग 

सेक्टर-41 के LIG फ्लैट्स में रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारी बताते हैं कि जब हम 30 साल पहले यहां आए थे, तो परिवार छोटा था। धीरे-धीरे बच्चे बड़े हुए, लेकिन घर तो उतना ही रहा। उन्होंने बच्चों के लिए बालकनी कवर की और एक छोटा अतिरिक्त टॉयलेट बनाया।

पुरानी स्थिति : पिछले 10 साल से उनके घर पर 'वायलेशन' का दाग था। न वह इसे बेच पा रहे थे, न बैंक से लोन ले पा रहे थे।

नई राहत का असर : अब नाममात्र फीस देकर इसे वैध करा सकेंगे।

 केस 2 : मनीमाजरा (MHC) : 'पड़ोसी विवाद' से 'म्युचुअल कंसेंट' तक

मनीमाजरा के डुप्लेक्स मकानों में साझी दीवार का विवाद सबसे बड़ा था।

नई पॉलिसी का समाधान : नई नीति में स्पष्ट है कि यदि पड़ोसी 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) दे देता है, तो प्रक्रिया सरल होगी। लेकिन अगर पड़ोसी रंजिश के कारण मना करता है और निर्माण सुरक्षित है, तो प्रशासन दखल देगा।

एक्सपर्ट कमेंट: क्या कहते हैं आर्किटेक्ट्स?

वरिष्ठ आर्किटेक्ट्स का मानना है कि 'सेल्फ-सर्टिफिकेशन' लोगों को भ्रष्टाचार से बचाएगा। हालांकि, वे आगाह करते हैं कि आवंटियों को केवल बोर्ड द्वारा अधिकृत इंजीनियरों से ही स्ट्रक्चरल सेफ्टी चेक करवानी चाहिए। चंडीगढ़ की इमारतें पुरानी हैं, इसलिए एक भी गलत 'बीम' काटना पूरी बिल्डिंग के लिए खतरनाक हो सकता है।

 आवेदन के लिए 'चेकलिस्ट' (तैयार रखें ये दस्तावेज)

As-built Plan : बोर्ड के पैनल में शामिल आर्किटेक्ट से वर्तमान स्थिति का नक्शा।

Structural Safety Certificate : रजिस्टर्ड इंजीनियर से सुरक्षा प्रमाण पत्र।

Allotment Letter : मकान के मूल आवंटन पत्र की कॉपी।

Mutual Consent : साझी दीवार के मामले में पड़ोसी की लिखित सहमति।

Processing Fee : ऑनलाइन पोर्टल पर जमा की जाने वाली फीस।

CHB राहत नीति 'एक नज़र में'

क्या बदला: आंतरिक दीवारें, बालकनी कवरिंग, आंगन की कवरिंग और छत पर मुंडेर वैध।

क्या नहीं बदला: मकान के सामने का डिजाइन और तीसरी मंजिल अभी भी अवैध।

बड़ा फायदा: घरों का 'म्यूटेशन' (नाम हस्तांतरण) आसान होगा और बैंक लोन मिलने की राह खुलेगी।

बड़ी शर्त: 'स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट' और 'इम्पैनल्ड आर्किटेक्ट' अनिवार्य।

आवेदन करने से पहले CHB की आधिकारिक वेबसाइट का अध्ययन जरूर करें।

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