Biodiversity Governance : आपके गांव में छिपी है प्रकृति की कौन-सी दौलत ? अब सरकार उसका हिसाब जुटाएगी
चंडीगढ़ में राष्ट्रीय बैठक में 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता समितियों को सक्रिय बनाने और स्थानीय ज्ञान को विकास योजनाओं से जोड़ने पर जोर
Biodiversity Governance : आपके गांव के तालाब में कौन-कौन सी मछलियां हैं? खेतों में कौन-सी पुरानी फसलें उगती हैं? आसपास कौन से खास पेड़-पौधे पाए जाते हैं? स्थानीय लोग पीढ़ियों से प्रकृति के किन संसाधनों का इस्तेमाल करते आए हैं? अब ऐसी जानकारियां सिर्फ बुजुर्गों की यादों तक सीमित नहीं रहेंगी। सरकार इन्हें दर्ज कर जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय विकास की योजनाओं का हिस्सा बनाना चाहती है।
इसी दिशा में चंडीगढ़ में रविवार को राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों की 16वीं राष्ट्रीय बैठक शुरू हुई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने देश में गठित 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों को सक्रिय और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) को केवल रिकॉर्ड तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय विकास की योजना बनाने में इस्तेमाल करने की बात कही।
आखिर गांव की जानकारी इतनी अहम क्यों ?
स्थानीय लोगों को अपने आसपास की प्रकृति की ऐसी जानकारियां होती हैं, जो किताबों में आसानी से नहीं मिलतीं। कौन-सा पौधा किस मौसम में मिलता है, कौन-सी फसल की स्थानीय किस्म पुरानी है या किस तालाब में कौन-सी प्रजातियां पाई जाती हैं। यह पारंपरिक ज्ञान जैव विविधता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने भी पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को आधुनिक संरक्षण के तरीकों के साथ जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने जैव विविधता प्रबंधन समितियों और पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर को मजबूत करने पर जोर दिया।
अब इस जानकारी का क्या होगा ?
सरकार चाहती है कि स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की जानकारी दर्ज करने के बाद उसका इस्तेमाल विकास योजनाएं बनाने में भी हो। किसी इलाके में मौजूद खास पेड़-पौधों, फसलों, जल स्रोतों या अन्य जैविक संसाधनों को ध्यान में रखकर स्थानीय स्तर पर योजनाएं बनाई जा सकती हैं।
भूपेंद्र यादव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 और जैव विविधता नियम, 2024 के अनुरूप अपने नियमों, संस्थागत व्यवस्था और कामकाज की प्रक्रिया को मजबूत करने को कहा।
2.76 लाख समितियों की भूमिका क्या होगी ?
देश में 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs) गठित हैं। अब जोर इन समितियों को सक्रिय और प्रभावी बनाने पर है। इनका काम स्थानीय स्तर पर जैव विविधता से जुड़ी जानकारी जुटाने, उसके संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करना है।
इसके साथ Access and Benefit Sharing (ABS) व्यवस्था के तहत जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान से होने वाले लाभ में स्थानीय समुदायों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की ABS राशि किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, राज्य जैव विविधता बोर्डों, केंद्रशासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों और शोध संस्थानों के साथ साझा कर चुका है।
हरियाणा ने भी स्थानीय स्तर पर संरक्षण पर दिया जोर
हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने राज्य में जैव विविधता के संरक्षण और बहाली के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करने की जरूरत बताई।
राव नरबीर सिंह ने हरियाणा में जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इन समितियों और स्थानीय समुदायों के प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण को बढ़ाने पर जोर दिया।
PBR क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है ?
पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (PBR) को किसी इलाके की जैव विविधता का स्थानीय रिकॉर्ड समझा जा सकता है। इसमें वहां पाए जाने वाले पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं, फसलों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान की जानकारी दर्ज की जाती है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि PBR केवल एक दस्तावेज बनकर न रह जाए। इसे स्थानीय निकायों की योजना प्रक्रिया से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल सतत विकास के लिए किया जा सके।
भारत का 30-बाई-30 लक्ष्य क्या है ?
भारत की राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना (NBSAP) 2024-2030 को कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के अनुरूप तैयार किया गया है।
केंद्र का जोर पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण, कृषि जैव विविधता तथा जलवायु के अनुकूल क्षेत्रों के विकास पर है। भूपेंद्र यादव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से वैश्विक 30-बाई-30 संरक्षण लक्ष्य में योगदान देने का भी आह्वान किया।
अब आगे क्या ?
चंडीगढ़ में 6 और 7 सितंबर को होने वाली इस बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव, नवाचार और क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियां साझा करेंगे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण की व्यवस्था को राज्य से लेकर स्थानीय स्तर तक मजबूत करना है। अब असली चुनौती यह होगी कि 2.76 लाख से अधिक समितियां जमीन पर कितनी सक्रिय होती हैं और स्थानीय जैव विविधता की जानकारी विकास योजनाओं में किस तरह इस्तेमाल की जाती है।

