एक साधारण मौलवी कैसे बना ईरान का सबसे ताकतवर नेता ? जानें अयातुल्ला खामेनेई के 'अंत' की पूरी कहानी
अमेरिका-इजरायल के हवाई हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता; 36 साल तक किया राज, पश्चिमी देशों का किया कड़ा विरोध और मध्य पूर्व में बढ़ाया सैन्य दबदबा।
Iran Supreme Leader Khamenei : ईरान की सत्ता पर पिछले 36 सालों से राज करने वाले सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (86) का अंत हो गया है। शनिवार को ईरानी स्टेट मीडिया ने घोषणा की कि मध्य तेहरान स्थित उनके परिसर को नेस्तनाबूद करने वाले अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में उनकी मौत हो गई। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दशकों से चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के विफल होने के बाद यह चरम कदम उठाया गया। उनकी मौत उस युग की समाप्ति है, जिसने ईरान को एक कट्टर अमेरिका-विरोधी ताकत में बदल दिया और देश के भीतर उठने वाली हर विरोधी आवाज को लोहे के हाथों से कुचला। आइए, इस एक्सप्लेनर में उनके संपूर्ण सफर और नीतियों को विस्तार से समझते हैं :
कौन थे अयातुल्ला खामेनेई और सत्ता के शीर्ष तक कैसे पहुंचे ?
शुरुआती जीवन और जेल : अली खामेनेई का जन्म अप्रैल 1939 में पूर्वोत्तर ईरान के मशहद में हुआ था। 11 साल की उम्र में ही वे मौलवी बन गए थे। उनके पिता धर्म और राजनीति को अलग रखने के पक्षधर थे, लेकिन खामेनेई ने इसके विपरीत इस्लामी क्रांतिकारी विचारधारा को अपनाया। 1963 में 24 साल की उम्र में राजनीतिक गतिविधियों के कारण वे पहली बार जेल गए, जहां उन्हें कड़ी यातनाएं दी गईं।
सत्ता का सफर : 1979 की क्रांति के बाद वे रक्षा उपमंत्री बने और 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में अहम भूमिका निभाई। एक कुशल वक्ता होने के कारण उन्हें जुमे की नमाज का इमाम बनाया गया और बाद में वे देश के राष्ट्रपति (इस पद पर पहुंचने वाले पहले मौलवी) बने।
सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) : 1989 में इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद उन्हें सर्वोच्च नेता चुना गया। शुरुआत में उन्हें कमजोर माना जाता था, लेकिन 1981 के एक जानलेवा हमले (जिसमें उनका दाहिना हाथ लकवाग्रस्त हो गया था) के बाद वे बेहद सतर्क हो गए थे। जल्द ही उन्होंने सशस्त्र बलों, न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियों पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया और अपने करीबियों को शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कमांडर नियुक्त किया।
अमेरिका और इजरायल से दुश्मनी की जड़ें क्या थीं ?
खामेनेई ने अपने 36 साल के शासन में अमेरिका का कड़ा विरोध किया और अक्सर भाषणों में उसे 'ग्रेट सैटन' (बड़ा शैतान) कहकर उसकी निंदा की।
परमाणु विवाद और फतवा : खामेनेई ने 1990 के दशक में परमाणु हथियारों के खिलाफ फतवा जारी किया था। 2015 में राष्ट्रपति हसन रूहानी के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते का उन्होंने सावधानी से समर्थन किया। लेकिन 2018 में जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समझौते से पीछे हटे और कड़े प्रतिबंध लगाए, तो यह तल्खी और बढ़ गई। 2025 में ट्रंप के नए समझौते के दबाव को भी उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया।
इजरायल से सीधा युद्ध : कई सालों तक ईरान और इजरायल के बीच 'शैडो वॉर' (छिपा हुआ युद्ध) चला, जिसमें इजरायल ने ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों को मारा। अप्रैल 2024 में दमिश्क दूतावास पर हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं।
तनाव का चरम : जून 2025 में इजरायल की सेना ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों लड़ाकू विमानों से बड़े हमले किए, जिससे यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदल गया। अमेरिका भी 12 दिन चले इस हवाई हमले में शामिल हुआ। इसी कड़ी में शनिवार को हुए अब तक के सबसे बड़े हमले में खामेनेई मारे गए।
मध्य पूर्व में क्या था खामेनेई का 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' ?
खामेनेई ने मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल को चुनौती देने के लिए 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध की धुरी) का निर्माण किया था।
सहयोगियों को फंडिंग: उन्होंने इराक और लेबनान में शिया मिलिशिया, सीरिया में बशर अल-असद, हमास (फिलिस्तीन) और यमन के हूतियों को ताकतवर बनाने के लिए चार दशकों में अरबों डॉलर खर्च किए।
गठबंधन का पतन: 2024 में यह गठबंधन दरकने लगा। सीरिया में असद की सत्ता छिन गई और इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह तथा गाजा में हमास को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसमें उनके शीर्ष नेताओं का मारा जाना भी शामिल है।
ईरान के भीतर कैसा था खामेनेई का शासन?
देश के अंदर खामेनेई का शब्द ही कानून था।
उदारवादी आवाजों का दमन: उन्होंने स्वतंत्र सोच वाले राष्ट्रपतियों की महत्वाकांक्षाओं को कुचला और अपनी नीतियों से ईरान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया।
विरोध का क्रूर दमन: 1999, 2002 और 2009 में हुए प्रदर्शनों को उन्होंने सख्ती से दबाया। 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के उग्र प्रदर्शनों का खामेनेई ने क्रूरता से जवाब दिया और कई प्रदर्शनकारियों को सरेआम क्रेन से लटकाकर फांसी दे दी।
अरबों डॉलर का साम्राज्य : उन्होंने 'सेताद' (Setad) नामक संगठन के जरिए एक विशाल वित्तीय साम्राज्य पर नियंत्रण रखा, जिसकी संपत्ति अरबों डॉलर आंकी गई है।
सलमान रुश्दी पर फतवा : उन्होंने 1989 में खुमैनी द्वारा लेखक सलमान रुश्दी के खिलाफ जारी मौत के फतवे का समर्थन किया था। इसी के चलते 2022 में रुश्दी पर चाकू से जानलेवा हमला हुआ था (हमलावर को 2025 में 25 साल की सजा हुई)।
आगे क्या : ईरान और उसकी युवा पीढ़ी का भविष्य ?
खामेनेई के जाने के बाद ईरान एक गहरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ बाहरी देशों (अमेरिका-इजरायल) के हमले हैं, तो दूसरी तरफ घर के भीतर युवाओं का बढ़ता असंतोष है।
बदलती सोच : ईरान की आज की युवा पीढ़ी खामेनेई की 1979 वाली कट्टर नीतियों से पूरी तरह ऊब चुकी है।
शांति की चाह : 2026 की शुरुआत में आई रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 25 वर्षीय बेरोजगार ग्रेजुएट मीना जैसे युवाओं का स्पष्ट मानना है कि परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय हथियारबंद गुटों का समर्थन और अमेरिका से दुश्मनी की नीतियां 1979 में सही हो सकती थीं, लेकिन आज नहीं। वे अब एक शांतिपूर्ण और सामान्य जीवन चाहते हैं क्योंकि उनके मुताबिक, 'दुनिया अब बहुत बदल चुकी है।'

