Automotive Cyber Security : कार स्मार्ट हुई तो साइबर खतरा भी बढ़ा, जानिए कैसे हो रही 24 घंटे निगरानी
कनेक्टेड वाहनों पर बढ़ते साइबर हमलों के बीच क्यों जरूरी हो गया है VSOC, क्या हैं UN R155 और R156 और आम कार मालिक पर इसका क्या असर होगा ?
Automotive Cyber Security : कार अब केवल इंजन, ब्रेक और पहियों से चलने वाली मशीन नहीं रही। आधुनिक कारों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, जीपीएस, मोबाइल ऐप, ब्लूटूथ, टेलीमैटिक्स और ओवर-द-एयर (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाएं हैं। इससे वाहन सुविधाजनक और स्मार्ट हुए हैं, लेकिन इनके साथ साइबर सुरक्षा का जोखिम भी बढ़ा है।
अगर किसी कनेक्टेड वाहन के डिजिटल सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश हो, उसके डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाए या किसी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिये छेड़छाड़ की जाए तो इसका असर वाहन और उसकी सेवाओं पर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर में वाहन कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा से जुड़े नियम लगातार सख्त किए जा रहे हैं।
इसी बदलते माहौल में भारतीय ऑटोमोबाइल साइबर सुरक्षा कंपनी HackersEra ने अपने Vehicle Security Operations Centre (VSOC) की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, VSOC कनेक्टेड वाहनों के बेड़े की 24 घंटे निगरानी करता है। इसका उद्देश्य साइबर खतरों की पहचान करना और संभावित हमलों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करना है।
VSOC क्या है ?![]()
VSOC यानी Vehicle Security Operations Centre। इसे आसान भाषा में कनेक्टेड वाहनों के लिए साइबर सुरक्षा कंट्रोल रूम समझ सकते हैं। किसी वाहन कंपनी के पास हजारों या लाखों कनेक्टेड वाहन हो सकते हैं। इन वाहनों से जुड़े डिजिटल सिस्टम में लगातार गतिविधियां होती रहती हैं। VSOC इन गतिविधियों में संदिग्ध पैटर्न या संभावित साइबर खतरे की पहचान करने में मदद करता है।
कंपनी के अनुसार, VSOC में ये प्रमुख सुविधाएं हैं :-
- 24 घंटे, 365 दिन निगरानी
- संदिग्ध गतिविधियों और साइबर खतरों की पहचान
- गंभीर खतरों को प्राथमिकता देना
- कुछ सामान्य घटनाओं के लिए स्वचालित प्रतिक्रिया
- महत्वपूर्ण कार्रवाई में मानवीय मंजूरी
- सुरक्षा घटनाओं का रिकॉर्ड और रिपोर्ट तैयार करना
इसे एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी वाहन कंपनी के 50 हजार कनेक्टेड वाहन सड़क पर चल रहे हैं। इनमें से किसी वाहन के डिजिटल सिस्टम में अचानक असामान्य गतिविधि दिखाई देती है।
VSOC ऐसी गतिविधि को पहचानकर सुरक्षा टीम को अलर्ट कर सकता है। इसके बाद खतरे का आकलन किया जाता है और तय प्रक्रिया के अनुसार प्रतिक्रिया दी जाती है।
यानी इसका उद्देश्य केवल हमला होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि हमले के शुरुआती संकेतों को जल्द पहचानना भी है।
कारों में साइबर खतरा कैसे पैदा होता है ?
आज की कार में कई डिजिटल कनेक्शन होते हैं। मोबाइल ऐप, इंटरनेट, क्लाउड सेवाएं, जीपीएस, ब्लूटूथ, टेलीमैटिक्स और सॉफ्टवेयर अपडेट इनमें शामिल हैं।
इसे इस तरह समझ सकते हैं : -
मोबाइल ऐप → इंटरनेट → क्लाउड सिस्टम → वाहन
इनमें से किसी डिजिटल कड़ी में सुरक्षा की कमजोरी होने पर साइबर जोखिम पैदा हो सकता है। इसलिए अब वाहन की सुरक्षा केवल कार के अंदर लगे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक सीमित नहीं है। सॉफ्टवेयर, क्लाउड सेवाएं, सप्लायर और अपडेट की पूरी प्रक्रिया भी इसका हिस्सा है।
UN R155 क्या है ?
UN Regulation No. 155 यानी R155 वाहन साइबर सुरक्षा से जुड़ा नियम है। सरल भाषा में इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन निर्माता साइबर खतरों की पहचान और प्रबंधन के लिए व्यवस्थित व्यवस्था बनाए रखें।
इसमें साइबर जोखिमों की पहचान, उनका आकलन, सुरक्षा उपाय, परीक्षण और किसी हमले की स्थिति में प्रतिक्रिया जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साइबर सुरक्षा को केवल वाहन तैयार होने के समय की जांच नहीं माना जाता। वाहन के सड़क पर आने के बाद भी संभावित साइबर खतरों पर नजर रखना जरूरी है।
आसान भाषा में समझें
पहले सुरक्षा की सोच कुछ ऐसी थी—
वाहन बनाओ → जांच करो → बाजार में उतारो।
कनेक्टेड वाहनों के दौर में प्रक्रिया बदल गई है :
वाहन बनाओ → साइबर जोखिम पहचानो → सुरक्षा जांच करो → बाजार में उतारो → लगातार निगरानी करो → नया खतरा मिले तो प्रतिक्रिया दो।
यही वजह है कि वाहन कंपनियों के लिए सड़क पर चल रहे वाहनों की साइबर सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो गई है।
UN R156 क्या है ?
UN Regulation No. 156 वाहन के सॉफ्टवेयर अपडेट से जुड़ा नियम है। आज कई कारों में इंटरनेट के जरिये सॉफ्टवेयर अपडेट भेजे जा सकते हैं। इसे OTA यानी Over-The-Air Update कहा जाता है।
लेकिन सवाल यह है कि कोई सॉफ्टवेयर अपडेट सुरक्षित है या नहीं? क्या वह सही वाहन में जा रहा है? क्या अपडेट के बाद वाहन की सुरक्षा या कार्यप्रणाली पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ेगा?
R156 के तहत सॉफ्टवेयर अपडेट की प्रक्रिया को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने पर जोर दिया जाता है। इसमें अपडेट की पहचान, उसकी सुरक्षा और वाहन के साथ उसकी संगतता जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं।
याद रखने का आसान तरीका :
- R155 = वाहन की साइबर सुरक्षा
- R156 = वाहन के सॉफ्टवेयर अपडेट की सुरक्षा और प्रबंधन
चीन में भी सख्त हुए नियम
चीन ने वाहन साइबर सुरक्षा से संबंधित GB 44495-2024 मानक जारी किया है। चीन के आधिकारिक मानक पोर्टल के अनुसार यह मानक 1 जनवरी, 2026 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य वाहनों की साइबर सुरक्षा के लिए तकनीकी आवश्यकताएं तय करना है।
इससे पता चलता है कि वाहन साइबर सुरक्षा अब केवल किसी एक देश की चिंता नहीं है। दुनिया के बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में इस क्षेत्र में नियामकीय व्यवस्था मजबूत की जा रही है।
भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है ?
भारत में भी कनेक्टेड और सॉफ्टवेयर आधारित वाहनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। HackersEra ने अपने बयान में दावा किया है कि भारत में 2028 तक एक करोड़ से अधिक कनेक्टेड वाहन हो सकते हैं। कनेक्टेड वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ उनके डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी।
कंपनी ने भारत के AIS 189 और AIS 190 ढांचे का भी उल्लेख किया है और दावा किया है कि इनके 2027 तक अनिवार्य होने की उम्मीद है। इस संबंध में अंतिम नियामकीय स्थिति को संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
वाहन कंपनियों के लिए VSOC क्यों जरूरी हो सकता है ?
किसी बड़ी वाहन कंपनी के हजारों या लाखों वाहन सड़क पर हो सकते हैं। हर वाहन में अलग-अलग सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कनेक्टिविटी सुविधाएं होती हैं। ऐसे में कंपनी के लिए यह जानना जरूरी है कि कहीं उसके वाहनों या डिजिटल नेटवर्क में असामान्य गतिविधि तो नहीं हो रही। यहीं VSOC की भूमिका सामने आती है।
VSOC के चार प्रमुख काम
- 1. लगातार निगरानी
वाहनों और उनसे जुड़े डिजिटल सिस्टम में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना।
- 2. खतरे की पहचान
सामान्य गतिविधि और संदिग्ध गतिविधि के बीच अंतर करने में मदद करना।
- 3. प्रतिक्रिया
गंभीर साइबर घटना सामने आने पर तय सुरक्षा प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई में मदद करना।
- 4. रिपोर्टिंग
साइबर घटना से संबंधित रिकॉर्ड और रिपोर्ट तैयार करना, ताकि कंपनी अपनी सुरक्षा और अनुपालन व्यवस्था को बेहतर कर सके।
क्या हर साइबर अलर्ट खतरनाक होता है ?
नहीं।
किसी बड़े वाहन बेड़े में हजारों डिजिटल गतिविधियां सामान्य रूप से होती रहती हैं। अगर हर असामान्य गतिविधि को साइबर हमला मान लिया जाए तो सुरक्षा टीम के सामने बहुत ज्यादा अलर्ट आ सकते हैं।
इसलिए VSOC का एक महत्वपूर्ण काम यह समझना है कि कौन-सी गतिविधि सामान्य है और कौन-सी संभावित सुरक्षा समस्या हो सकती है।
HackersEra का दावा है कि उसका VSOC खास तौर पर ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह सामान्य वाहन गतिविधियों और संभावित साइबर हमलों के बीच अंतर करने तथा महत्वपूर्ण खतरों को प्राथमिकता देने में मदद करता है।
क्या VSOC खुद वाहन को नियंत्रित करता है ?
यह समझना जरूरी है कि VSOC मुख्य रूप से साइबर सुरक्षा की निगरानी और प्रतिक्रिया व्यवस्था है। HackersEra के अनुसार, कुछ सामान्य साइबर घटनाओं के लिए स्वचालित प्रतिक्रिया की व्यवस्था है। लेकिन ऐसी कार्रवाई जो वाहन की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, उसमें मानवीय मंजूरी जरूरी रखी गई है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वाहन से जुड़े किसी सुरक्षा-संवेदनशील सिस्टम में गलत कार्रवाई खुद जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए ऑटोमोबाइल साइबर सुरक्षा में ऑटोमेशन के साथ मानव निगरानी और सुरक्षा मानक भी जरूरी हैं।
आम कार मालिक को इससे क्या फायदा होगा ?
अब सवाल यह है कि इसका असर आम कार मालिक पर क्या पड़ेगा?
अगर आपकी कार इंटरनेट या किसी डिजिटल सेवा से जुड़ी है तो उसके पीछे कई सिस्टम काम करते हैं। बेहतर साइबर सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य इन सिस्टम को सुरक्षित रखना है।
इससे कंपनी के स्तर पर संभावित रूप से :
- साइबर खतरों की जल्दी पहचान हो सकती है।
- सॉफ्टवेयर अपडेट को सुरक्षित तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है।
- डिजिटल सिस्टम पर अनधिकृत गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है।
- साइबर घटनाओं पर प्रतिक्रिया का समय कम किया जा सकता है।
- वाहन और उससे जुड़ी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा मजबूत की जा सकती है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि VSOC होने से किसी वाहन पर साइबर हमला कभी नहीं होगा। इसका उद्देश्य खतरे को जल्दी पहचानना और उस पर प्रभावी प्रतिक्रिया देना है।
क्या यह सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों के लिए है ?
नहीं।
वाहन साइबर सुरक्षा केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं है। कनेक्टेड फीचर्स वाली पेट्रोल, डीजल, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के साथ कमर्शियल वाहन, ईवी चार्जिंग सिस्टम और अन्य कनेक्टेड मोबिलिटी सेवाएं भी साइबर सुरक्षा के दायरे में आ सकती हैं।
HackersEra ने भी अपनी VSOC सेवा को यात्री वाहनों, कमर्शियल वाहनों, इलेक्ट्रिक वाहनों और ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अपने साइबर सुरक्षा कारोबार का हिस्सा बताया है।
वाहन साइबर सुरक्षा में सबसे बड़ा बदलाव क्या है ?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि साइबर सुरक्षा अब वाहन की बिक्री से पहले की जांच तक सीमित नहीं रही। डिजिटल वाहन सड़क पर आने के बाद भी बदलता रहता है। उसमें नए सॉफ्टवेयर अपडेट आते हैं, नई डिजिटल सेवाएं जुड़ती हैं और समय के साथ नए साइबर खतरे सामने आ सकते हैं।
इसलिए सुरक्षा का मॉडल भी बदल रहा है :-
पहले : वाहन बनाओ → जांच करो → बेचो
अब : वाहन बनाओ → साइबर जोखिम पहचानो → जांच करो → बेचो → लगातार निगरानी करो → खतरा मिलने पर प्रतिक्रिया दो।
यही वजह है कि वाहन निर्माताओं के लिए साइबर सुरक्षा अब वाहन के पूरे जीवनचक्र का हिस्सा बनती जा रही है।
एक नजर में समझिए
| सवाल | आसान जवाब |
|---|---|
| VSOC क्या है? | वाहनों की साइबर सुरक्षा के लिए निगरानी और प्रतिक्रिया केंद्र |
| R155 क्या है? | वाहन साइबर सुरक्षा से संबंधित UN नियम |
| R156 क्या है? | वाहन सॉफ्टवेयर अपडेट के प्रबंधन से संबंधित UN नियम |
| OTA क्या है? | इंटरनेट के जरिये वाहन का सॉफ्टवेयर अपडेट करना |
| OEM कौन है? | वाहन बनाने वाली मूल कंपनी |
| VSOC क्या करता है? | साइबर खतरों की पहचान, निगरानी, प्रतिक्रिया और रिपोर्टिंग में मदद करता है |
| क्या इससे साइबर हमला पूरी तरह रुक जाएगा? | नहीं। इसका उद्देश्य खतरे की जल्दी पहचान और बेहतर प्रतिक्रिया है |
| क्या यह सिर्फ EV के लिए है? | नहीं। सभी तरह के कनेक्टेड वाहन इसके दायरे में आ सकते हैं |
कार की सुरक्षा अब ब्रेक और एयरबैग तक सीमित नहीं
कारों में जैसे-जैसे इंटरनेट और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनकी सुरक्षा का मतलब भी बदल रहा है। अब किसी वाहन की सुरक्षा में उसके डिजिटल सिस्टम को साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच से बचाना भी शामिल है।
UN R155 और R156 जैसे नियम इस बदलाव को औपचारिक रूप दे रहे हैं। वहीं VSOC जैसी व्यवस्था वाहन के सड़क पर आने के बाद भी उसकी डिजिटल सुरक्षा पर लगातार नजर रखने का रास्ता देती है।
HackersEra के अनुसार, उसका VSOC इसी उद्देश्य से बनाया गया है। आने वाले वर्षों में कनेक्टेड वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ वाहन कंपनियों के लिए एक सवाल और महत्वपूर्ण होता जाएगा— कार कितनी स्मार्ट है, यह जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी होगा कि वह साइबर हमले के खिलाफ कितनी सुरक्षित है। -एजेंसी इनपुट के साथ
नोट: VSOC की क्षमता, प्रदर्शन और बाजार में इस्तेमाल से जुड़े दावे HackersEra की ओर से जारी जानकारी पर आधारित हैं।

