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Air India Crash: पायलट्स संगठन ने Boeing 787 की सिस्टम फेलियर पर उठाए सवाल, इलेक्ट्रिकल हिस्ट्री की जांच की मांग

FIP ने संभावित अंतर की जांच के लिए सिम्युलेटर वैलिडेशन और इंजीनियरिंग एनालिसिस कराने की मांग की

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अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया के विमान हादसे की जांच को लेकर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) से कई अहम तकनीकी पहलुओं की गहन जांच करने की मांग की है। FIP ने खास तौर पर हादसे में शामिल Boeing 787 विमान VT-ANB के पूरे इलेक्ट्रिकल, तकनीकी और मेंटेनेंस इतिहास की समीक्षा करने को कहा है।

FIP के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने 18 सितंबर को AAIB को भेजे विस्तृत पत्र में अमेरिका के फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) की ओर से उपलब्ध कराई गई तकनीकी जानकारी की समीक्षा करने को कहा है। FIP के मुताबिक, FAS द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में हादसे में शामिल विमान से जुड़ी इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और फ्लाइट-कंप्यूटर सिस्टम की बार-बार सामने आई गड़बड़ियों का जिक्र है। इनमें मेंटेनेंस से जुड़े काम और पहले सामने आए खराबी के संकेत भी शामिल हैं। AAIB ने भी पुष्टि की है कि उसकी जांच टीम ने इस साल 10 जून को UK AAIB के एक विशेषज्ञ के माध्यम से FAS से मिली तकनीकी जानकारी की समीक्षा की थी।

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RAT खुलने के समय को लेकर भी सवाल

FIP ने Boeing 787 की सिम्युलेटर टेस्टिंग और शुरुआती क्रैश रिपोर्ट में दर्ज घटनाओं की टाइमलाइन के बीच संभावित अंतर की भी जांच करने को कहा है। पायलट्स संगठन ने खास तौर पर रैम एयर टरबाइन (RAT) के सक्रिय होने के समय को महत्वपूर्ण बताया है। FIP के अनुसार, पहले AAIB को सौंपी गई सिम्युलेटर टेस्टिंग के अवलोकनों से फ्यूल सप्लाई रुकने और RAT को हाइड्रोलिक पावर मिलने के बीच के समय को लेकर शुरुआती रिपोर्ट की टाइमलाइन से अंतर का संकेत मिलता है। FIP ने कहा कि अगर रिकॉर्ड किए गए RAT पावर-जनरेशन टाइमस्टैम्प और सिम्युलेटर के नतीजे विमान के वास्तविक व्यवहार को सही तरीके से दर्शाते हैं, तो इस पहलू की दोबारा तकनीकी जांच जरूरी है। हालांकि, कैप्टन रंधावा ने स्पष्ट किया कि संगठन किसी पूर्व निर्धारित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहा है।

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FDR और कॉकपिट रिकॉर्ड से मिलान की मांग

FIP ने संभावित अंतर की जांच के लिए सिम्युलेटर वैलिडेशन और इंजीनियरिंग एनालिसिस कराने की मांग की है। इसके साथ ही इन नतीजों का मिलान फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR), कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) और एन्हांस्ड एयरबोर्न फ्लाइट रिकॉर्डर से मिले डेटा के साथ करने को कहा गया है। संगठन का कहना है कि किसी भी तकनीकी संभावना को रिकॉर्ड किए गए वास्तविक डेटा और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर ही परखा जाना चाहिए।

पूरे इलेक्ट्रिकल सिस्टम की जांच की मांग

FIP ने Boeing 787 के अत्यधिक इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर की व्यापक जांच की मांग की है। इसमें पावर जेनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन, मेन और स्टैंडबाय बैटरी, इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर एवियोनिक्स, फ्लाइट-कंट्रोल कंप्यूटर, डेटा नेटवर्क, लोड-मैनेजमेंट यूनिट, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल हैं। पायलट्स संगठन ने जांचकर्ताओं से पावर इंटरप्शन, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, डेटा की विश्वसनीयता में गड़बड़ी, सॉफ्टवेयर रीसेट, प्रोसेसर रीबूट, कम्युनिकेशन फेलियर, गलत फॉल्ट मैसेज और सिस्टम के अन्य असामान्य व्यवहार की जांच करने को कहा है।

पुराने मेंटेनेंस रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में

FIP ने हादसे में शामिल विमान VT-ANB के पुराने मेंटेनेंस और रिलायबिलिटी डेटा की समीक्षा की मांग भी की है। इसमें तकनीकी और मेंटेनेंस लॉगबुक, टाले गए डिफेक्ट, Minimum Equipment List (MEL) से जुड़े आइटम, बार-बार आने वाली खराबियां, ट्रबलशूटिंग रिकॉर्ड, कंपोनेंट बदलने और इंजीनियरिंग सुधारात्मक कार्रवाइयों की जांच शामिल है।

संगठन ने इन रिकॉर्ड्स का मिलान ACARS, एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग डेटा, सेंट्रल मेंटेनेंस कंप्यूटिंग फंक्शन रिकॉर्ड, बिल्ट-इन टेस्ट इक्विपमेंट रिपोर्ट, मैन्युफैक्चरर सर्विस हिस्ट्री और फ्लाइट रिकॉर्डर डेटा से करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि अलग-अलग दिखाई देने वाली खराबियों के पीछे कोई दोहराता हुआ पैटर्न तो नहीं था।

तकनीकी खामी मिले तो फाइनल रिपोर्ट का इंतजार न हो

FIP ने कहा है कि अगर जांच के दौरान सिस्टम से जुड़ी तकनीकी खामी, मेंटेनेंस संबंधी चिंता, ऑपरेशनल खतरा, डिजाइन समस्या, ह्यूमन-मशीन इंटरफेस की दिक्कत या निगरानी में कमी सामने आती है, तो अंतरिम सुरक्षा सिफारिशें जारी करने के लिए फाइनल रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने AAIB से बाहरी विशेषज्ञों, सुरक्षा संगठनों, विमान निर्माता, ऑपरेटर और अन्य जांच एजेंसियों से मिली तकनीकी जानकारियों का भी मूल्यांकन करने को कहा है।

FIP के मुताबिक, भरोसेमंद सबूतों को तकनीकी विश्लेषण के जरिए सत्यापित या खारिज किया जाना चाहिए। FIP ने जांच को विस्तृत, स्वतंत्र, वैज्ञानिक रूप से सटीक और धारणाओं से मुक्त रखने की मांग की है। संगठन ने जनता का भरोसा बनाए रखने और अटकलों को रोकने के लिए नियमित एवं तथ्यात्मक अपडेट जारी करने पर भी जोर दिया है।

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