Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

AI Smart Glasses : रेलवे के दृष्टिबाधित कर्मियों का सहारा बनेगा AI चश्मा, बताएगा आसपास का माहौल और पढ़कर सुनाएगा लिखी जानकारी

उत्तर रेलवे ने 123 कर्मचारियों को दिए ज्योति AI स्मार्ट ग्लासेज; जानिए कैसे काम करती है यह तकनीक और कार्यस्थल पर किस तरह मिलेगी मदद

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

AI Smart Glasses : किसी कागज पर क्या लिखा है, सामने कौन सी वस्तु रखी है या आसपास का माहौल कैसा है, दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए इन बातों को जानना आसान नहीं होता। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी दृश्य जानकारी को समझने में मदद कर सकता है। उत्तर रेलवे ने इसी तकनीक का सहारा लेते हुए 123 दृष्टिबाधित कर्मचारियों को ज्योति AI स्मार्ट ग्लासेज दिए हैं। ये चश्मे कैमरे के जरिए सामने की जानकारी कैप्चर कर AI की मदद से उसे समझने और ऑडियो के जरिए कर्मचारी तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

कैसे काम करेगा AI चश्मा ?

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए किसी दृष्टिबाधित कर्मचारी के सामने एक कागज रखा है। वह उस पर लिखा हुआ नहीं देख सकता। स्मार्ट चश्मे में मौजूद कैमरा सामने की जानकारी को कैप्चर करेगा। इसके बाद AI उस दृश्य को समझने और उसमें मौजूद जानकारी की पहचान करने में मदद करेगा।

Advertisement

अगर कागज पर टेक्स्ट है तो ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक लिखे हुए शब्दों को पहचान सकती है। इसके बाद टेक्स्ट को ऑडियो के रूप में सुनाया जा सकता है। यानी कर्मचारी कागज को देखकर नहीं, बल्कि उसे सुनकर समझ सकेगा।

Advertisement

इसी तरह सामने कोई वस्तु, रंग, चेहरा या करेंसी हो तो AI आधारित सिस्टम उसकी पहचान में सहायता कर सकता है। इस तरह चश्मा दृश्य जानकारी को ऐसी सूचना में बदलने का काम करता है, जिसे दृष्टिबाधित व्यक्ति सुनकर समझ सके।

कैमरे से आवाज तक कैसे पहुंचेगी जानकारी ?

इस पूरी प्रक्रिया को तीन चरणों में समझा जा सकता है।

कैमरा → AI से पहचान → ऑडियो में जानकारी

पहले कैमरा सामने का दृश्य कैप्चर करेगा। फिर AI उस दृश्य में मौजूद जानकारी को पहचानने और समझने की कोशिश करेगा। इसके बाद जरूरी जानकारी आवाज के रूप में उपयोगकर्ता तक पहुंचाई जा सकती है। यानी चश्मे का उद्देश्य केवल सामने की तस्वीर लेना नहीं, बल्कि उस तस्वीर में मौजूद उपयोगी जानकारी को दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए समझने योग्य बनाना है।

क्या क्या पहचान सकता है चश्मा ?

उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार ज्योति AI में दृष्टिबाधित लोगों के लिए कई सहायक सुविधाएं हैं। इनमें टेक्स्ट पढ़ना, वस्तुओं की पहचान, चेहरों की पहचान, रंग पहचानना और भारतीय करेंसी की पहचान शामिल हैं।

इसका मतलब है कि किसी दस्तावेज या नोटिस को समझने से लेकर सामने रखी वस्तु या किसी रंग की पहचान करने तक में यह तकनीक सहायता दे सकती है।

कुछ परिस्थितियों में हस्तलिखित टेक्स्ट को पढ़ने में भी मदद मिल सकती है। इससे लिखित जानकारी समझने के लिए दूसरे व्यक्ति की मदद लेने की जरूरत कम हो सकती है।

रेलवे के कर्मचारियों के लिए क्यों उपयोगी ?

रेलवे जैसे बड़े संगठन में कर्मचारियों को अलग अलग तरह के दस्तावेजों और लिखित सूचनाओं से काम पड़ता है। ऐसे में AI चश्मा कई छोटे लेकिन जरूरी कामों में सहायक हो सकता है।

उदाहरण के लिए किसी लिखित सामग्री को पढ़ना हो, किसी वस्तु की पहचान करनी हो या आसपास की दृश्य जानकारी समझनी हो, तो स्मार्ट चश्मा सहायता दे सकता है। इससे हर छोटे काम के लिए किसी सहकर्मी या दूसरे व्यक्ति पर निर्भरता कम हो सकती है।

उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडेय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस ये चश्मे दृष्टिबाधित रेलकर्मियों को कार्यस्थल के साथ साथ दैनिक जीवन में भी अधिक आसानी और आत्मविश्वास के साथ काम करने में मदद करेंगे।

आसपास के माहौल की जानकारी कैसे मिलेगी ?

दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए केवल लिखित जानकारी पढ़ना ही चुनौती नहीं है। आसपास मौजूद वस्तुओं को पहचानना और अपने वातावरण को समझना भी महत्वपूर्ण है।

AI आधारित विजन सिस्टम कैमरे से मिली जानकारी का विश्लेषण कर सामने मौजूद वस्तुओं और अन्य दृश्य संकेतों की पहचान में सहायता कर सकता है। इसका इस्तेमाल करते समय उपयोगकर्ता को ऑडियो के जरिए जानकारी मिल सकती है।

इस तरह कर्मचारी को यह समझने में मदद मिल सकती है कि उसके सामने क्या मौजूद है और उसे किस तरह की दृश्य जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।

क्या इंटरनेट के बिना भी काम कर सकता है?

ज्योति AI की उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में ऑफलाइन AI क्षमताओं का भी उल्लेख है। Zero Project के अनुसार Jyoti AI Pro में ऑफलाइन टेक्स्ट रीडिंग और वस्तु, रंग तथा करेंसी पहचान जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

ऑफलाइन क्षमता का फायदा यह है कि कुछ सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए हर समय इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भरता जरूरी नहीं रहती। हालांकि अलग अलग मॉडल और सुविधाओं की कार्यप्रणाली अलग हो सकती है।

123 कर्मचारियों को कहां कहां मिले चश्मे ?

उत्तर रेलवे ने विभिन्न इकाइयों में काम करने वाले 123 दृष्टिबाधित कर्मचारियों को स्मार्ट ग्लासेज दिए हैं।

इकाईकर्मचारियों की संख्या
मुख्यालय17
दिल्ली मंडल28
लखनऊ मंडल13
अम्बाला मंडल10
मुरादाबाद मंडल19
फिरोजपुर मंडल5
आलमबाग वर्कशॉप19
जगाधरी वर्कशॉप3
चारबाग वर्कशॉप9
कुल123

पहले चरण में उत्तर रेलवे मुख्यालय के 16 दृष्टिबाधित कर्मचारियों को स्मार्ट ग्लासेज दिए गए।

सिर्फ चश्मा नहीं, आत्मनिर्भरता का साधन

इस पहल का महत्व केवल एक नया उपकरण मिलने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दृष्टिबाधित कर्मचारियों को अपने काम और दैनिक गतिविधियों में अधिक स्वतंत्र बनाने में मदद करना है।

किसी दस्तावेज को पढ़ने, वस्तु की पहचान करने या आसपास की जानकारी हासिल करने के लिए बार बार किसी दूसरे व्यक्ति की मदद लेना कर्मचारी के लिए असुविधाजनक हो सकता है। AI आधारित सहायक तकनीक ऐसे कई कामों में मदद देकर इस निर्भरता को कम कर सकती है।

दिव्यांगजन अधिकार कानून से जुड़ी पहल

उत्तर रेलवे के अनुसार स्मार्ट ग्लासेज का वितरण दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप किया गया है। रेलवे ने इसे दिव्यांग कर्मचारियों को जरूरी तकनीकी साधन उपलब्ध कराने और समावेशी कार्यस्थल बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

राष्ट्रीय रेल संग्रहालय, चाणक्यपुरी में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पांडेय ने स्मार्ट ग्लासेज वितरित किए। कार्यक्रम में अपर महाप्रबंधक हर्ष खरे, प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी सुजीत कुमार मिश्रा, विभिन्न विभागों के प्रमुख तथा मान्यता प्राप्त यूनियनों और एसोसिएशनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। स्मार्ट ग्लासेज प्राप्त करने वाले दृष्टिबाधित कर्मचारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और तकनीक को काम में उपयोगी बताया।

Advertisement
×