2030 Aravalli Roadmap: अरावली संरक्षण, हरियाली और रोजगार का ट्रिपल मॉडल
2030 Aravalli Roadmap: अरावली को बचाने की बड़ी रणनीति, ग्रीन वॉल बनेगी हरियाणा की ‘हरी ढाल’
2030 Aravalli Roadmap: हरियाणा सरकार ने अरावली पर्वत शृंखला के संरक्षण को लेकर 2030 तक की ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर ली है। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने साफ किया कि हरियाणा अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के जरिए मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है।
सरकार का फोकस सिर्फ हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी संतुलन, जल सुरक्षा और स्थानीय आजीविका को भी मजबूती देना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली को लेकर दिखाई गई सख्ती और हालिया आदेशों के बाद वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
वन मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन ‘लाइफ’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन में बदल दिया है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ऑक्सी वन, प्राण वायु देवता योजना और वन मित्र योजना जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें आम लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि अरावली पर्वत शृंखला हरियाणा के लिए सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीकरण के खिलाफ प्राकृतिक ढाल है। यह भूजल पुनर्भरण, वायु गुणवत्ता सुधार और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव कम करने में अहम भूमिका निभाती है। जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ यह शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में आजीविका का भी आधार है।
दक्षिण हरियाणा पर खास फोकस
सरकार दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, नारनौल, चरखी दादरी, बाढड़ा, लोहारू और केरू क्षेत्रों में स्थानीय प्रजातियों - जाटी और रोहिड़ा के संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए किसानों को प्राण वायु देवता योजना की तर्ज पर वार्षिक मानदेय देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे एक ओर हरियाली सुरक्षित रहेगी, तो दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में संरक्षण आधारित आय के नए अवसर पैदा होंगे।
राज्यों के साथ समन्वय भी होगा
वन मंत्री ने बताया कि अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के तहत राजस्थान, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। उन्होंने गुरुग्राम अरावली जैव विविधता पार्क का उदाहरण देते हुए कहा कि यह पारिस्थितिकी बहाली का सफल मॉडल है, जिसे भारत का पहला ओईसीएम घोषित किया गया है।
वन मित्र, ऑक्सी वन और वृक्ष पेंशन
राज्य भर में ग्राम स्तर पर वन मित्रों की नियुक्ति से युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। वहीं, प्राण वायु देवता योजना के तहत 75 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ों को 2500 वार्षिक पेंशन दी जा रही है। शहरी इलाकों में ऑक्सी वन स्थापित कर वायु शुद्धता बढ़ाने और मरुस्थलीकरण रोकने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित करने की तैयारी
वन मंत्री ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अरावली को लेकर दी गई नई परिभाषा का हरियाणा स्वागत करता है। सरकार ने अरावली क्षेत्र के करीब 90 प्रतिशत हिस्से को संरक्षित रखने का प्रस्ताव तैयार किया है। लक्ष्य साफ है कि हरित रोजगार, जनभागीदारी और पर्यावरण अनुकूल संसाधन प्रबंधन के जरिए अरावली को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करना।

