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आप की खास जीत

ग्रामीण क्षेत्रों में सफलता से जगी उम्मीदें

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आम तौर पर आम आदमी पार्टी को शहरी जनाधार वाली पार्टी के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन हालिया ग्रामीण निकाय चुनावों में उसकी जीत ने राजनीतिक विश्लेषकों को खूब चौंकाया है। पंजाब के जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के परिणामों ने राजनीतिक वर्चस्व और उभरते मतभेदों की कहानी भी बयां की है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी यानी आप ने ग्रामीण निकाय चुनावों में शानदार सफलता को दर्ज करते हुए राज्यभर में बड़ी संख्या में सीटें जीती हैं। जिसने इस बात की पुष्टि की है कि आम आदमी पार्टी पंजाब के शहरों में ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी लोकप्रियता का आधार रखती है। वहीं दूसरे शब्दों में कहें तो ग्रामीण मतदाताओं में पंजाब की सत्ता में लंबे समय तक भागीदारी निभाने वाले राजनीतिक दलों से मोहभंग का सिलसिला लगातार बना हुआ है। हालांकि, आप की इस सफलता के साथ कुछ ऐसे पहलू भी जुड़े हैं, जिन पर पार्टी और उसके नेताओं को गहन विचार करने की जरूरत होगी। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी का मजबूत प्रदर्शन उसके शासन के मॉडल के लिये निरंतर समर्थन का संकेत दे रहा है। यह एक ऐसा परिणाम है जो साल 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में आप के पक्ष में सकारात्मक परिदृश्य बना सकता है। इसके विपरीत विरोधाभास यह भी है कि कई जगह ऐसे उल्लेखनीय उदाहरण सामने आए हैं, जहां आम आदमी पार्टी अपने नेताओं के गढ़ों में लड़खड़ा गई है। आप के कई प्रमुख नेता अपने ही गांवों में जीत हासिल करने में विफल रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ, आप को इस पर मंथन करने की जरूरत है। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने बठिंडा और मुक्तसर जैसे कुछ इलाकों में अपनी मजबूत पकड़ दर्शायी है। जो पार्टी के लिये हौसला बढ़ाने वाले संकेत कहे जा सकते हैं।

दरअसल, शिअद के प्रदर्शन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी यदि इस बढ़त को आगे भी कायम रख पाती है तो उसके संगठनात्मक पुनरुद्धार के लिये दीर्घकालिक परिणाम सामने आ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस का चुनावी प्रदर्शन निराशाजनक ही कहा जाएगा। दरअसल, अब भी कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन को फिर से हासिल करने लिये संघर्ष करती प्रतीत हुई है। ये कांग्रेस के लिये चिंता की ही बात हो सकती है कि वह अपने पारंपरिक गढ़ों तक में अब भी कोई ठोस व दमदार चुनौती पेश करने में असफल ही रही है। वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पैठ बनानी आरंभ की है। हालांकि, उसकी यह बढ़त सिर्फ मामूली ही कही जाएगी। बहरहाल, कह सकते हैं कि चुनाव परिणामों से उपजी तसवीर पंजाब में बदलते राजनीतिक परिदृश्य की ओर ही इशारा करती नजर आती है। वैसे एक हकीकत यह भी है कि किसी भी चुनाव के परिणाम चुनावी परिदृश्य का आंशिक दृष्टिकोण ही परिभाषित करते हैं। मतदाता जमीनी स्तर पर आम आदमी पार्टी की नीतियों से काफी हद तक संतुष्ट ही दिखे हैं। इसके बावजूद स्थानीय निष्ठाएं और उम्मीदवार विशिष्ट कारक प्रमुखता से सामने आते हैं। इन स्थानीय ग्रामीण इकाइयों के चुनावों में आम आदमी पार्टी के नेताओं के गृह क्षेत्रों में मिली हार इस बात की भी याद दिलाती है कि किसी दल के लिये राजनीतिक पूंजी बेहद नाजुक ही होती है। यह भी कि ग्रामीण मतदाता स्थानीय नेतृत्व के प्रति उतने ही सजग और संवेदनशील होते हैं, जितना कि राज्य स्तरीय विचारों के प्रति। आगे चलकर, अगर आप को पंजाब में अपने जनादेश को बनाये रखना है और साथ ही उसका विस्तार करना चाहती है, तो उसे जमीनी स्तर पर नेतृत्व को मजबूत प्राथमिकता के आधार पर तैयार करना होगा। साथ ही उसे ग्रामीण मतदाताओं की विभिन्न चिंताओं का समाधान भी प्राथमिकता के आधार पर करना होगा। अब ये आने वाला समय बताएगा कि आप ने इन चुनाव परिणामों के निहितार्थों का किस सीमा तक चिंतन-मनन किया है। यदि पार्टी इन चुनाव परिणामों से सबक लेकर अपनी रीतियों-नीतियों में बदलाव लाती है तो साल 2027 के विधानसभा चुनावों में उसका जनाधार मजबूत हो सकता है।

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