चिंता और उम्मीद

सुरक्षा डोज से लड़ाई में मदद

चिंता और उम्मीद

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में रोज संक्रमितों का आंकड़ा पौने दो लाख तक पहुंचना हम सब की चिंता का विषय है। सोमवार को देश में डॉक्टरों, चिकित्सा कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों व साठ साल से अधिक के विभिन्न रोगों से जूझते लोगों को सुरक्षा डोज देने के अभियान की शुरुआत हुई जो निश्चय ही कोरोना की नई लहर से जूझने में हमारी ताकत को बढ़ाएगा। बहरहाल, तेजी से बढ़ते संक्रमण की चिंता को देखते हुए रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्चुअल बैठक के जरिये किशोरों के टीकाकरण को तेज करने तथा नये वेरिएंट के जीनोम सिक्वेंसिंग को विस्तार देने की बात कही। साथ ही कोविड संकट के प्रबंधन के साथ सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं को भी जारी रखने की बात कही। हालांकि, विभिन्न राज्य सरकारों ने संक्रमण को देखते हुए अपने स्तर पर बचाव के उपाय व पाबंदियां लगायी हैं, लेकिन फिलहाल सख्त लॉकडाउन की संभावना नजर नहीं आती। वजह साफ है कि पहली लहर में सख्त लॉकडाउन से संक्रमण तो रुका लेकिन आर्थिक व व्यापारिक गतिविधियों पर बुरा प्रभाव पड़ा। एक नयी तरह की मानवीय त्रासदी सामने आई। बहरहाल, नई लहर के चलते तमाम ऐसे लोग भी टीकाकरण के लिये सामने आ रहे हैं जिन्होंने पहली या दूसरी डोज लगवाने में कोताही बरती थी। इस मामले में किशोरों ने जिस उत्साह के साथ टीकाकरण में भाग लिया, वह पूरे देश के लिये प्रेरणादायक है। अब जरूरत इस बात की है कि पहली व दूसरी लहर की चूकों से सबक लिया जाये। यह चिंता की बात है कि हरियाणा व देश के अन्य भागों में बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों के बावजूद आक्सीजन प्लांट नहीं लगवाये। केंद्र व राज्यों को देखना होगा कि कोरोना संक्रमण से लड़ाई के उपाय महज कागजों तक ही सीमित न रह जायें। घोषणाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण योजनाओं का क्रियान्वयन होना चाहिए।

स्थानीय स्तर पर प्रशासन का दायित्व बनता है कि सरकारी व निजी अस्पतालों में जरूरी दवाओं, बेड व ऑक्सीजन आदि की प्रचुर व्यवस्था हो। व्यक्ति के रूप में जहां हमें संक्रमण की चेन को तोड़ने की जरूरत है, वहीं वंचित समाज की मदद को भी आगे आना चाहिए। आर्थिक विषमता की खाई के बीच इंसानियत के मूल्यों की रक्षा भी करनी है, जो संकट में मुनाफा तलाशते हैं, उन्हें बेनकाब करना है। निस्संदेह, संक्रमण की गति तेज है लेकिन मानवीय संकल्प के आगे हर चुनौती हारती है। इसी बीच आईआईटी कानपुर ने गणितीय गणनाओं के आकलन से संकेत दिया है कि कोविड-19 की तीसरी लहर का पीक इसी माह के अंत तक आ जायेगा। आकलन में कहा गया है कि देश में पीक पर चार से आठ लाख केस रोज आ सकते हैं, फिर इसमें तेजी से गिरावट आएगी। वहीं दिल्ली व मुंबई में रोज पचास से साठ हजार संक्रमण के मामले आ सकते हैं तथा सात दिन का औसत तीस हजार रहेगा। गणितीय आकलन के आधार पर दिल्ली-मुंबई में एक सप्ताह के बाद पीक के आकलन के प्रति आश्वस्त रिपोर्ट बताती है कि शेष देश के आंकड़ों के लिये अभी इंतजार करना होगा। तभी पूरे देश के पीक के बारे में सटीक निष्कर्ष दिया जा सकेगा। बहरहाल, तीसरी लहर में मरीजों के अस्पताल में कम संख्या में भर्ती होने व दूसरी लहर के मुकाबले मृत्युदर कम होने से उम्मीद जगी है कि देश इस चुनौती का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकेगा। देश अपनी बड़ी वयस्क आबादी का टीकाकरण कर चुका है। लेकिन इसके बावजूद इस लड़ाई में संसाधनों की व्यवस्था व नागरिकों की सजगता के स्तर पर कोई चूक नहीं होनी चाहिए। चिकित्सा वैज्ञानिक मान रहे हैं कि जिस तेजी से इस नये वायरस का संक्रमण बढ़ा है, उसी तेजी से इसमें गिरावट आएगी। दुनिया के दूसरे देशों में यही ट्रेंड देखने को मिला है। बहरहाल, हमें जान व जहान की हिफाजत का मंत्र याद रखना है। साथ ही इससे उपजी आर्थिक, सामाजिक व मानसिक समस्याओं के निराकरण की दिशा में भी हमें सोचना होगा।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

ज़रूर पढ़ें

अन्न जैसा मन

अन्न जैसा मन

कब से नहीं बदला घर का ले-आउट

कब से नहीं बदला घर का ले-आउट

एकदा

एकदा

बदलते वक्त के साथ तार्किक हो नजरिया

बदलते वक्त के साथ तार्किक हो नजरिया