होंगे कामयाब

सतर्क व्यवहार फिर भी जरूरी

होंगे कामयाब

विश्व बैंक प्रमुख द्वारा भारत के कोरोना संक्रमण के खिलाफ सफल टीकाकरण अभियान व आर्थिक स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयासों की सराहना उत्साहित करने वाली है। अच्छी खबर यह भी है कि हरियाणा में हुए तीसरे राउंड के सीरो सर्वे में 76.3 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी यानी कोरोना के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता पायी गई। यह सार्थक उपलब्धि कही जा सकती है कि हरियाणा स्वास्थ्य विभाग और पीजीआई रोहतक के सहयोग से किये गये सीरो सर्वे का दायरा पिछले दो सर्वे के मुकाबले काफी बड़ा था। एंटीबॉडी गांव के मुकाबले शहरों में अधिक पाया जाना सुखद है क्योंकि शहरों में जनसंख्या के सघन घनत्व को देखते हुए संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। दरअसल, पहले सीरो सर्वे में जहां 8 फीसदी तो दूसरे सर्वे में 14.8 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पायी गई थी। सर्वे का एक सकारात्मक पक्ष यह भी है कि टीकाकरण कराने वाले 81.6 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पायी गई जो संकेत भी है कि हमारा टीका प्रभावी है और सुरक्षाचक्र उपलब्ध कराता है। दरअसल, कोविड-19 से संक्रमित हो चुके और टीकाकरण करा चुके लोगों में एंडीबॉडी विकसित होती है। देश में जनवरी में शुरू हुए टीकाकरण अभियान ने लंबा सफर तय किया है और यह एक अरब का आंकड़ा छूने की तैयारी में है। निस्संदेह, हमने यह स्थिति टीकों की उपलब्धता, कीमतों को तर्कसंगत बनाकर, खुराक के बीच पर्याप्त अंतर के निर्धारण की चुनौती से जूझते हुए हासिल की है। मकसद यही था कि समाज का हर वर्ग कोरोना संक्रमण के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राप्त कर ले और देश जीवन-जीविका की रक्षा के लक्ष्य को हासिल कर सके। देश में आर्थिक गतिविधियों को फिर से पटरी पर लाने में सफल टीकाकरण अभियान ने बड़ी भूमिका निभायी है। सुखद यह भी कि मार्च, 2020 के बाद ठीक होने वालों का प्रतिशत 98 फीसदी हुआ। संक्रमितों की संख्या दो लाख से कम होना भी हमारी उपलब्धि कही जायेगी।

निस्संदेह, हमारा पूर्ण लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब हम देश के वयस्कों को दोनों खुराक दे पायें। लेकिन अभी हमें आत्मसंतुष्टता के जोखिम से बचना चाहिए क्योंकि कोरोना का संकट अभी पूरी तरह से टला नहीं है। दुनिया के कई देशों में तीसरी-चौथी लहर दस्तक दे चुकी है। सरकार ने शीघ्र टीकों के निर्यात का फैसला किया है लेकिन यह घरेलू जरूरतों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। वहीं पर्व शृंखला में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होगी। आने वाले वर्ष में कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना है कि चुनाव अभियान कोरोना के हॉट स्पॉट न बन जायें। वहीं केंद्र सरकार को विश्व के अन्य देशों में भारतीय यात्रियों की सुगम यात्रा के लिये वैक्सीन प्रमाण पत्र की स्वीकार्यता के मुद्दे पर आगे पहल करनी होगी। लेकिन कोविड प्रतिरोधी व्यवहार हर नागरिक की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। यह अच्छी बात है कि सरकार ने कोविड-19 के खिलाफ बच्चों व किशोरों के टीकाकरण अभियान को हरी झंडी दे दी है। साथ ही आपातकालीन उपयोग के लिये जायोकोव-डी वैक्सीन को अनुमति दी है और कोवैक्सीन की वैक्सीन उपयोग के लिये अंतिम चरण में है। निस्संदेह, बच्चों का टीकाकरण स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति सामान्य बनाने के लिये भी जरूरी है। लेकिन इसके साथ हमारी सावधानी सतर्कता बेहद जरूरी है क्योंकि हमने बहुत कुछ हासिल किया, मगर बहुत कुछ हासिल करना अभी बाकी है। हम इस बात पर तो गर्व कर सकते हैं कि भारत टीकाकरण अभियान में अमेरिका से दुगनी खुराक दे चुका है। टीकाकरण में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है और बस चीन से पीछे है। फिर भी भारत ने उपलब्ध संसाधनों और सवा अरब से ज्यादा की जनसंख्या के लिये टीका उत्पादन, वितरण व टीका लगाने का महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया है। यही वजह है कि दुनिया में भारत के प्रयासों की सराहना हो रही है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है। अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने भारत की रेंटिंग में सुधार किया है। अभी भारत को गरीब मुल्कों के टीकाकरण अभियान में बड़ी भूमिका भी निभानी है।

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