टीकाकरण में पारदर्शिता

टीकाकरण में पारदर्शिता

स्पष्ट हों क्रियान्वयन के मानक

निस्संदेह भारत में कोरोना संक्रमण के ग्राफ में लगातार आ रही गिरावट सुखद ही है। इसके बावजूद यह मानकर चलना चाहिए कि यह संकट अभी टला नहीं है। अमेरिका व यूरोप में वायरस के बदले हुए स्ट्रेन ने नये सिरे से दस्तक दी है। बहरहाल, यह खबर उत्साहवर्धक है कि 16 जनवरी से देश में टीकाकरण अभियान विधिवत‍् शुरू हो रहा है। इससे पहले दो चरण में ड्राई रन के जरिये देश के तमाम भागों में टीकाकरण का पूर्वाभ्यास किया गया ताकि इसके क्रियान्वयन में कोई दिक्कत न आये। शोध-अनुसंधान से हासिल वैक्सीन इस महामारी से मुकाबले के लिए सुरक्षा कवच उपलब्ध कराती है। शुुरुआती चरण में देश के तीस करोड़ लोगों को टीकाकरण लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान कहा जा रहा है। देश के तमाम लोगों की निगाहें उन केंद्रों पर लगी हैं, जहां से टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी। इसी बीच चिंता यह भी जताई जा रही है कि कुछ लोग बारी से पहले इसे हासिल करने के लिए तिकड़में भिड़ा रहे हैं। ये वे लोग हैं जो अपने पद, राजनीतिक पहुंच व आर्थिक रसूख का इस्तेमाल करके पहले वैक्सीन हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। वे लोग, जो लाइन तोड़कर लाभ उठाना अपना विशेषाधिकार समझते हैं। यह होड़ उन लोगों के अधिकारों का अतिक्रमण करेगी जिन्हें वैक्सीन पहले मिलनी चाहिए। हालांकि, प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि इसमें पारदर्शिता बरती जायेगी और जनप्रतिनिधियों का नंबर बाद में आयेगा। महामारी के वायरस ने अपना शिकंजा कसने में अमीर-गरीब का फर्क न करके मानवता का विनम्र सबक ही सिखाया है। यही वजह है कि दुनिया के पचास देशों ने वैक्सीनेशन के लिये सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को अधिकृत किया है। साथ ही लाभार्थियों की प्राथमिकता सूची का सख्त अनुपालन सुनिश्चित किया है  ताकि मुनाफाखोरी के लिये टीकाकरण से खिलवाड़ न हो। अन्यथा अमेरिका जैसे देश में वैक्सीन में विसंगतियां सामने आई हैं।   

सरकार ने टीकाकरण के परिवहन, कोल्ड स्टोरेज, वितरण व निगरानी को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं ताकि टीका सुरक्षित ढंग से जरूरतमंदों तक पहुंच सके। पहले चरण में तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों तथा फ्रंटलाइन वर्करों को टीका लगाया जायेगा। फिर गंभीर रोगों से ग्रस्त, संक्रमण के उच्चे जोखिम वाले लोगों व पचास वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाया जायेगा। शुरुआत में तीस करोड़ लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। यह भी जरूरी होगा कि टीके की दोनों खुराक मिलनी सुनिश्चित की जाये। निस्संदेह जिस तरह देश ने कोरोना संकट को झेला है, एक करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं तथा डेढ़ लाख लोगों ने जीवन खोया है, इससे बचाव का अंतिम उपाय टीकाकरण ही है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चुनावी बूथ जैसी रणनीति बनाने और वैक्सीन को लेकर अफवाहों पर अंकुश लगाने की अपील की है। राजनीति व धर्म के आधार पर वैक्सीन को लेकर कुप्रचार किया जाता रहा है। ऐसे लोगों पर नकेल कसना जरूरी है। यह देश के लिये सुखद है कि वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत से हासिल दो वैक्सीनों की आपातकालीन प्रयोग के लिये अनुमति मिल चुकी है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के भारतीय संस्करण कोविशील्ड और पूर्ण रूप से भारतीय वैक्सीन कोवैक्सीन को अनुमति दी है।  कोरोना संकट के दौरान जिस तरह प्रधानमंत्री की अपीलों को राज्यों ने गंभीरता से लिया, उम्मीद है कि टीकाकरण में भी वही प्रतिबद्धता नजर आयेगी।  केंद्र सरकार ने टीकाकरण में प्राथमिकता उन लोगों को दी है जो संकट के समय डटकर खड़े रहे। टीकाकरण कार्यक्रम के लिये साढ़े चार लाख कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है।  निस्संदेह हम समय पर इस महामारी को हराने में कामयाब हो सकेंगे। यह अच्छी बात है कि भारत में दो वैक्सीन उपलब्ध हैं और वह भी दुनिया में सबसे कम कीमत पर। यही वजह है कि दुनिया के विकासशील और गरीब मुल्क बड़ी उम्मीदों से भारत की तरफ देख रहे हैं।  

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