Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

लालच का जानलेवा खेल

ऑनलाइन गेमिंग पर नियंत्रण करे सरकार

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

पंजाब स्थित नवांशहर के एक गांव में ऑनलाइन गेमिंग में बड़ी रकम हारने के सदमे में एक युवक व दो किशोरों का जहर खा लेना विचलित करने वाली घटना है। बाद में युवक व एक किशोर की मौत हो गई। निस्संदेह, ऑनलाइन गेम के लालच में किशोर-युवा विवेक खो देते हैं। लत लगाने वाले ये जहरीले खेल सुनहरे सपने तो दिखाते हैं, लेकिन हकीकत बेहद खुरदरी है। कहना कठिन है कि ऑनलाइन खेलों को कितने पारदर्शी तरीके व ईमानदारी के साथ संचालित किया जाता है। बहुत संभव है कि ये गेम भी ऑनलाइन फ्रॉड संस्कृति का ही हिस्सा हों, जो संचालकों के मुनाफे के लिये ही संचालित होते हों। बहरहाल, किशोर व युवक द्वारा मोटी रकम हारने के बाद खुदकशी करना परिवार, समाज व देश की बड़ी क्षति है। आखिर 21 साल व पंद्रह साल की उम्र कितनी होती है? पूरा जीवन सामने होता है। जीवन चंद रुपये हारने से ज्यादा कीमती होता है। छोटी हार के बाद बड़ी जीत की संभावनाएं बनी रहती हैं। विडंबना ही है कि हम हादसों में मरने वालों की संख्या को महज एक आंकड़े की तरह देखते हैं। लेकिन इस आत्मघात से इन परिवारों जो चोट पहुंची होगी, उसकी कल्पना करना कठिन नहीं है। एक बच्चे को जन्म देने से लेकर पालने-पोसने तक माता-पिता पूरा जीवन लगा देते हैं। उनसे बड़ी उम्मीदें होती हैं। मगर जब बच्चे आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं तो परिवार पूरी तरह टूट जाता है। बच्चा तो आत्महत्या कर लेता है, लेकिन परिवार को रोज तिल-तिल कर मरने को छोड़ देता है। दरअसल, आज मोबाइल दुधारी तलवार जैसे हो गए हैं। सूचना-संवाद तो देते हैं, साथ ही तमाम आघातों की आशंकाएं भी रहती हैं। जो मोबाइल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई और संवाद के लिये दिये जाते हैं, उसका दुरुपयोग बच्चे ऑनलाइन गेमिंग व वर्जित सामग्री देखने के लिये करने लगे हैं। पुरानी पीढ़ी बेबस है कि वे बच्चों की निगरानी कैसे करें? वे पढ़ रहे हैं या गेम खेल रहे हैं?

दरअसल, देश-दुनिया में नई पीढ़ी के जीवन में तेजी से बदलाव आ रहे हैं। नित नई तकनीक हमारे दरवाजों पर दस्तक दे रही है, लेकिन हम उसके नकारात्मक दुष्प्रभावों से बच नहीं पा रहे हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति समाज में इतनी गहरे तक घर कर गई है कि हर कोई रातों-रात अमीर बनने के सपने देखने लगा है। सोच है कि जैसे-तैसे पैसा कमाकर अमीर बना जाए। नवांशहर की घटना में पंद्रह साल के किशोर को आखिर क्यों ऑनलाइन गेमिंग से कमाई करने की ललक पैदा हुई? गेम खेलना बुरी बात नहीं है लेकिन उसका लत बनना घातक है। ये किशोर के खेलने-खाने की उम्र थी, लेकिन मैदान के खेल। लेकिन लालच के गेम में उलझकर आखिर वह क्या पाना चाह रहा था? जाहिर है पंद्रह साल के बच्चे की पढ़ाई-लिखाई से लेकर अन्य खर्चे तक मां-बाप ही उठाते हैं। आशंका हो सकती है कि किशोर परिवार के किसी व्यक्ति के खाते से रकम निकालकर ऑनलाइन गेमिंग में हार गए हों। फिर परिवार की सख्त प्रतिक्रिया के भय से ही उन्होंने आत्महत्या करने का दुखद फैसला लिया हो। बहरहाल, तकनीक के जरिये तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों का सामंजस्य स्थापित करना अभिभावकों के लिये बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुरानी पीढ़ी के मां-बाप बच्चों की खुशी के लिये उन्हें मोबाइल व इंटरनेट की सुविधा तो उपलब्ध करा देते हैं, मगर इसके घातक प्रभावों की वे भी कल्पना नहीं कर पाते। कोई मां-बाप नहीं चाहता कि उनका बच्चा बुरी आदत का शिकार बने, लेकिन यार-दोस्तों की संगत में रहकर वे अकसर भटक जाते हैं। इस घटना में 21 साल के युवक के साथ पंद्रह साला दो बच्चों का भी जहर खाना कई सवालों को जन्म दे जाता है। आखिर क्या युवक के साथ किशोर भी ऑनलाइन गेमिंग की लत के शिकार थे? क्या उन्होंने अपने घर से पैसे लाकर युवक को ऑनलाइन गेमिंग में बाजी लगाने को दिए? फिर गेम हारने पर पैसा गंवाने के भय से उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया? बहरहाल, केंद्र व राज्य सरकारों को पैसे वाली ऑनलाइन गेमिंग के नियमन के लिये गंभीर पहल करनी चाहिए। ताकि फिर किसी परिवार के फूल न मुर्झाएं।

Advertisement

Advertisement
Advertisement
×