अन्याय का त्रास : The Dainik Tribune

अन्याय का त्रास

नजीर के दंड से बेटियों को मिलेगा न्याय

अन्याय का त्रास

रविवार को जब पूरा देश बेटी दिवस मना रहा था तो उत्तराखंड के श्रीनगर के निकट एक उम्मीदों की बेटी अंकिता का अंतिम संस्कार हो रहा था। एक प्रतिभावान बेटी जिसने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई बीच में छोड़कर नौकरी कर ली थी, उसे दरिंदों ने पहली पगार मिलने से पहले जिंदा नहर में फेंक दिया। इस घटना से पूरे उत्तराखंड में उबाल है। ऋषिकेश के निकट जिस रिसोर्ट में अंकिता ने रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की थी, उसके मालिक व उसके कारिंदों ने उसकी उत्पीड़न के बाद हत्या कर दी। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि अभियुक्त भाजपा की उत्तराखंड सरकार में पूर्व मंत्री का पुत्र है। घटना के बाद उपजे आक्रोश के बाद राज्य की भाजपा सरकार बचाव की मुद्रा में है। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए पूर्व मंत्री व एक आयोग में पदाधिकारी आरोपी के भाई को भाजपा से बर्खास्त कर दिया गया। आनन-फानन में रिसोर्ट के बाहरी हिस्से पर बुल्डोजर चलाकर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई है। जिसको लेकर क्रुद्ध लोगों का कहना है कि पर्याप्त सबूत एकत्र किये बिना बुल्डोजर चलाने का क्या औचित्य है। बताया जाता है कि क्षुब्ध लोगों ने स्थानीय भाजपा विधायक की गाड़ी पर भी हमला किया। सरकार ने मामले में एसआईटी गठित करके जांच के आदेश दिये हैं। युवती के पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट बताती है कि नहर में फेंके जाने से पहले उत्पीड़न किये जाने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया। लोग राजस्व पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

यह विडंबना ही है कि अपने परिवार को आर्थिक संबल देने निकली खुद्दार बेटी को वहशी दरिंदों की क्रूरता का शिकार होना पड़ा। बताते हैं कि पिता की सुरक्षा गार्ड की नौकरी चले जाने के बाद अंकिता ने बारहवीं करके पढ़ाई छोड़ नौकरी करने का फैसला किया था। पुलिस के अनुसार रिसोर्ट में आने वाले मेहमानों को स्पेशल सर्विस देने के लिये अंकिता पर दबाव बनाया गया था। लेकिन उसने मोटी रकम व अन्य प्रलोभनों को ठुकरा दिया। इस बात की पुष्टि युवती की एक सहेली से हुए मोबाइल चैट में भी उजागर हुई है। खुद्दार व चरित्र से समझौता न करने की कीमत अंकिता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यहां सवाल उठना स्वाभाविक है कि हमारा समाज पराभव के किस दौर तक जा पहुंचा कि रिसोर्ट मालिक को प्रतिभावान युवती की जान लेने में कोई भय-संकोच नहीं हुआ। जाहिर है पिता के राजनीतिक रसूख के चलते आरोपी को विश्वास था कि वह अपराध करके भी बच जायेगा। सवाल स्थानीय राजस्व पुलिस को लेकर भी उठे हैं कि छह दिन से लापता लड़की को तलाशने के लिये समय रहते प्रयास क्यों नहीं हुए। बहुत संभव था कि समय रहते हुए कार्रवाई होती तो शायद युवती का जीवन बचाया जा सकता। जनाक्रोश बढ़ते देख भाजपा की प्रदेश सरकार अब राज्य के सभी रिसोर्टों की जांच करने की बात कर रही है, लेकिन उसके तंत्र को इस बात का भान नहीं था कि पुलिस-प्रशासन के नाक के नीचे अनैतिक कृत्यों का क्रम जारी है।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

ज़रूर पढ़ें

समझ-सहयोग से संभालें रिश्ते

समझ-सहयोग से संभालें रिश्ते

धुंधलाए अतीत की जीवंत झांकी

धुंधलाए अतीत की जीवंत झांकी

प्रेरक हों अनुशासन और पुरस्कार

प्रेरक हों अनुशासन और पुरस्कार

सर्दी में गरमा-गरम डिश का आनंद

सर्दी में गरमा-गरम डिश का आनंद

यूं छुपाए न छुपें जुर्म के निशां

यूं छुपाए न छुपें जुर्म के निशां

फुटबाल के खुमार में डूबा कतर

फुटबाल के खुमार में डूबा कतर

नक्काशीदार फर्नीचर से घर की रंगत

नक्काशीदार फर्नीचर से घर की रंगत

शहर

View All