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गण का हो तंत्र

नागरिकों की जवाबदेही-जागरूकता भी जरूरी

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ऐसे वक्त में जब हम 77वां गणतंत्र दिवस समारोहपूर्वक मना रहे हैं, सत्ताधीशों के साथ-साथ देश के नागरिकों के लिए भी यह आत्ममंथन का समय है। निर्विवाद रूप से, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की प्रतिष्ठा हमारी संवैधानिक संस्थाओं की जनपक्षधरता और जवाबदेही से सुनिश्चित होती है। लेकिन जरूरत इस बात की है कि हमारे जनतंत्र पर तंत्र हावी न हो। नागरिकों का जीवन सुगम हो और सत्ता व प्रशासन तक उनकी पहुंच सहज हो। वहीं, नागरिकों को भी संवैधानिक संस्थाओं की कार्यशैली और जवाबदेही पर सचेतक निगाह रखनी चाहिए। देश का स्वतंत्र मीडिया जनहितों की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी कहा कि समाज में असीम शक्ति होती है। समाज का सक्रिय समर्थन किसी योजना और नीति को बदलाव के आंदोलन में बदल देता है। देश में डिजिटल पेमेंट में जनभागीदारी का उदाहरण देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पूरी दुनिया के आधे डिजिटल पेमेंट भारत में होते हैं। निःसंदेह, देश में लोकतंत्र की समृद्ध परंपराओं को जनभागीदारी से ही अक्षुण्ण रखा जा सकता है। देश ने कल राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया। हमारे लोकतंत्र को सशक्त और पारदर्शी बनाने में हमारे वयस्क मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय लोकतंत्र में हावी होते धनाढ्य लोग, बाहुबलियों और दागी उम्मीदवार तभी दरकिनार हो सकते हैं, जब मतदाता विवेकपूर्ण मतदान के जरिए समाज के जागरूक, ईमानदार और आम उम्मीदवारों को जनप्रतिनिधि संस्थाओं के लिए चुनेंगे।

हाल के वर्षों में देश के लोकतंत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है। उनका मतदान प्रतिशत भी बढ़ा है। बल्कि, उन्होंने कई राज्यों में सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि खेत-खलिहान से अंतरिक्ष तक और सेना से लेकर अंतर्राष्ट्रीय खेलों में विशिष्ट पहचान बनाने वाली महिलाओं को और सशक्त बनाया जाए। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को हमारी सरकारों को प्राथमिकता की सूची में शामिल करना होगा। बड़े पैमाने पर जनधन खाते खुलने, आवास योजनाओं में संपत्ति का अधिकार मिलने और स्वयं सहायता समूहों में भागीदारी से देश की करोड़ों महिलाएं सशक्त बनी हैं। वहीं, हमारा सौभाग्य है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। आज जरूरत इस बात की है कि युवा आबादी को पर्याप्त और समय पर रोजगार मिले। कौशल विकास योजनाओं से उन्हें स्वावलंबी बनाने का मार्ग सुनिश्चित किया जाए। यदि हम हर युवा को रोजगार देना सुनिश्चित कर सकें, तो हम विकसित भारत के लक्ष्य को समय से पहले हासिल कर सकते हैं। हमें दुनिया के तमाम देशों में रोजगार की तलाश में भटक रहे युवाओं को देश में ही सम्मानजनक रोजगार देने का प्रयास करना चाहिए।वहीं दूसरी ओर, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले किसानों को फसलों का न्यायसंगत दाम देने के प्रयास तेज़ करने होंगे। सस्ते ब्याज वाले ऋण, बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करके हम उनकी राह आसान कर सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से किसानों को राहत जरूर मिली है, लेकिन अभी इस दिशा में बहुत कुछ करना बाकी है।

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