हरियाणा सरकार की नई पहल स्वागत योग्य है, जिसके तहत राज्य में महिला स्टार्टअप्स के लिए सात साल तक राज्य जीएसटी राशि फ्री कर दी जाएगी। महत्वपूर्ण यह भी है कि नीति में बदलाव करते हुए सरकार ने कहा है कि महिला उद्यमियों द्वारा 25 लाख रुपये का निवेश करने पर सरकार भी इतना ही योगदान देगी। निश्चित रूप से महिलाएं देश के उद्यमिता क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। उनकी एकाग्रता, समर्पण और साफ-सुथरी व्यवस्था की कॉरपोरेट जगत में प्रशंसा की जाती है। नि:संदेह, हरियाणा सरकार की यह पहल नारी सशक्तीकरण की दिशा में एक रचनात्मक कदम है। सही मायनों में सरकार का यह संबल महिला उद्यमियों के लिए उद्योग जगत में नया आकर्षण लेकर आएगा। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ‘हरियाणा स्टेट स्टार्टअप पॉलिसी 2022’ के सप्लीमेंट को मंजूरी दी गई। वहीं दूसरी ओर, सामान्य स्टार्टअप्स को सात साल तक नेट एसजीएसटी की 50 फीसदी प्रतिपूर्ति मिलती रहेगी। इसके अलावा, महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को एक साल तक लीज रेंट का 50 फीसदी, अधिकतम 10 लाख रुपये तक वापस मिलेगा। इस दिशा में सरकार ने एक रचनात्मक पहल यह की है कि पर्यावरण के अनुरूप ग्राम्य उत्पादों, हस्तशिल्प, आयुर्वेद उत्पादों तथा देशी खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने वाले उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है। इस क्रम में ऐसे स्टार्टअप्स जो हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों, आयुर्वेद-आधारित स्वास्थ्य एवं वेलनेस उत्पादों और देशी खाद्य उत्पादन से जुड़े हैं, उन्हें 50,000 से 1 लाख रुपये तक की माइक्रो-ग्रांट भी दी जाएगी।
दरसअल, राज्य सरकार ने अनेक प्रोत्साहन कदमों से राज्य में उद्यमिता के अनुकूल माहौल बनाने का भी प्रयास किया है। सरकार ने घोषणा की है कि यदि किसी निजी या एंजल निवेशक से किसी स्टार्टअप को 25 लाख रुपये मिलते हैं, तो सरकार भी 25 लाख रुपये तक की मैचिंग ग्रांट दे सकेगी। निश्चय ही सरकार की यह पहल राज्य में उद्यमिता का विकास करेगी। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि नई तकनीक का लाइसेंस लेने या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। गुणवत्ता प्रमाणन हासिल करने पर खर्च की 50 फीसदी राशि, अधिकतम 25 लाख रुपये तक एक बार वापस की जाएगी। यहां यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि सरकार द्वारा दी जा रही छूट का दुरुपयोग समाज के चतुर-चालक लोग न करने लगें। जैसे देश में ‘प्रधान पति’ (महिला प्रधानों के पति) खुलेआम कामकाज संभालते नजर आते हैं, कम से कम उद्यमिता के क्षेत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए। अक्सर सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए परिवार की महिलाओं के नाम पर स्टार्टअप शुरू दिखाने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगाने की जरूरत है। महिला सशक्तीकरण तभी संभव है जब महिलाएं खुद आगे आएं और उद्यमिता में कामयाबी के नए मानक स्थापित करें। नि:संदेह, उद्योगों में महिलाओं की यह भागीदारी उस राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी, जहां समाज में लिंग-भेद के गहरे आक्षेप रहे हैं।

