देश में युवा मन के सपनों और भविष्य की चिंताओं के मद्देनजर हरियाणा सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। कहीं न कहीं दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में हुए छात्र आंदोलन के बाद आज युवा सरकार की नीतियों के केंद्र में हैं। इसी कड़ी में हरियाणा की नायब सरकार ने सीईटी पास युवाओं की सुध ली है। जाहिर है सभी सीईटी पास युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता। कई युवा परीक्षा पास करने के बाद भी वर्षों तक बेरोजगार बने रहते हैं। एक्शन में आई हरियाणा सरकार ने ऐसे पांच लाख चालीस हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं की पहचान की है, जिन्हें परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद रोजगार नहीं मिला। इसके बाद ‘विकसित भारत विजन 2047’ के तहत रोजगार, कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग तथा हरियाणा कौशल विकास मिशन की बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस बात पर बल दिया कि कौशल विकास योजनाओं को सिर्फ प्रशिक्षण तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें सीधे रोजगार से भी जोड़ा जाए। सरकार ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी सीईटी पास युवाओं को प्रति माह सौ घंटे का काम उपलब्ध कराने की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर यदि उन्हें दो साल तक रोजगार नहीं मिलता, तो सक्षम युवा योजना के तहत भत्ता दिया जाएगा। निश्चित रूप से सभी बेरोजगारों को काम व भत्ता देना व्यावहारिक भले नहीं लगे, लेकिन बेरोजगारों की बड़ी संख्या को फौरी तौर पर संबल जरूर मिलेगा। दरअसल, विगत में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2016 में युवाओं के लिए एक ऐसी ही योजना लाई गई थी, जिसमें सालाना 1 लाख 80 हजार से कम आय वाले परिवार के युवाओं को 9 हजार का मासिक भत्ता देने की बात कही गई थी। वहीं, महीने में निर्धारित समय तक काम देने के भी प्रयास हुए थे। लेकिन वास्तव में ऐसी आदर्श योजना के क्रियान्वयन में व्यावहारिक दिक्कतों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
विगत में हरियाणा के युवाओं को प्रकृति से जोड़ने व रोजगार के अवसर मुहैया कराने के अभिनव प्रयास भी मनोहर लाल सरकार के दौरान हुए थे, जिसमें बेरोजगार युवाओं को पौधा लगाने का दायित्व दिया गया था। इसमें गड्ढे खोदने, पौधे लगाने और उनकी निरंतर देखभाल करने के लिए मानदेय निर्धारित किया गया था। उद्देश्य था कि जो पौधे लगें, वे जीवित भी रहें और युवा प्रकृति से जुड़ें। नायब सरकार की नई मुहिम इसी कड़ी का विस्तार माना जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, नायब सरकार समय की जरूरतों के हिसाब से शिक्षा देने के प्रयासों में गंभीर नजर आती है। इसी कड़ी में एआई प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। सरकार पंचकूला व गुरुग्राम में एआई हब विकसित करने जा रही है, जिसके अंतर्गत दो लाख युवाओं को हाई-स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अंतर्गत एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए अतिरिक्त बजट का भी प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, मॉडल आईटीआई और पॉलिटेक्निक में एआई प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं सामान्य स्कूलों व कॉलेजों में इस बात पर बल दिया जा रहा है कि छात्र व छात्राओं को व्यवसायपरक शिक्षा दी जाए, जिससे युवा सिर्फ नौकरियों के भरोसे न बैठे रहें और खुद का काम-धंधा शुरू कर सकें। विडंबना यह है कि 21वीं सदी में भी भारतीय युवा सरकारी नौकरी के सम्मोहन से मुक्त नहीं हो पा रहा है। बढ़ती आबादी और घटती सरकारी नौकरियों ने इस संकट को बढ़ाया है। आज जरूरत इस बात की है कि छात्रों में नवाचार व कौशल विकास के जरिये आत्मनिर्भर बनने का जज्बा पैदा किया जाए, जिससे वे खुद ही आर्थिक रूप से सक्षम न बनें, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने की स्थिति में आ जाएं। आज वैश्विक स्तर पर जारी राजनीतिक अस्थिरता व सिमटते रोजगार के अवसरों के बीच देश के युवाओं को रोजगार मुहैया कराना सरकारों की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत युवाओं का देश है। यदि हम हर हाथ को काम न दे सके, तो युवाओं की शक्ति व क्षमताओं का लाभ उठाने के अवसर से वंचित हो जाएंगे।

