नशे का नश्तर : The Dainik Tribune

नशे का नश्तर

अब न जागे तो देश कीमत चुकाएगा

नशे का नश्तर

प्रतिकात्मक चित्र

यह पंजाब के नीति-नियंताओं के लिए शर्मसार करने वाली स्थिति है कि प्रदेश को झुलसाने वाली नशे की महामारी को लेकर हीलाहवाली पर सुप्रीम कोर्ट को फटकार लगानी पड़ी है। शीर्ष अदालत ने यहां तक कह दिया कि यदि पंजाब में अवैध शराब-ड्रग्स के धंधे पर रोक न लगाई गई तो युवा खत्म हो जाएंगे। कोर्ट की ऐसी सख्त टिप्पणी समस्या की भयावहता को दर्शाती है। शीर्ष अदालत ने यहां तक कह दिया कि पंजाब में हर गली में अवैध शराब की भट्ठी खुली है। जस्टिस एम.आर. शाह और जस्टिस सी.टी. रविकुमार की पीठ ने इस बात को चिंताजनक बताया कि पिछले दो वर्षों में अवैध शराब को लेकर राज्य में 36000 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पीठ ने पूछा कि अब तक सरकार ने पुलिस को जवाबदेह बनाने के लिये क्या किया। साथ ही सरकार की ओर से इस दिशा में की जा रही कार्रवाई का विवरण भी मांगा है। कोर्ट ने दु:ख जताया कि नशे के जरिये युवा पीढ़ी को बर्बाद किया जा रहा है। निस्संदेह, सीमावर्ती राज्य होने के कारण यह स्थिति चिंताजनक है। कोर्ट की इस बात से सहमत हुआ जा सकता है कि प्राथमिकी दर्ज करने और अवैध शराब की भठ्ठियां ध्वस्त किये जाने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिये पुलिस को भी जवाबदेह बनाने की जरूरत है। कोर्ट ने साथ ही पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के जरिये राज्य सरकार को नसीहत दी कि अवैध शराब निर्माताओं से जो करोड़ों रुपये का जुर्माना वसूला गया है, उसे सरकारी कोष में जमा कराने के बजाय नशीले पदार्थों के खिलाफ लोगों में जागरूकता लाने तथा इस काम में लगे कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में खर्च करे ताकि नशे के कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों नकली शराब पीने से चार लोगों की मौत हुई थी। मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के लिये ही कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार को राज्य में बढ़ते नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिये तत्काल प्रभाव से सख्त कदम उठाने को कहा है। साथ ही राज्य सरकार से इस बाबत विस्तार से जवाब देने के लिये कहा है। राज्य सरकार ने इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिये दो सप्ताह का समय मांगा था। लेकिन कोर्ट ने इस सुनवाई के लिये बारह दिसंबर की तारीख तय कर दी है। अदालत का कहना था कि यह एक गंभीर चुनौती है। नशे की दलदल में युवाओं को धकेल कर देश को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर दुख जताया कि नकली शराब से गरीब लोग मर रहे हैं। जो सस्ती के चक्कर में ज़हरीली शराब के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अवैध शराब का निर्माण व बिक्री रोकने के लिये प्रशासन व पुलिस की जिम्मेदारी तय करनी जरूरी है। निस्संदेह, नशा पंजाब के लिये गंभीर मुद्दा है, जिसे सिर्फ प्राथमिकी दर्ज करके ही नहीं सुलझाया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि मामलों में नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी में लेट-लतीफी की जाती है। बहरहाल, इस गंभीर मुद्दे पर जहां राज्य सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, वहीं केंद्र सरकार की ओर से भी इस सीमावर्ती संवेदनशील राज्य को लेकर व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये पंजाब में नशीले पदार्थ भेजने के दर्जनों मामले प्रकाश में आए हैं और करोड़ों रुपये की हेरोइन बरामद भी हुई है। इस अंतर्राष्ट्रीय साजिश का मुकाबला केंद्रीय एजेंसियों की भागीदारी से किया जा सकता है। जिसमें राज्य सरकार का सक्रिय सहयोग अपेक्षित है। इस समस्या की चुनौती को महसूस करते हुए ही केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डीआरआई के अधिकारियों से कहा है कि नशे के कारोबार से जुड़ी बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसा जाए ताकि पता चल सके कि अवैध ड्रग्स के पहाड़ देश में कौन भेज रहा है। दरअसल, वर्ष 2021-22 में नशीले पदार्थों की जब्ती में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।

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