यह कल्पना करना भी कठिन होता है कि सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा के लिये जवाबदेह किसी हवाई जहाज का कोई को-पायलट अपने कैप्टन पर हमला करके जहाज को क्रैश कराने की साजिश करेगा। यहां तक कि पायलटों को ट्रेनिंग में भी इस तरह की अप्रत्याशित चुनौती पर चर्चा नहीं होती, क्योंकि यह विश्वास ही नहीं किया जा सकता कि कोई पायलट अपने पेशे से गद्दारी कर ऐसा कृत्य कर सकता है। कभी आसमान में जब ऐसा अप्रत्याशित घटे। फिर गंभीर रूप से घायल कैप्टन हमलावर साथी पायलट के घातक हमलों से जूझता हुआ, बेहद मुश्किल हालात में कॉकपिट खोल दे। फिर यात्रियों व क्रू-मेंबर्स को मदद के लिये आवाज दे। तो वास्तव में वह कैप्टन हमारी हकीकत की जिंदगी के हीरो से भी बढ़कर महानायक सरीखा ही है। फ्लाई दुबई के हवाई जहाज में कैप्टन स्मित मच्छार के ऐसे ही साहस से भयानक साजिश के चलते अचानक हजारों फीट नीचे गिरते जहाज को नियंत्रण में लाया जा सका। उनके साहस से हवाई जहाज में सवार 174 यात्रियों की जान बचायी जा सकी है। आज स्मित के साहस की दुनिया तारीफ कर रही है। हमेशा भारतीयों को लेकर असहज टिप्पणियां करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्मित के साहस की सार्वजनिक रूप से तारीफ की है। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हीरो की तारीफ करते हुए कहा है कि एक हिंदुस्तानी ने एक दूसरा 9/11 होने से बचा लिया है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारत का गौरव बढ़ाने वाले स्मित मच्छार के साहस की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। निस्संदेह, स्मित व हवाई जहाज में साहस दिखाकर विमान की सऊदी अरब में सुरक्षित लैंडिंग कराने वाले सहयोगी यात्री अभिनंदन के काबिल हैं। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग की घटना अप्रत्याशित और रोंगटे खड़े करने वाली है। इस्राइली यात्री यानीव हायुन भी बड़ी त्रासदी टालने वाले साहसी यात्रियों में शामिल थे। इस हवाई जहाज के इस्राइल में उतरने पर इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हवाई अड्डे पहुंचकर इस साहसी यात्री की पीठ थपथपायी।
बहरहाल, स्मित मच्छार द्वारा समय पर दिखाए गए अदम्य साहस ने एक बड़ी हवाई त्रासदी को टाल दिया। निश्चित रूप से आने वाले समय में जांच के बाद कई अहम सवालों के जवाब मिल पाएंगे। सवाल है कि आखिर विमान का को-पायलट जहाज को क्यों क्रैश कराना चाहता था? क्या इसके पीछे कोई आत्मघाती विचारधारा काम कर रही थी या ये कोई बड़ी आतंकी साजिश थी? क्या ये को-पायलट के कट्टरपंथ की ओर रुझान, या फिर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या की परिणति थी? वैसे साजिश में ईरान के शामिल होने के दावों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। समय की मांग है कि सऊदी अरब, यूएई और इस्राइल आदि देशों के जांचकर्ताओं को असलियत का पता लगाना चाहिए। बहरहाल, इस्राइल पर हमास के घातक हमले की तीसरी बरसी से कुछ दिन पहले हुई इस भयावह घटना ने दुनियाभर में हवाई यात्रा की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर सबका ध्यान खींचा है। इस घटनाक्रम के कई अनुत्तरित सवाल लोगों को परेशान कर रहे हैं कि को-पायलट को प्राणघातक हथियार कैसे मिला? क्या हवाई जहाज के उड़ान भरने से पहले कॉकपिट सुरक्षा के मौजूदा नियमों का पूरी तरह से पालन किया गया था? घटनाक्रम के आलोक में एविएशन प्रोटोकॉल की पारदर्शी जांच भी जरूरी है। इस घटना का मानवीय पहलू यह है कि कैप्टन, यात्रियों व क्रू मेंबर्स ने बेहद चुनौतीपूर्ण हालात में विमान को आकाश में बनाये रखा। बेहद जटिल स्थिति में तत्काल समयानुकूल निर्णय लेने के लिये उनके हिम्मती कदम बेहद सम्मान व तारीफ के काबिल हैं। जिसके चलते स्मित मच्छार को आज इस्राइल में एक बड़े हीरो की तरह देखा जा रहा है। मौत के मुंह से निकलकर आये यात्री सोशल मीडिया पर उनका गुणगान करते नहीं थक रहे हैं। इतना ही नहीं, एक भारतीय के अदम्य साहस के लिये इस्राइल में भारत को भी धन्यवाद दिया जा रहा है। बहरहाल, व्यापक नजरिये से देखें तो इस घटनाक्रम के बाद एविएशन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे भविष्य में ऐसे घटनाक्रम की पुनरावृत्ति रोकने के लिये चाक-चौबंद सुरक्षा उपाय अपनाएं।

