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झुलसती जिंदगी

लू के थपेड़ों से जन-जीवन पर तपिश

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एक वैश्विक संस्था एक्यूआई.इन के हालिया आंकड़ों से यह परेशान करने वाली तस्वीर उभरी है कि दुनिया के सबसे गर्म बीस शहरों में 19 भारत के हैं। निस्संदेह, जलवायु परिवर्तन बढ़ते तापमान का मुख्य कारक है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकारों व आम नागरिकों की उदासीनता भी इसके मूल में है। घटता वनों का दायरा और हमारी जीवनशैली में बदलाव से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन भी बढ़ते तापमान का एक कारक बन रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पिछले कुछ दिनों तक बारिश के बाद लोग अप्रैल माह में भी ठंड का अनुभव कर रहे थे। उसके कुछ ही दिन बाद तुरंत लू चलने लगी। यह अचानक होने वाला मौसमी बदलाव हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। तमाम लोग अचानक मौसमी बदलाव से उत्पन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। गंगा के किनारे बसे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में देश का सबसे ज्यादा 44.4 तापमान दर्ज किया जाना गंभीर स्थिति को दर्शाता है। चिंता की बात यह है कि गर्मी सामान्य सीमाओं को पार करके आगे बढ़ रही है। मौसम विभाग चेता रहा है कि देश के कई इलाकों में आगामी दिनों में लू की स्थिति बनी रहेगी। कई जगह पारा 43 डिग्री तक पहुंच सकता है। दरअसल, मौसम विभाग का मानक है कि जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है तो इसे लू चलना कहा जाता है। फिक्र की बात यह है कि अप्रैल के चौथे सप्ताह में ही देश के कई शहर हीटवेव की सीमा से आगे बढ़ गए हैं। देश में बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा आदि राज्य इस तपिश का सामना कर रहे हैं। यहां तक कि पहली बार मध्यप्रदेश में रात को हीटवेव चलने की चेतावनी दी गई है। गर्मी का आलम यह है कि देश के कई राज्यों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। दिल्ली के स्कूलों में एक समय अवधि घंटी बजाकर छात्रों को डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा ताकि वे पानी पीकर गर्मी की चुनौती का मुकाबला करें।

गर्मी के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर देश के तमाम राज्यों में जीवन रक्षा के उपाय किए जा रहे हैं। कई जगह श्रमिकों के दिन में कुछ घंटों में काम करने पर रोक लगायी गई है। महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ में ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी का समय बदला गया है। तमाम शहरों में लू के अलर्ट जारी किए जा रहे हैं। कई जगह ट्रैफिक सिग्नल बंद किए गए ताकि लोगों को चौराहों पर धूप में खड़ा न रहना पड़े। सड़कों, बस स्टेशनों तथा रेलवे स्टेशनों में पानी की फुहार के जरिये गर्मी से राहत देने के प्रयास किए जा रहे हैं। ताजमहल देखने पहुंचे कई पर्यटकों के बेहोश होने के समाचार हैं। गर्मी के चलते राजस्थान के कई पर्यटक स्थलों में पर्यटकों की संख्या में गिरावट के संकेत हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस सप्ताह दिल्ली में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। बहरहाल, इन तमाम चिंताओं के बीच प्रश्न यह है कि अप्रत्याशित गर्मी क्यों बढ़ रही है। दरअसल, अप्रैल माह में प्री-मानसून हीट पीरियड के चलते जमीन पर पड़ने वाली तेज धूप गर्मी का एक कारण है। बताया जाता है कि हिमालयी क्षेत्रों में कम बर्फबारी भी गर्मी बढ़ने का एक कारक है। वहीं समुद्री सतह के गर्म होने से भी गर्मी का असर तेज हो रहा है। फलत: वातावरण में ठंडक लाने वाली हवाएं व सिस्टम कमजोर होने से, वे ही गर्मी बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वहीं शुष्क हवाएं बादल बनने में अवरोध पैदा करके बारिश की संभावना को कम कर दे रही हैं। निश्चित रूप से यह जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की भी देन है। यह वर्तमान ही नहीं, भविष्य में भी और तापमान बढ़ने की चिंता भी दर्शाता है। आशंका है कि भविष्य में तापमान में तीव्रता और बार-बार हीटवेव चलने की स्थिति बढ़ सकती है। हाल-फिलहाल मानसून से पहले की फुहारों के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं, जिसका मतलब है कि जल्दी बारिश न होने से इस माह के बाकी दिनों में भी हमें गर्मी की तपिश झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।

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