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सोनार बांग्ला का संकल्प

चुनौतियों का ताज भी मिला है शुभेंदु को

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यह भाजपा के लिए आह्लादित होने का वक्त है कि आजादी के बाद पहली बार बंगभूमि में उसकी सरकार बनी है। जिस धूमधाम व उल्लास संग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा व एनडीए के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार का शपथग्रहण समारोहपूर्वक संपन्न हुआ, उससे इसके महत्व का पता चलता है। भाजपा के लिए यह मौका इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि उसकी पूर्ववर्ती मातृ पार्टी जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि में सरकार बनाने का सपना पौन सदी बाद पूरा हुआ। दशकों तक वामपंथी दलों का गढ़ रहे बंगाल में दक्षिणपंथ का उदय एक विस्मयकारी घटना है। डेढ़ दशक से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में भाजपा ने साम-दाम-दंड-भेद के मुहावरे को हकीकत बनाया। कई दशकों के योजनाबद्ध अभियानों के बाद बंगाल में कमल खिला है। आक्रामक प्रचार तंत्र, मजबूत संगठन व संघ के वरदहस्त के चलते आज पश्चिम बंगाल भाजपामय हुआ है। यह पल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भाजपा ने कभी वामगढ़ रहे प्रदेश में अपनी यात्रा शून्य से शुरू की है। एक दशक में सुनियोजित अभियान से भाजपा का सत्ता पर काबिज होना भारतीय राजनीति की ऐतिहासिक घटना कही जा सकती है। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि शुभेंदु विपक्ष में रहते दिखाए गए आक्रामक तेवरों को छोड़, प्रतिशोध की राजनीति में न उलझकर, इस परिवर्तन को सार्थक बनाएंगे। कुछ ऐसा करें कि देश में शुभेंदु विकास मॉडल की चर्चा हो।

निस्संदेह, बंगाल में मिली बड़ी कामयाबी का श्रेय केंद्रीय नेतृत्व व पार्टी संगठन के साथ ही शुभेंदु अधिकारी को दिया जाना चाहिए, जिन्होंने सत्ता के दमन का सामना करते हुए न केवल संगठन को मजबूत बनाये रखा, बल्कि नंदीग्राम से लेकर भवानीपुर तक बंगाल की शेरनी कही जाने वाली ममता बनर्जी को सीधी लड़ाई में परास्त भी किया। वे पिछले पांच वर्ष से सड़क से विधानसभा तक में आक्रामक ढंग से टीएमसी का प्रतिरोध करते रहे। लेकिन अब जब उन्हें राज्य की बागडोर सौंपी गई है तो उम्मीद करें कि वे राज्य की कानून व अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे। उद्योग विरोधी नीतियों को दूर कर, राज्य में भारी निवेश को आमंत्रित करके बेरोजगारी संकट को दूर करने का प्रयास करेंगे। राज्य में कानून व्यवस्था, खासकर महिला सुरक्षा का बड़ा मुद्दा रहा है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद राज्यव्यापी आक्रोश पनपा था। संदेशखाली में महिलाओं से दुर्व्यवहार व हिंसा की घटनाएं लोगों को याद हैं। राष्ट्रवादी नीतियों को लेकर अगुवा रहने वाली भाजपा के लिए बांग्लादेश सीमा से घुसपैठ रोकना प्राथमिकता होगी, लेकिन इसका खमियाजा भारतीय नागरिकों को न भुगतना पड़े। उम्मीद की जानी चाहिए कि शुभेंदु सरकार राज्य में राजनीतिक व चुनावी हिंसा पर लगाम लगाने की ठोस पहल करेगी। साथ ही उन हिंसा करने वाले दबंग तत्वों पर लगाम लगाएगी, जो चोला बदलकर हर नई सरकार की छतरी के नीचे खड़े हो जाते हैं। जो कालांतर राज्य में अराजक राजनीतिक संस्कृति को जन्म देते हैं। कानून व्यवस्था सुधरने से ही पश्चिम बंगाल पटरी पर लौटेगा।

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