जुनून का खेल : The Dainik Tribune

जुनून का खेल

कतर में फुटबाल के महाकुंभ की धमक

जुनून का खेल

आखिरकार बहुप्रतीक्षित फीफा वर्ल्ड कप 2022 रंगारंग कार्यक्रमों और कतर तथा इक्वाडोर के बीच खेले मैच के साथ शुरू हो गया। खेल का जुनून करोड़ों लोगों के बीच इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि क्रिकेट का करिश्मा फीका नजर आ रहा है। इस आयोजन की मेजबानी एशिया को मिलना इस बात का प्रतीक है कि आने वाले दिनों में अमेरिका व यूरोप जैसा फुटबाल का जुनून इस महाद्वीप में भी नजर आये। इस आयोजन को लेकर कतर लगातार पश्चिमी देशों के निशाने पर रहा है। इस छोटे से देश की आयोजन क्षमता को लेकर लगातार सवाल उठाये जाते रहे हैं। सवाल उसके मानवाधिकारों के रिकॉर्ड को लेकर भी उठते रहे हैं। लेकिन कतर के जज्बे ने दिखाया है कि एशियाई देश भी ऐसे भव्य आयोजन करने में सक्षम हैं। पूरा एशिया भी अब फुटबाल के खुमार में डूबता नजर आ रहा है। इस आयोजन में तमाम टीमों में खेलने वाले चोटी के खिलाड़ियों के साथ केंद्र में अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी और पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ही रहेंगे। जहां पिछले विश्व कप विजेता फ्रांस अपना खिताब बचाने की कोशिश में रहेगा, वहीं फुटबाल की दिग्गज टीमें ब्राजील, अर्जेंटीना, जर्मनी, इंग्लैंड, स्पेन, बेल्जियम, नीदरलैंड,पुर्तगाल फीफा विश्वकप पर दावेदारी के साथ उतरेंगे। इस आयोजन की खास बात यह भी है कि 1978 के विश्वकप के बाद यह 29 दिन वाला सबसे कम अवधि का आयोजन होगा।

बहरहाल, फीफा वर्ल्ड कप का यह आयोजन अपनी तमाम विशिष्टताओं के लिये याद किया जायेगा। कतर ने इस आयोजन के लिये बड़ी संख्या में आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया है। कई बड़े स्टेडियम व होटल बनाये गये हैं। यहां तक कि मेट्रो व नई सड़कों का निर्माण इस बड़े आयोजन के लिये किया गया। आयोजन के लिये सात स्टेडियम तो स्थायी बनाये गये हैं, जबकि एक को आयोजन के बाद ध्वस्त कर दिया जायेगा। इसे शिपिंग कंटेनरों के जरिये बनाया गया है। दरअसल, कतर एक छोटा देश है जो आकार के मामले में दुनिया के शीर्ष सौ देशों में भी नहीं गिना जाता। दावा है कि करीब पंद्रह लाख लोग इस आयोजन में शामिल होने के लिये आएंगे जिनमें से कुछ लोगों को पड़ोसी देशों में रहना पड़ सकता है। वैसे कतर ने इस आयोजन के लिये पैसा पानी की तरह बहाया है। पश्चिम देश कई मुद्दों पर इस आयोजन के बाबत कतर को घेरते रहे हैं। इस आयोजन के दौरान करीब छत्तीस लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बात कही जा रही है। शराब पर सख्त प्रतिबंध भी पश्चिमी फुटबॉल प्रेमियों की चिंता का विषय रहा है। वहीं मानवाधिकार संगठन इस आयोजन के लिए निर्माण के दौरान भारत, पाक, नेपाल व बांग्लादेश के करीब साढ़े छह हजार प्रवासी श्रमिकों की मौत को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं। वहीं कतर ने इन आंकड़ों को गुमराह करने वाला बताया है। बहरहाल एशिया में फुटबॉल के जुनून के आगे क्रिकेट के दिन कुछ दिन फीके रहने वाले हैं। कोलकाता समेत शेष भारत भी इस जुनून में शामिल है।

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