झारखंड में करीब 25 दिन तक चले छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को विवादित कंपनी टीडीपीएल के संचालन में हुई जेपीएससी-14, जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। साथ ही घोषणा कर दी कि जेपीएससी 11 व 13 की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा परीक्षाओं के घोषित परिणाम भी रद्द करने का ऐलान कर दिया गया। यानी टीडीपीएल के माध्यम से जो भी अभ्यर्थी चुने गए, उनका चयन भी रद्द कर दिया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने सचिवालय में ग्यारह मंत्रियों के साथ इस मुद्दे पर व्यापक विमर्श किया। छात्र आंदोलन के दबाव में काम कर रही राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक करीब साढ़े चार घंटे तक चली। दरअसल, छात्रों के कई खेमे अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार जिन परीक्षाओं को रद्द किया गया,उनमें चौदहवीं जेपीएससी सिविल सेवा रेगुलर, जेपीएससी बैकलॉग 2023, जेपीएससी बैकलॉग 2025, फॉरेस्ट रेंज अफसर, सहायक वन संरक्षक और सिविल जूनियर आदि की नियुक्तियां शामिल हैं। दरअसल, इन परीक्षाओं का संचालन जेपीएससी के माध्यम से किया गया। वहीं दूसरी ओर सीजीएल परीक्षा से चयनित 1975 लोगों की नौकरियां भी अब समाप्त मानी जाएंगी। सरकार ने वायदा किया है कि वर्ष 2014 के बाद हुई सभी नियुक्ति परीक्षाओं की जांच भी की जाएगी। यह जांच कार्य एक न्यायिक आयोग करेगा। बाकायदा एक आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में सुधारों के लिये एक कमेटी भी बनायी गई है। हालांकि, कुछ आंदोलनकारी छात्र सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं। हालांकि, सरकार की घोषणा के बाद छात्रों का आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन इस घोषणा के बाद सचिवालय परिसर में उन नियुक्त प्रतिभागियों की भीड़ जुट गई, जो जेएसएससी के माध्यम से परीक्षा उतीर्ण करके नौकरी हासिल कर चुके थे। सरकार की घोषणा के तुरंत बाद विभिन्न चयनित प्रतिभागियों का हुजूम सचिवालय में जमा होना शुरू हुआ। उनके लिये यह खबर स्तब्ध करने वाली थी। उनका दुख और गुस्सा स्वाभाविक ही है।
बहरहाल, अब राज्य सरकार के खिलाफ झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में चयनित होने के बाद हटाये गए लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री एक बयान देकर दो हजार लोगों को सरकारी नौकरी से कैसे निकाल सकते हैं? वे इसे सरकारी अन्याय बता रहे हैं। उनकी दलील है कि हम सुबह नौकरी पर थे,लेकिन शाम होते ही हमें नौकरी से हटा दिया गया। उनका कहना था कि कोर्ट के आदेश के बाद ही हमें नौकरी मिली है। उल्लेखनीय है कि जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षा दिसंबर 2023 में आयोजित हुई थी। लेकिन पेपर लीक होने के बाद परीक्षा सितंबर 2024 में फिर से हुई। फिर पेपर लीक की आशंका के बीच मामला अदालत पहुंचा। कोर्ट के आदेश के बाद परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। साथ ही तीस दिसंबर को सफल प्रत्याशियों को बाकायदा नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र दे दिए गए। अब सरकार द्वारा ये नियुक्तियां रद्द करने से प्रतिभागी बदहवास हैं क्योंकि कई लोगों ने लोन लेकर अपना जीवन स्तर सुधारा, उनकी बैंक की किश्तें जा रही हैं। अब उनकी आंखों के सामने अंधेरा है। उनकी मांग है कि सरकार कायदे से जांच कर ले, लेकिन उन्हें नौकरी से न हटाए। सभी लोग धांधली से भर्ती नहीं हुए हैं। उनका तर्क है कि भीड़ के दबाव में निर्दोष लोगों को सजा नहीं दी जा सकती। हटाये गए कर्मचारियों की आंखें नम हैं। उनमें कई लोग ऐसे हैं जो अपनी दूसरी नौकरियां छोड़कर सरकारी नौकरी के प्रलोभन में आए। दुखी व हताश हटाये गए कर्मचारी बारिश में धरने पर बैठे रहे क्योंकि उन्हें अधिकारियों ने सचिवालय से बाहर कर दिया था। वहीं दूसरी ओर हटाए गए कर्मियों के घर वाले भी सदमे में हैं। राज्य सरकार भी मुश्किल में है क्योंकि सीबीआई जांच की मांग कर रहे छात्रों की दलील है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। वहीं सरकार के सामने हटाये गए अधिकारियों व कर्मचारियों का नया मोर्चा खुल गया है। हटाये गए कर्मचारी इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। वे सरकार के लिखित आदेश की प्रतीक्षा में हैं।

