भारत के संप्रभु राष्ट्र बनने के बाद से ही पाकिस्तान देश व भारतीय समाज को क्षति पहुंचाने के तमाम षड्यंत्र रचता और उन्हें अंजाम देने की हर कोशिश करता रहा है। शक्तिशाली सेना का मुकाबला न कर पाने पर वह छद्म युद्ध, आतंकवाद व नशे के जरिये भारत को चोट पहुंचाने की साजिश करता है। जब से पाक से लगती सीमा पर कड़ी सुरक्षा बढ़ी और पाक के संस्थागत सहयोग से सक्रिय तस्करों की आवाजाही बाधित हुई, उसने तकनीक व ड्रोन की मदद से नशे, नकली करेंसी व हथियार भेजने की साजिश को अंजाम देने शुरू किया। ड्रोन के जरिये लगातार नशे-हथियारों की तस्करी से पैदा खतरे के मद्देनजर, पाक सीमा से ड्रग्स व हथियार लाने वाले ड्रोनों को रोकने के लिये पंजाब में नई पहल हुई है। हवाई चेक प्वाइंट या ‘हवाई नाके, लगाने का यह फैसला,सुरक्षा के बदलते खतरे से निपटने का एक नया और असरदार तरीका साबित हो सकता है। निस्संदेह, तस्करी करने वाले अपराधी गिरोहों ने, कानून लागू करने वाली एजेंसियों से ज्यादा तेजी से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है। पाक द्वारा संस्थागत रूप से पोषित तस्करों की जगह जीपीएस-निर्देशित ड्रोनों का इस्तेमाल शुरू किया गया। ये ड्रोन भारतीय सीमा में निर्धारित जगहों में बहुत भीतर तक हेरोइन, हथियार और गोला-बारूद गिराने में सक्षम हैं। आसमान में उड़ने वाले दुश्मन के खिलाफ सामान्य चेक प्वाइंट कुछ नहीं कर पाते। यह सुरक्षा एजेंसियों व पुलिस के लिये बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि आज पंजाब ड्रोन के जरिये होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी का मुख्य केंद्र बन गया है। देश में ज्यादातर ड्रोन तस्करी की घटनाएं पाक से लगते पंजाब के सीमावर्ती जिलों में हुई हैं। दरअसल, ड्रग्स का कारोबार अब सिर्फ कानून-व्यवस्था की समस्या मात्र नहीं रह गया। आज यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। जिसके प्रकोप से असंख्य परिवार बर्बाद हो गए हैं।
यह एक बड़ी हकीकत है कि नशे का कारोबार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये भी एक बड़ा खतरा है। वास्तव में नशा तस्कर इन्हीं रास्तों का प्रयोग राष्ट्रविरोधी ताकतों को हथियार पहुंचाने और आतंकी नेटवर्क को फंडिग के लिये करते हैं। दरअसल, हवाई नाके का विचार, सिर्फ आपराधिक घटना के बाद होने वाली पुलिस कार्रवाई से हटकर, अपराध के होने से पहले होने वाली पुलिस कार्रवाई होगी। निश्चय ही यह स्वागत योग्य बदलाव है। अब सुरक्षा एजेंसियों व पुलिस की कोशिश होगी कि ड्रग्स की खेप जमीन पर पहुंचाने के बाद उसे बरामद करने के प्रयास करने की बजाय, पहले ही ड्रोनों की निगरानी की जाए। जिससे समय रहते ड्रोनों का पता लगाकर, उनके उड़ने के रास्ते को ट्रैक किया जा सके। साथ ही सामान गिराने की जगहों की पहचान के बाद नशीले पदार्थों व हथियारों की आपूर्ति करने के लिये इंतजार कर रहे स्थानीय लोगों को पकड़ा जा सके। सही मायने में खुफिया जानकारी,एंटी-ड्रोन सिस्टम तथा पंजाब पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स व केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ यह रणनीति तस्करों पर शिकंजा कसने में मददगार साबित हो सकती है। यह भी हकीकत है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तस्करी करने वाले गिरोह अपना नेटवर्क समय के साथ नई तकनीकों के जरिये बदलते रहते हैं। जिसके लिये वे बड़े ड्रोन, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और लगातार बदलती रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए नई तकनीक के साथ-साथ लगातार खुफिया जानकारी जुटाने तथा तस्करी करने वाले गिरोहों को खत्म करने के लिये निरंतर मजबूत फाइनेंशियल जांच जरूरी है। इसके अलावा इनके मददगार लोगों पर तेजी से कानूनी कार्रवाई करना भी जरूरी है। कोशिश हो कि नशे के खिलाफ अभियान में नागरिकों की सक्रिय भूमिका हो। इसके लिये सामाजिक स्तर पर रचनात्मक कार्यक्रम चलाकर नशे के विरुद्ध अभियान चलाना भी जरूरी है। जिसके तहत नशा छुड़ाने, नशा छोड़ने वालों का पुनर्वास करने तथा जागरूकता के लिये असरदार कार्यक्रम चलाने की भी जरूरत है। सही मायने में यदि ‘हवाई नाकों’ को पर्याप्त संसाधनों के साथ अमली-जामा पहनाया जाए, तो निश्चित तौर पर ये सीमा पार से होने वाली नशे की तस्करी पर अंकुश लगा सकते हैं।

