एक बार फिर बारह साल पुराने निर्भया कांड की पुनरावृत्ति हुई है। निर्भयाकांड में दिसंबर 2012 में 23 साल की युवती के साथ क्रूरता से गैंगरेप हुआ था, जिसकी बाद में सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद देश में व्यापक आक्रोश उभरा था। यौन हिंसा के खिलाफ कानून कठोर किए गए। इस कांड में साल 2020 में चार अपराधियों को फांसी की सजा दी गई थी। लेकिन सवाल यह है कि क्या सख्त कानून और कठोर सजाओं के बाद ऐसे अपराधों पर अंकुश लगा? दुखद है कि एक बार फिर निर्भयाकांड की पुनरावृत्ति हुई । अकेली नाबालिग लड़की, खाली बस और चलती बस में चालक-परिचालक द्वारा गैंग रेप। उ.प्र. की एक सोलह साल की लड़की किसी बात पर मां की डांट से क्षुब्ध हो घर छोड़कर अपने रिश्तेदार से मिलने नोयडा सेक्टर-63 के लिये चली। लेकिन रात के अंधेरे और बारिश के मौसम की गफलत में नोयडा के परी चौक पर उतर गई। सेक्टर-63 जाने के लिये उसने जिस बस को रुकवाया, उसमें बैठे दरिंदों ने बस के वहीं जाने की बात कहकर उसे बैठा लिया। पर्दे लगी स्लीपर बस में लड़की के बैठते ही परिचालक ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी। चालक-परिचालक ने दुराचार किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। करीब 47 किलोमीटर के सफर में उसके साथ यौन हिंसा हुई। अपराधी उसे कश्मीरी गेट के निकट रिंग रोड में छोड़कर फरार हो गए। किशोरी ने साहस दिखाते हुए रात ही में कश्मीरी गेट पुलिस को वारदात की सूचना दी। पुलिस ने इस मामले में टीम बनाकर पड़ताल की। बस की पहचान व रूट की जानकारी सीसीटीवी कैमरों के जरिये की गई। चालक-परिचालक को तिमारपुर की बस पार्किंग से गिरफ्तार किया गया। फोरेंसिक जांच के लिये बस को भी कब्जे में लिया गया है। लेकिन सवाल है कि चार अगस्त की घटना को पुलिस ने क्यों पर्दे में रखा? आखिर क्यों हादसे की सार्वजनिक जानकारी 31 अगस्त को मीडिया को दी गई?
वहीं दूसरी ओर इंसान के पतन की पराकाष्ठा दिल्ली के बवाना इलाके में सामने आई, जहां स्कूल बस चालक को नर्सरी की एक बच्ची का यौन उत्पीड़न करने पर गिरफ्तार किया गया है। घटना 19 अगस्त को सामने आई जब नर्सरी की छात्रा के परिजनों ने उसके निजी अंगों पर चोट के निशान देखे। बच्ची ने अपनी मां को स्कूल के एक गंदे अंकल के बारे में बताया जो उसे चॉकलेट देता था। परिजनों द्वारा पुलिस को सूचित करने के बाद बस चालक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। शुरुआती जांच के अनुसार बच्ची से चार बार यौन दुर्व्यवहार किया गया था। किसी सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली ये घटनाएं जहां समाज में भरोसे को तोड़ती हैं, वहीं कानून व्यवस्था के प्रश्न को भी उठाती हैं। इन मुद्दों पर राजनीति भी जमकर शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि डबल इंजन सरकार में दिल्ली रेप कैपिटल बनती जा रही है। इसके बावजूद कि दिल्ली में एक महिला मुख्यमंत्री हैं। वहीं कुछ राजनीतिक दल आरोप लगा रहे हैं कि जनता की सुरक्षा व अपराध रोकने के कार्य के बजाय पुलिस पर अन्य कार्यों का बोझ डाला जा रहा है। वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि पुलिस ने मामले की तह तक जाकर अपराधियों को समय रहते गिरफ्तार करके कानूनी कार्रवाई में तेजी दिखायी है। साथ ही लोगों से अपील की है कि वे जागरूक रहें और ऐसी घटनाओं की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। लेकिन मुख्य सवाल यह है कि भारत में यौन लिप्साओं के विस्फोट की असली वजह क्या है? क्यों किन्हीं कमजोर स्थितियों में महिला, लड़की व बच्ची की उम्र का भी लिहाज न कर, यौन हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है? हमारा समाज पतनोन्मुखी क्यों होता जा रहा है? क्या यौन अपराधों के मूल में मोबाइल में इंटरनेट के जरिये परोसी जा रही यौन उत्तेजक सामग्री है? देश के समाज विज्ञानियों को इस गंभीर प्रश्न पर मंथन करना होगा।

