हमारे तंत्र की नाकामी और परीक्षा तंत्र में भ्रष्टाचारियों की बढ़ती सेंध का ही नतीजा है कि पेपर लीक के बाद नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट परीक्षा 2026 रद्द कर दी गई। भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए तीन मई को परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें करीब पौने तेईस लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी। ये परीक्षाएं देश के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में 5400 केंद्रों पर आयोजित की गई थीं। दरअसल, पेपर लीक होने के आरोपों के बाद जांच एजेंसियों की सिफारिश पर परीक्षा रद्द की गई है। केंद्र सरकार ने कथित रूप से डेटा लीक और धांधली की व्यापक जांच के लिए सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कहा है कि व्यवस्था में विश्वास बहाली के लिए फिर से परीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। कहा जा रहा है कि एनटीए ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा साझा निष्कर्षों की प्रारंभिक जांच के आधार पर परीक्षा स्थगन का फैसला लिया। निस्संदेह, इस फैसले ने उन लाखों छात्रों को निराश ही किया है जो महीनों से परीक्षा की तैयारी में लगे थे। अब उन्हें नये सिरे से परीक्षा की तैयारी करनी होगी। नीट प्रवेश परीक्षा स्थगित किए जाने के बाद तमाम विपक्षी दलों ने एनटीए व केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोले हैं। कहा जा रहा है कि एनटीए में सुधार नहीं, अब पूरी संरचना बदलने की जरूरत है। एक संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा जा रहा है कि एनटीए के बुनियादी पुनर्गठन की जरूरत है। राजनेता पीपर लीक व प्रश्नपत्रों में गलती सामने आने को छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बता रहे हैं। साथ ही पूरी परीक्षा प्रणाली को बदलने की मांग की जा रही है। साथ ही एनटीए के उद्देश्य और कार्यक्षमता को लेकर शंका जतायी जा रही है।
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि एनटीए द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से पांच में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले उजागर हुए हैं। इनमें जेईई मेन्स 2025 उत्तर कुंजी के दोषपूर्ण होने पर प्रश्नपत्र में 12 प्रश्न वापस लेने पड़े थे। मांग है कि एनटीए को केंद्रीयकृत करने के बजाय संसद के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। वहीं एनटीए कह रहा है कि छात्रों को नया आवेदन नहीं करना होगा, न ही कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क लगेगा। यह भी कि एनटीए अपने संसाधनों का प्रयोग करके दोबारा परीक्षा आयोजित करेगी। साथ ही एनटीए ने परीक्षा में गड़बड़ी की जवाबदेही स्वीकारी है। दरअसल, आरोप है कि नीट का पेपर ‘क्वेश्चन बैंक’ के जरिये लीक किया गया, जिसमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी के तीन से ज्यादा सवाल थे। जिसमें आधे हूबहू परीक्षा में आए। आशंका है कि सोशल मीडिया के जरिये ये प्रश्नपत्र लाखों तक पहुंचे। हालांकि, इस मामले का खुलासा सीकर से हुआ, लेकिन कहते हैं कि पेपर पहले केरल से एक मई को आया और उसके तार नासिक से लेकर उत्तराखंड तक जुड़े थे। एनटीए ने कहा है कि सात मई की रात एक व्हिसलब्लोअर से उन्हें पेपर लीक की सूचना मिली। बताते हैं कि सीकर के एक पीजी संचालक ने पेपर लीक की सूचना पुलिस को दी। कालांतर में पेपर से जुड़ी ऑनलाइन चैट वायरल हो गई। एनटीए द्वारा जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने के बाद एक दर्जन से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए। यह विडंबना ही है कि भ्रष्टाचार के बाजार में लाखों छात्रों की मेहनत और सपने नीलाम हो रहे हैं। कुछ लोग लीक मामलों में राजनीतिक संरक्षण के भी आरोप लगा रहे हैं। तभी कई बार नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के बावजूद किसी को बड़ी सजा अब तक नहीं मिली है। यही वजह कि नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट में बदलने की मांग की जा रही है क्योकि पेन-पेपर मोड में पेपर लीक होने की ज्यादा आशंका रहती है। कंप्यूटर आधारित परीक्षा को सुरक्षित व पारदर्शी बताया जा रहा है। साथ ही पारदर्शी जांच व जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। सवाल स्टाफ की आउटसोर्सिंग को लेकर भी उठे हैं। परीक्षाएं हाइब्रिड परीक्षा मॉडल के साथ ऑनलाइन कराने की भी मांग है।

