आहत लोकतंत्र

कूचबिहार की हिंसा से उपजे सवाल

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चुनावी संग्राम का रणक्षेत्र बने पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान के बीच कूचबिहार में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत दुखद ही कही जायेगी, जिसको लेकर टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने हैं। एक-दूसरे पर आरोप लगाकर चुनाव आयोग से कार्रवाई करने की मांग की गई है। वहीं इस मुद्दे पर राजनीति रोकने के लिये चुनाव आयोग ने किसी भी राजनेता के 72 घंटे तक इलाके में जाने पर रोक लगा दी है। भाजपा जहां इसे दीदी की बौखलाहट बता रही है, वहीं टीएमसी केंद्र पर सुरक्षा बलों के दुरुपयोग की बात कर रही है। आरोप है कि कूचबिहार जिले के सीतलकूची इलाके के माथाभंगा में सीआईएसएफ के जवानों का स्थानीय लोगों द्वारा घेराव करने के बाद राइफल छीनने की कोशिश की गई। इससे पहले वोटिंग लाइन में खड़े पहली बार मतदान करने जा रहे युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भाजपा ने उसे अपना कार्यकर्ता बताया था। भाजपा के कूचबिहार से सांसद बूथ लूटने का प्रयास करने का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगाते हुए कहते हैं कि केंद्रीय बलों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। वहीं टीएमसी ने इस बाबत चुनाव आयोग से शिकायत करके अपने कार्यकर्ताओं के मारे जाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर भाजपा कह रही है कि पार्टी के पक्ष में जनसमर्थन देखकर टीएमसी में बौखलाहट है। आयोग ने मतदान केंद्र 126 का मतदान स्थगित किया है।

यह विडंबना ही है कि पिछले चार चरण के मतदान में वोटिंग तो खूब हुई लेकिन ममता सरकार के दस साल के कार्यकाल में विकास और रोजगार के मुद्दों की चर्चा होने के बजाय अनर्गल बयानबाजी और टीका-टिप्पणी खूब हुई। राइटर्स बिल्डिंग पर कब्जे की होड़ में इस चुनाव में तेजी से ध्रुवीकरण हुआ है। ममता बनर्जी से भी चुनाव आयोग ने अल्पसंख्यकों के बाबत दिये बयान के बाबत पूछताछ की है। वहीं नंदीग्राम के भाजपा प्रत्याशी पर भी सांप्रदायिक भाषण देने का आरोप लगा है। दरअसल, कूचबिहार में हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। गत छह अप्रैल को भी टीएमसी व भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं। सात अप्रैल को भाजपा के दिलीप घोष पर हमला हुआ था और आरोप टीएमसी पर लगा था। बताते हैं कि कूचबिहार में चुनाव से छह माह पूर्व राजनीतिक हिंसा में दर्जनभर मौतें हुई हैं, जिसके चलते स्थानीय लोगों में भय का माहौल व्याप्त है। दरअसल, पिछली बार कूचबिहार क्षेत्र के नौ विधानसभा क्षेत्रों में से टीएमसी ने आठ पर जीत हासिल की थी। लेकिन हाल के आक्रामक चुनाव प्रचार के जरिये कार्यकर्ताओं को जोड़कर इलाके में भाजपा ने अपनी बढ़त हासिल की है। ऐसे में टीएमसी की हताशा हिंसा के रूप में सामने आ रही है। इलाके में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कवायद भी तेज हुई है। यह इलाका पिचहत्तर फीसदी हिंदू बहुल है, जिसमें भाजपा सेंध लगा चुकी है। वह ममता पर लगातार मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगा अपने पक्ष में ध्रुवीकरण करती रही है।

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