निस्संदेह डिजिटल दौर के नशे में डूबी पीढ़ी वास्तविक रिश्तों से दूर होती जा रही है। वहीं दूसरी ओर छात्रों की लिखने की आदत भी छूटती जा रही है। लेखन हमारी मौलिक व सार्थक अभिव्यक्ति है और सेहत से भी जुड़ा है। पुरानी कहावत है—जिसके बहुत सारे दोस्त होते हैं उसका कोई दोस्त नहीं होता। कमोबेश मौजूदा दौर में हकीकत यही है कि जिनके सोशल मीडिया में हजारों-लाखों मित्र व फॉलोवर होते हैं वे निजी जीवन में नितांत एकाकी होते हैं। यह घातक प्रवृत्ति बच्चों में भी तेजी से घर कर रही है। लेखन में हमारी उंगलियों के पोर इस्तेमाल होते हैं, जिनके सिरे हमारे विभिन्न अंगों के स्वास्थ्य से गहरे तक जुड़े रहते हैं। कलम या पेन से लेखन हमारे बौद्धिक विकास में भी सहायक होता है। लेकिन आज मोबाइल व कंप्यूटर, लेपटॉप व टैबलेट के दौर में बच्चे लेखन से दूर होकर खुद को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त नहीं कर पाते। इस संकट को महसूस करते हुए सीबीएसई ने छात्रों को मित्रों से जुड़ाव व उनकी लेखन कला को निखारने के लिए अभिनव पहल की है। बोर्ड ने डाक विभाग के साथ मिलकर यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन ‘इंटरनेशनल लेटर राइटिंग कंपीटिशन-2026’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम आने वाले छात्र को पचास हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। साथ ही विजेता को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी दिया जाएगा। छात्रों को जो पत्र लिखने का विषय दिया गया है वह मौजूदा हालात में बेहद रोचक व उपयोगी है। छात्र को अपने दोस्त को पत्र लिखना है कि मौजूदा डिजिटल दौर में लोगों का आपसी जुड़ाव व बातचीत क्यों जरूरी है। दरअसल, इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों की सोच को विस्तार देना और उनकी लेखन कला को निखारना है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता को जीतने वाले प्रतिभागी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने पर छात्र को स्विट्ज़रलैंड के बर्न स्थित यूपीए हेड क्वार्टर का दौरा करने का अवसर मिल सकता है। इस प्रतियोगिता के प्रतिभागी नौ से पंद्रह साल के ही होने चाहिए। वे अपनी एंट्री अंग्रेजी व हिंदी में भी दे सकते हैं। प्रतिभागी अपने स्कूल के माध्यम से ही इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। निश्चित रूप से बच्चों में लिखने की घटती प्रवृत्ति के दौर में यह एक रचनात्मक प्रयास है। दरअसल, लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करते बच्चे न केवल रचनात्मक लेखन से वंचित हो रहे हैं, बल्कि अपने दोस्तों से भी कटते जा रहे हैं, जिसका असर उनकी याददाश्त व सृजन क्षमता पर भी पड़ रहा है। एक समय था बच्चे डायरी लेखन व स्कूलों में कविता व लेख लिखने को खासे उत्सुक होते थे। दोस्तों के साथ खेल के मैदान और घर पर खेलना उन्हें शारीरिक व मानसिक स्तर पर स्वस्थ रखता था। लेकिन आज बच्चे ऑनलाइन खेलों में इतने मस्त हो जाते हैं कि उन्हें अपने असली दोस्तों का ख्याल ही नहीं रहता। वे जीवन की वास्तविक चुनौतियों से दूर होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आज शारीरिक सक्रियता के अभाव के कारण बच्चे छोटी उम्र में ही वयस्कों जैसे रोगों के शिकार होते जा रहे हैं। ये रोग शारीरिक भी हैं और मानसिक भी हैं। छात्र अपना बचपन स्वाभाविक रूप से नहीं जी पा रहे हैं। सही मायनों में वे समय से पहले वयस्क होते जा रहे हैं। एक समय बच्चों की लेखन क्षमता पर विशेष ध्यान दिया जाता था। परीक्षा में बाकायदा सुंदर लेखन के अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं। लेकिन आज बच्चे इंटरनेट पर उपलब्ध शॉर्टकट के जरिये हर परीक्षा पास करना चाहते हैं। कट-पेस्ट संस्कृति ने उनकी मौलिक सोच व सृजनात्मकता को ग्रहण लगा दिया। अक्सर छात्र प्रतियोगात्मक परीक्षाओं व लेखन प्रतिस्पर्धाओं में ऑनलाइन माध्यमों व इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री को हेर-फेर के साथ प्रस्तुत करते देखे जा रहे हैं, जो उन्हें व्यावहारिक जीवन की प्रतिस्पर्धा में कमजोर बनाता है। ऐसे में सीबीएसई व पोस्टल विभाग की पहल अनुकरणीय व प्रशंसनीय है।

