किसानों की हरी झंडी

किसानों की हरी झंडी

अब दारोमदार केंद्र सरकार पर

आखिरकार कृषि सुधार कानूनों के विरोध में दो माह से आंदोलनरत किसानों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की पहल पर सोमवार से रेलवे ट्रैक खाली करने का फैसला किया है। साथ ही केंद्र को पंद्रह दिनों में किसानों की मांगों पर फैसला करने की शर्त रखते हुए फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। पंजाब के किसान संगठन लंबे समय से रेल यातायात ठप्प किये हुए थे, जिसके चलते राज्य के उद्योगों की आपूर्ति ही प्रभावित नहीं हुई बल्िक यात्रियों को भी गतिरोध से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। किसान मालगाड़ियां तो शुरू करने की बात कर रहे थे लेकिन यात्री ट्रेनों को रास्ता देने को तैयार नहीं थे। राज्य में उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर शनिवार को कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के साथ हुई बैठक में किसान नेताओं ने ट्रैक खाली करने की सशर्त सहमति दी थी। वहीं किसानों ने दिल्ली चलो आंदोलन को स्थगित करने से इनकार किया है। अनुमान है कोविड संकट तथा रेल यातायात ठप्प होने से पंजाब के उद्योगों को चालीस हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। यूरिया संकट पैदा होने के साथ ही कोयला खत्म होने से सभी थर्मल प्लांट बंद पड़े हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खरीदा गया चालीस लाख मीट्रिक टन अनाज पंजाब में फंसा पड़ा है। ये स्थितियां लंबी न खिंचें, इसके लिये गंभीर प्रयासों की जरूरत है। कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने किसानों को आश्वस्त किया है कि वे मांगें पूरी करवाने के लिये प्रयास करेंगे।

दरअसल, किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री से हुई बैठक में गन्ने की कीमत तय करने, पिछले बकाया का अविलंब भुगतान, धान खरीद केंद्र फिर आरंभ करने, कपास खरीद पर आढ़त किसानों से न लिये जाने तथा पराली जलाने पर दर्ज मामले रद्द करने जैसी मांगें रखीं। निस्संदेह अब केंद्र को मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए। इस बाबत किसान संगठनों की दो बार हुई बातचीत विफल हो गई थी। पहले कृषि सचिव से किसान संगठन मिले थे तो बैठक में मंत्रियों के न होने के कारण किसानों ने वार्ता बीच में छोड़ दी थी। वहीं इसी माह कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर व रेल मंत्री पीयूष गोयल से हुई बातचीत भी विफल रही। अब पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया है कि किसानों की सहमति के बाद पंजाब के आर्थिक हितों को देखते हुए रेल सेवायें तुरत बहाल की जायें। रेल मंत्रालय ने भी सकारात्मक प्रतिसाद दिया है  और रेल परिचालन के रखरखाव की जांच और निर्धारित प्रोटोकाल पूरा करने के उपरांत रेल यातायात सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। ऐसे वक्त में जब कुछ किसान संगठन, जो वार्ता में शामिल नहीं हुए  और आंदोलनरत हैं तथा बाकी किसान संगठनों ने पंद्रह दिन का अल्टीमेटम दिया है, केंद्र सरकार को इस दिशा में गंभीर पहल करनी चाहिए। यदि किसानों में नये सुधारों को लेकर कुछ आशंकाएं और असुरक्षा बोध हैं, तो उन्हें दूर किया जाना जरूरी है।

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