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एआई से दोस्ती

शिखर सम्मेलन से दुनिया में भारतीय दस्तक

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भारत ने बदलती वैश्विक हवा की दिशा-दशा को पहचानते हुए देश में जिस सबसे बड़ी एआई समिट आयोजित कराने का फैसला किया, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन की सार्थकता का पता इस बात से चलता है कि इसमें सौ बड़ी कंपनियों के सीईओ, बीस के करीब देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 135 देशों के प्रतिनिधि जुटने की बात कही जा रही है। हाल के वर्षों में, दुनिया के सबसे ज्यादा युवाओं के देश भारत में एआई को लेकर जिस तरह का उत्साह व जुनून देखने को मिल रहा है, उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में वो देश को दुनिया में एआई का हब बना ही देगा। वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण बात यह भी है कि एआई भारत में आम लोगों के जीवन में बदलाव की वाहक बने। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई भारत समेत दुनिया के देशों में आज सुशासन, विकास व नागरिक सेवाओं के बेहतर निस्तारण में कारगर भूमिका निभा रही है। यही वजह है कि ग्लोबल साउथ के देश हमारी ओर बड़ी उम्मीद से देख रहे हैं कि भारत द्वारा विकसित एआई के दिशा-निर्देश और नीतियां उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिये मददगार साबित होंगी। आज दुनिया में विकसित व धनी देश एआई को अपनी संकीर्ण आर्थिक व राजनीतिक हितों की पूर्ति का साधन बना रहे हैं, उससे गरीब व विकासशील देशों में असुरक्षाबोध पैदा हो रहा है। यह सुखद ही कि देश की राजधानी दिल्ली पांच दिन तक दुनिया में एआई कैपिटल बनी रहेगी। वहीं दूसरी ओर, 20 फरवरी तक भारत मंडपम में आयोजित की जा रही पांच दिवसीय इंडिया समिट में करीब तीन लाख लोगों का रजिस्ट्रेशन कराना, इस आयोजन की सार्थकता व सफलता को ही उजागर करता है। इसमें दो राय नहीं है कि हाल के वर्षों मे भारत ने खुद को एक एआई पाॅवर हाउस के रूप में विकसित करने का प्रयास किया है। साथ ही विशाल डाटा संसाधन के साथ ही एआई वर्क फोर्स को भी तैयार किया है।

निस्संदेह, इंडिया समिट तकनीकी क्रांति के बीच नई संभावनाओं को तलाशने की भारत की सकारात्मक पहल है। विश्वास किया जा रहा है कि इस सम्मेलन के जरिये भारत दुनिया में एआई को जवाबदेह, स्थायी और समावेशी तकनीक के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेगा। इसमें दो राय नहीं कि हाल के वर्षों में एआई की स्वीकार्यता व कारोबार तेजी से बढ़ा है। लेकिन विडंबना यह है कि तमाम धनी राष्ट्रों में इस तकनीक को अपना जिन्न बनाने की होड़ लगी है। जो कालांतर दुनिया में पहले से ही व्याप्त आर्थिक असमानता को और ही बढ़ाएगा। सही मायनों में दुनिया में समावेशी समाज बनाने और आर्थिक विषमता को दूर करने के लिये जरूरी है कि एआई का उपयोग लोकतांत्रिक तरीके से नैतिकतापूर्ण ढंग से किया जाए। विश्वास किया जाना चाहिए कि इंडिया समिट में दुनिया के देश एआई तकनीक के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी मंथन करेंगे। इस तथ्य से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि एआई तेजी से दुनिया में विस्तार तो पा रही है, मगर यह तकनीक मानव जीवन के लिये कई तरह के खतरे भी पैदा कर रही है। हाल के वर्षों में दुनिया में एआई के दुरुपयोग के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। जाहिर है इसके उपयोगकर्ताओं में इसको लेकर भरोसा कायम रहना चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि इंडिया समिट में एआई की विश्वसनीयता बनाने की दिशा में कोई सार्थक पहल होगी। जरूरी है कि एआई का कारोबार करने वाली कंपनियों की जवाबदेही भी तय की जाए। वहीं भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां श्रमप्रधान कार्य-संस्कृति रही है और फिलहाल बेरोजगारी का आंकड़ा बढ़ा है, वहां एआई नौकरी देने वाली हो, न कि नौकरी खाने वाली। एआई के विस्तार से परंपरागत नौकरियों पर संकट नहीं आना चाहिए। निस्संदेह, युवाओं के देश भारत में एआई के प्रति जागरूकता व जुनून पैदा करने के लिये युद्ध स्तर पर पहल की जानी चाहिए। ताकि आने वाले वर्षों में हम भारत को दुनिया का एआई हब बनते हुए देख सकें।

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