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जहरीले कारोबार पर नकेल

सात राज्यों की साझा पहल लाएगी रंग

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आज सिर्फ पंजाब-हरियाणा ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में भी नशीले पदार्थों का बढ़ता घातक कारोबार गंभीर संकट की आहट सुना रहा है। आये दिन विभिन्न राज्यों में नशीले पदार्थों की बड़ी-बड़ी खेप बरामद होना इस संकट की भयावह तस्वीर उकेरता है। अब वयस्क ही नहीं, किशोर भी नशे की चपेट में आ रहे हैं। फिर वे अपने नशे के लिए पैसा जुटाने को अपराध की गलियों से गुजरने में गुरेज नहीं करते। हाल ही के कुछ गंभीर अपराधों का खुलासा होने पर किशोरों ने स्वीकार किया कि वे नशे हेतु पैसा जुटाने के लिए अपराध करने निकले थे। कमोबेश, ऐसा ही संकट नकली दवाइयों की आपूर्ति का भी है। पिछले दिनों देश के कई राज्यों में घातक कफ सिरप पीने से कई बच्चे अपनी जान गंवा बैठे। इस आसन्न संकट को महसूस करते हुए नकली दवाइयों और मादक पदार्थों पर अंकुश लगाने के लिए सात राज्यों के ड्रग्स कंट्रोलरों, पुलिस और सीआईडी अधिकारियों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन चंडीगढ़ में आयोजित किया गया, जिसका मकसद इन अधिकारियों को एक मंच पर लाकर कार्रवाई को अधिक कारगर बनाना था। इस रणनीतिक महत्व के सेमिनार का आयोजन हरियाणा के खाद्य और औषधि प्रशासन ने किया था, जिसका मकसद सीमावर्ती राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना साझेदारी और तेज प्रवर्तन तंत्र विकसित करना था। यह स्वागत योग्य है कि देश में पहली बार सात राज्यों ने इस संकट को महसूस करते हुए इस दिशा में साझी पहल की। उल्लेखनीय है कि इस पहल में सीमावर्ती राज्यों पंजाब, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड व दिल्ली, महाराष्ट्र तथा हरियाणा के औषधि नियंत्रकों व वरिष्ठ अधिकारियों समेत 70 अधिकारियों ने भाग लिया। इन अधिकारियों ने अनुभव साझा करके भविष्य के लिए कारगर रणनीति को अंजाम देने पर गंभीर मंथन किया। बैठक में स्वीकार किया गया कि नशीले पदार्थों व नकली दवाइयों का कारोबार मात्र एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि इससे कई राष्ट्रीय मुद्दे भी जुड़े हैं।

इसमें दो राय नहीं कि देश के लिए घातक साबित हो रहे नशे के कारोबार पर अंकुश राज्यों के संयुक्त प्रयासों से ही संभव है। इसके लिए जरूरी है कि विभिन्न राज्यों के जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर इससे जुड़े डेटा साझा करने, पारदर्शी समन्वय और ‘एक टीम, एक रणनीति’ पर काम करें। साथ ही जरूरी है कि संबंधित अधिकारी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करें। इस दौरान सात राज्यों के अधिकारियों ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग रोकने व नकली दवाइयों पर रोक लगाने के लिए सहयोग करने पर सहमति जतायी। इस नई चुनौती के मुकाबले के लिए विशेष प्रशिक्षण और सात राज्यों के ड्रग कंट्रोलरों और पुलिस अधिकारियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति बनी। इसमें दो राय नहीं कि यह जहरीला कारोबार सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं है बल्कि विभिन्न राज्यों के बीच साझा चुनौती बना हुआ है, जिसका मुकाबल डेटा साझेदारी और पारदर्शी समन्वय से ही संभव है। खासकर सीमावर्ती राज्यों को तो अंतर्राष्ट्रीय व अंतरराज्यीय तस्करों से मुकाबले के लिए मिलकर काम करना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि चंडीगढ़ में आयोजित सेमिनार के निष्कर्ष राज्य व केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया ताकि साझी रणनीति तय की जा सके। दरअसल, हाल के दिनों में पंजाब व देश के समुद्री सीमा से जुड़े राज्यों में नशीले पदार्थों की जो बड़ी खेपें बरामद हुई हैं, उसने पूरे देश की चिंता बढ़ाई है। सवाल यह भी उठा है कि यदि नशीले पदार्थों की इतनी बड़ी मात्रा बरामद हुई है तो चोरी-छिपे कितनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ देश में पहुंच रहा होगा। पंजाब के सीमावर्ती जिलों में सीमा पार से ड्रोन के जरिये लगातार नशीले पदार्थ व हथियार भेजने के मामले प्रकाश में आए हैं। संकट का एक पहलू यह भी है कि सीमावर्ती जिलों में किशोरों को नशे की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पंजाब सरकार के विशेष अभियान के दौरान भी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी हुई है। अनेक तस्कर व दोहरी भूमिका निभाने वाले पुलिस कर्मियों तक भी कानून के हाथ पहुंचे हैं। लेकिन अभी भी इस दिशा में बहुत किया जाना बाकी है।

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