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सिडनी में खूनी खेल

नफरती आतंकी हमलों से लड़े दुनिया

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सिडनी में यहूदियों को निशाना बनाये जाने की घटना ने पहलगाम आतंकी हमले के जख्मों को हरा कर दिया। पहलगाम में भी आतंकियों ने लोगों को चुन-चुनकर मारा था। सिडनी के बॉन्डी बीच पर यहूदी समुदाय की सभा पर हुआ हमला हमें इस क्रूरता की याद दिलाता है कि आतंकवादी आम जीवन के केंद्र में, प्रार्थना स्थलों और सुकून देने वाले स्थलों को ही अपना निशाना बनाते हैं। यह हिंसा उस हनुक्का उत्सव के दौरान की गई, जो अंधकार के साम्राज्य को प्रकाश से पराजित करने का संकल्प दर्शाता है। इस मायने में यह हमला क्रूरता की हद दर्शाता है। दरअसल, आस्ट्रेलिया लंबे समय से इस विश्वास के चलते शांति का अहसास करता रहा है कि तमाम वैश्विक संघर्षों से बनायी गई उसकी दूरी, उसे सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन इस घटना के बाद उसका भ्रम टूटा है। अब जाकर उसे यह अहसास हुआ है कि आतंकवादी अपने घातक मसूंबों को अंजाम देने के लिये हमारे ऐसे ही विश्वासों को तोड़कर हमले करते हैं। बॉन्डी के हमले ने न केवल आस्ट्रेलिया के भ्रम को तोड़ा है बल्कि उसे अपनी सुरक्षा नीतियों में बदलाव को बाध्य किया है। जैसा कि अपरिहार्य है, आस्ट्रेलिया के अधिकारियों ने हमले को एक वैश्विक आतंकवाद के रूप में वर्गीकृत किया है। खासकर हिंसा के तौर-तरीके और वैचारिक मकसद को ध्यान में रखते हुए। यह वर्गीकरण इस बात को भी स्वीकार करता है कि हमला नफरत से प्रेरित हिंसा के एक व्यापक पैटर्न का हिस्सा था,जो दुनिया के तमाम देशों में देखा जा रहा है। इस आतंकी घटना के बाद यहूदी समुदाय में दुख के साथ-साथ आक्रोश भी उमड़ रहा है। खासकर इस बात को लेकर कि यहूदी समुदाय द्वारा लंबे समय से दी जा रही चेतावनी के बावजूद आस्ट्रेलिया में यहूदी विरोधी रवैये को गंभीरता से नहीं लिया गया। इस प्रवृत्ति पर पहले से ही सतर्क निगरानी रखी गई होती तो शायद बॉन्डी के हमले को टाला जा सकता।

निस्संदेह, आस्ट्रेलिया में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस तीखी और ध्रुवीकृत हो चली थी। हालांकि, यहां हुए अधिकांश विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन चरमपंथी विचारधारा का पोषण करने वाले मुट्ठीभर लोग भी घातक घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। यह हमला ऐसे मंसूबों की रोकथाम की सीमाओं को भी उजागर करता है। निस्संदेह, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से आंतकी नेटवर्क की निगरानी समय रहते की जा सकती है। वे सही वक्त पर ही न केवल आने वाले खतरों का आकलन कर सकती हैं बल्कि साजिशों को नाकाम भी कर सकती हैं। लेकिन एक विसंगति यह भी है कि सार्वजनिक स्थानों पर अकेले हमले करने वालों को रोकना कुछ कठिन जरूर होता है। जैसे कि इस मामले में देखने में आया है। फिर भी, इस भयावह घटना के बीच एक साहस देखने को भी मिला। एक बहादुर राहगीर ने एक हमलावर को निहत्था करने के लिये अपनी जान भी जोखिम में डाली। हालांकि, वह इस प्रयास में घायल हुआ, लेकिन वह कई लोगों की जान बचाने में कामयाब हुआ। पूरी दुनिया में उसके साहस के लिये प्रशंसा हो रही है। संकट की घड़ी में ऐसा साहस आतंकवादियों की कायरता पर करारा प्रहार होता है और इससे आतंकवादियों के मंसूबे धरे रह जाते हैं। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि घोर अंधकार के क्षणों में भी मानवता का अंत नहीं होता। निश्चित रूप से इस घटना के बाद आस्ट्रेलिया को सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके यहां रह रहे संवेदनशील समुदायों के लिये मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही समय रहते समाज में घृणा को बढ़ाने वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। ऐसे वक्त में जब हमास व इस्राइल के संघर्ष के बाद पूरी दुनिया में यहूदी विरोधी माहौल बनाया जा रहा है, तो इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर साझा लड़ाई लड़ने की जरूरत है। विश्व समुदाय को किसी धर्म या संप्रदाय के खिलाफ होने वाली आतंकी घटनाओं का मुकाबला मिलकर करने की जरूरत है। अन्यथा कट्टरपंथी तत्वों के हौसले बुलंद होते रहेंगे। इसके अलावा आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद, समर्थन व अन्य सहयोग देने वाले देशों पर भी शिकंजा कसने की जरूरत है।

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