निरंतर निरंकुश होते एआई को लेकर टेक दिग्गज और माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने जो कहा, दुनिया भर उससे सकते में है। बिल गेट्स आईटी के दिग्गज हैं और उनकी संवेदनशीलता की दुनिया में विशिष्ट पहचान है। उन्होंने चेताया है कि एआई तकनीक यदि गलत हाथों में गई तो करोड़ों मौतों की वजह बन सकती है। उनका कथन है कि मानवता के इतिहास में एआई एडवांस टूल जैसा घातक हथियार पहले नहीं बना। एक अमेरिकी चैनल से बातचीत में गेट्स ने एआई के आसन्न खतरे को लेकर आशंका जताते हुए इसके नियमन के लिये कानून बनाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि बिल गेट्स की यह चेतावनी ऐसे वक्त में आई है जब एआई की दिग्गज कंपनियाें ओपन-एआई और एंथ्रोपिक के एआई एजेंट्स बेकाबू हो रहे हैं। पिछले दिनों आस्ट्रेलिया ने कड़ा प्रतिवाद किया कि ओपन-एआई के एजेंट्स ने उनकी स्वास्थ्य सेवाओं की वेबसाइट हैक कर ली थी। इतना ही नहीं, महीनों तक कंपनी इस बात की जानकारी आस्ट्रेलिया सरकार को नहीं दे पायी। इससे भी बढ़कर एआई एजेंट्स खुद अमेरिका के लिये भी तब भस्मासुर साबित हुए, जब ओपन-एआई के एजेंट्स ने अमेरिकी सरकार की वेबसाइट्स पर भी हमला बोला। इतना ही नहीं, उसने वेबसाइट्स पर हमला किया और जानकारी सार्वजनिक कर दी। यही वजह है कि एबीसी न्यूज के एक कार्यक्रम में बिल गेट्स को चेताना पड़ा कि घातक इरादे रखने वाले अपराधी इसके जरिये तबाही ला सकते हैं। इस आशंका की पुष्टि इस बात से होती है कि स्वयं एंथ्रोपिक बता चुकी है कि यमन के चरमपंथियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों के संचालन, नियंत्रण और नेविगेशन सॉफ्टवेयर बनाने के लिये क्लॉड एआई का प्रयोग करने का प्रयास किया था। एआई की अग्रणी कंपनी ओपन-एआई ने स्वीकारा है कि उसके एआई मॉडलों ने ऐसे कदम उठाये हैं, जो कंपनी की इच्छा के विपरीत थे।
आज ओपन-एआई समेत दुनिया की तमाम दिग्गज एआई कंपनियों के सूत्रधार मान रहे हैं कि दुनिया के सभी देशों को मिलकर इस तकनीक के सुरक्षा मानकों का निर्धारण करना चाहिए। जिससे लगातार ताकतवर होते एआई पर नियंत्रण रखा जा सके। हाल के दिनों में एआई एजेंट्स के खुद ही वेबसाइट्स को शिकार बनाने और दुनिया में अशांति के वाहक चरमपंथी गुटों द्वारा मिसाइल सॉफ्टवेयर में एआई के इस्तेमाल की खबरों ने तमाम आशंकाएं पैदा कर दी हैं। निस्संदेह, ऐसे हालात में एआई के तीव्र गति से हो रहे विकास को निर्माता कंपनियों के सेल्फ-रेगुलेशन के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। जानकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाॅल्ड ट्रंप की इन आशंकाओं को बेबुनियाद बताते हैं कि एआई के नियमन से इसकी विकास की रफ्तार धीमी होगी। विडंबना यह है कि खुद ट्रंप ही एआई नियमन से जुड़े कानून बनाने का विरोध कर रहे हैं। उनकी आशंका है कि ऐसा करने से चीन एआई की दौड़ में आगे निकल जाएगा। जबकि बिल गेट्स ही नहीं, दुनिया की दिग्गज एआई कंपनियों ओपन-एआई और एंथ्रोपिक के सूत्रधार भी इसको लेकर वैश्विक सुरक्षा मानकों की वकालत कर रहे हैं। निस्संदेह, हाल ही में एआई एजेंट की आस्ट्रेलिया के हेल्थ पोर्टल को हैक करने की कोशिश के बाद भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसे वक्त में जब एआई अपनी तय की गई सीमाओं से आगे निकल रहा है, तो आशंका बढ़ रही है कि कहीं करोड़ों भारतीयों की आर्थिक सुरक्षा खतरे में तो नहीं पड़ जाएगी? आज करोड़ों भारतीय बैंकिंग,पेमेंट, सरकारी सेवाओं, हेल्थकेयर आदि तमाम जरूरतों के लिये डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हैं। कुछ प्लेटफॉर्म हजारों सरकारी सेवाओं को एक साथ लाते हैं। ऐसे में एक कड़ी की कमजोरी से बड़ा नुकसान हो सकता है। जिसके लिये भारत को अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से विचार करना होगा। आशंका व्यक्त की जा रही है कि एआई की मदद से साइबर अपराधी साइबर हमलों को तेज और अधिक जटिल बना सकते हैं। इन तमाम आशंकाओं के बावजूद एआई का प्रयोग बंद नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन इसकी विवेकशील सीमाएं तय करने की जरूरत है। निस्संदेह,किसी भी इनोवेशन को इंसान द्वारा तय की गई सीमा के भीतर ही काम करना चाहिए।

