संतुलन की कवायद

गहलोत सरकार का पहला मंत्रिमंडल फेरबदल

संतुलन की कवायद

अगले महीने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रहे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब कुछ नये चेहरों के साथ सरकार चलाएंगे। गहलोत मंत्रिमंडल में यह पहला फेरबदल है। इस फेरबदल में 15 नये मंत्री शामिल किए गए हैं। राजभवन में राज्यपाल कलराज मिश्र ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें से 11 विधायकों ने कैबिनेट व चार ने राज्यमंत्री की शपथ ली। इससे पहले मुख्यमंत्री ने शनिवार को मंत्रिमंडल पुनर्गठन के लिए सभी मंत्रियों से इस्तीफे ले लिए थे। नये चेहरों में सचिन पायलट के पांच करीबी शामिल हैं। पायलट गुट के हेमाराम चौधरी ने सबसे पहले कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। मंत्रिमंडल फेरबदल में सबको साधने की कवायद का ही एक रूप यह भी दिखा कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रत्येक विधायक का नाम स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उद्घोषित किया और उन्हें मंच पर आमंत्रित किया। इस दौरान मंत्री पद की शपथ ले रहे प्रत्येक विधायक के समर्थकों ने जोरदार नारे भी लगाए। पिछले साल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावती रुख अपनाए जाने के समय हटाए गए विश्वेंद्र सिंह व रमेश मीणा को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से कांग्रेस में आए छह विधायकों में से राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री बनाया गया है। गहलोत मंत्रिमंडल का कोटा पूरा हो गया। अब चर्चा है कि 15 विधायकों को संसदीय सचिव व सात को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया जाएगा।

बेशक यह कहा गया कि ताजा फेरबदल में सभी को समान प्रतिनिधित्व दिया गया है, लेकिन गहलोत की चुनौतियां बरकरार हैं। टीकाराम जूली को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाए जाने का विरोध करते हुए कांग्रेस के ही एक विधायक ने शपथ ग्रहण समारोह से पहले इस्तीफे की धमकी तक दे दी थी, वहीं बसपा से कांग्रेस में आए कुछ नेताओं ने भी इस फेरबदल पर असंतोष जाहिर किया। हालांकि गहलोत के लिए यह राहत की बात होगी कि राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने फेरबदल पर संतोष जताया है। शपथ ग्रहण से कुछ घंटे पहले उन्होंने कहा कि जो कुछ कमियां थी, उन्हें दूर किया गया है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि जो मुद्दे उठाए गए थे, उनका संज्ञान लिया गया है। गौरतलब है कि पायलट एवं उनके समर्थक 18 विधायकों ने पिछले साल मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावती रुख अपना लिया था। तब पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप से मामला सुलझा। तभी से पायलट एवं उनके समर्थक मंत्रिमंडल में फेरबदल एवं राजनीतिक नियुक्तियां किए जाने की मांग उठा रहे थे। अपनों के ही बगावती तेवरों से डगमगाती दिख रही गहलोत सरकार अब स्थिर है। राज्य के विकास के लिए तो यह अच्छी खबर है ही, कांग्रेस के लिए भी राहत की बात है। 

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