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प्रेम-विवाह पर राजी

मां-बाप की सहमति तो न होगा विरोध

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बदलते वक्त की धारा में युवाओं में बढ़ते प्रेम विवाह के रुझान को देखते हुए अब तक कठोर रही खापों ने भी रुख बदला है। जैसे कह रहे हों कि यदि मां-बाप राजी तो क्या करेगा काजी। पिछले महीने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के गांव सोरम में देशभर की खाप पंचायतें तीन दिन तक जुटीं। जिसमें हरियाणा, पंजाब, उ.प्र., उत्तराखंड, एमपी, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान आदि की विभिन्न जाति-धर्मों की 36 खाप बिरादरियों के प्रतिनिधि जुटे। रोचक यह है कि एक लाख से अधिक भागीदारों में आधे करीब 20-35 वर्ष के युवा थे। वजह यह भी थी कि खापों की सख्ती से बड़ी संख्या में युवाओं की शादी नहीं हो पा रही है। हालांकि, इस पंचायत में मौजूदा सामाजिक चुनौतियों मसलन इज्जत के नाम पर होने वाली हत्याएं, दहेज,भ्रूण-हत्या,मृत्यु-भोज जैसी कुरीतियों पर व्यापक विमर्श हुआ, लेकिन प्रेम विवाह का मुद्दा मुखरता से छाया रहा। महत्वपूर्ण बात यह रही कि सर्वखाप ने तय किया कि यदि माता-पिता की सहमति से प्रेम विवाह होता है तो खाप हस्तक्षेप नहीं करेगी। सर्वखाप पंचायत में देश की सबसे बड़ी बालियान खाप के प्रधान नरेश टिकैत का कहना था कि यहां इतने ज्यादा लोग इसलिए जुटे हैं कि मुद्दे कोई राजनीतिक या किसानों के न होकर, प्रेम-विवाह, अंतरजातीय विवाह शुरू करने, दहेज न लेने, मृत्युभोज बंद करने जैसे ज्वलंत विषयों से जुड़े रहे। आम राय रही है कि जिस विवाह को लेकर मां-बाप की सहमति होगी, उसमें समाज, रिश्तेदार अथवा खाप हस्तक्षेप नहीं करेगी।

दरअसल, खापों के रवैये में लचीलापन आने की एक बड़ी वजह यह रही है कि युवा तेजी से प्रेम विवाह की तरफ उन्मुख हैं। लेकिन जहां ऐसा करने में सख्ताई है वहां बड़ी संख्या में युवा कुंआरे बने हुए हैं। हरियाणा, उ.प्र व एनसीआर के कई गांवों में सैकड़ों की कुंआरों की फौज खड़ी हैं। अब यह सोच बन रही है कि प्रेम विवाहों से समाज की कई बुराइयां व मुश्किलें भी कम हो रही हैं। बदलते वक्त के साथ परंपरागत शादियों में अलगाव, तलाक व टकराव के मामले हालिया सालों में बढ़े हैं। कई नेताओं में इस बात को लेकर सहमति बनाने की कोशिश हुई कि जिन जातियों में घड़ा व हुक्का-पानी एक है, उनमें शादियों की शुरुआत होनी चाहिए। समान कद वाली जातियों में भी शादी की बात छेड़ी गई, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बनी। साथ ही समान गोत्र की खेतिहर जातियों में भी विवाह पर विचार हुआ। कई लोग उदाहरण देते रहे कि जाटों के सबसे बड़े नेता रहे चौधरी चरण सिंह ने अपनी तीन बेटियों व बेटे की अंतरजातीय शादी की। बताया जा रहा है कि जातीय अस्मिता और किसान संस्कृति की ध्वजवाहक जाट बिरादरी में विवाह से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर मंथन चल रहा है। वहीं दूसरी ओर कई खापों के नेता इस बात को नकारते दिखे कि डीएनए मिक्सिंग से आने वाली पीढ़ियां कमजोर होती हैं। तर्क दिया गया कि शरीर विज्ञान से जुड़ा कोई शोध-अनुसंधान इस बात की पुष्टि नहीं करता। बहरहाल, खापों की सकारात्मक सोच युवाओं के लिये नई उम्मीद लेकर आई है।

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