विदेश में चमकदार करियर, डॉलर-पाउंड में तनख्वाह, सोशल मीडिया पर लग्जरी लाइफ की तस्वीरें और सिर्फ 15 दिन में वीजा का वादा। उत्तर भारत के हजारों युवाओं के लिए यह सिर्फ सपना नहीं, बल्कि जीवन बदल देने वाली उम्मीद बन चुका है। लेकिन इन उम्मीदों के बाजार में ठगी का अंधेरा भी तेजी से फैल रहा है। पिछले तीन वर्षों में पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से विदेशी नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी की 291 शिकायतें दर्ज हुई हैं।
इनमें से 154 यानी 53 प्रतिशत मामले अकेले पंजाब से हैं। विदेश मंत्रालय के डाटा से साफ है कि युवाओं की महत्वाकांक्षा को निशाना बनाकर संगठित नेटवर्क काम कर रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 2023 में 56, 2024 में 18 और 2025 में 80 शिकायतें दर्ज हुईं। तीन साल में कुल 154 मामले सामने आए। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन गिरोहों का पंजाब आसान निशाना है। चंडीगढ़ में 2023 में 3, 2024 में 9 और 2025 में 80 शिकायतें दर्ज हुईं। हरियाणा में 2023 में 4, 2024 में 2 व 2025 में 33 और हिमाचल में 2023 में 4 और 2025 में 2 शिकायतें सामने आईं।
शिकायत दर्ज, पर सजा मुश्किल : पंजाब में 2024 में 38 और 2025 में 69 एफआईआर दर्ज हुईं। चंडीगढ़ में 2025 में 37 मामले दर्ज हुए। हरियाणा में 2025 में 15 एफआईआर हुईं। हिमाचल में 2023 और 2025 में एक-एक एफआईआर हुई। हालांकि अभियोजन स्वीकृति बेहद कम रही। हरियाणा में 2024 में केवल एक मामले को स्वीकृति मिली, जबकि बाकी राज्यों में तीन साल के दौरान कोई उल्लेखनीय स्वीकृति नहीं हुई। विदेश मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि किसी भी एजेंट की वैधता ई-माइग्रेट पोर्टल पर जांचे बिना पैसे न दें।
सोशल मीडिया बना ‘डिजिटल दलालों’ का अड्डा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ठगी के ज्यादातर अभियान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चलाए जाते हैं। 100 प्रतिशत वीजा गारंटी, बिना आईएलटीएस नौकरी, 15 दिन में वर्क परमिट जैसे आकर्षक विज्ञापन युवाओं को जाल में फंसा लेते हैं। युवाओं की जल्दी सफलता पाने की चाह और परिवारों का सामाजिक दबाव इन गिरोहों को और ताकत देता है।
कानून सख्त, लेकिन पकड़ ढीली
इमीग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 10 के तहत कोई भी एजेंसी बिना वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र के भर्ती एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकती। यह प्रमाणपत्र ‘प्रोटेक्टर जनरल ऑफ इमीग्रेंट्स’ द्वारा जारी किया जाता है। फिर भी, जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक हैं। जनवरी 2026 तक 3505 अपंजीकृत एजेंटों की सूची ई-माइग्रेट पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। लोकसभा के हालिया बजट सत्र में भी यह मुद्दा उठा।

