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दिल्ली से पहले हरियाणा में ही निर्मल होगी यमुना की धारा

राज्यपाल के अभिभाषण में दिखा नायब सरकार का विजन

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सीएम सैनी की फाइल फोटो।
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यमुना के पानी को लेकर सियासत भले ही गरम हो, लेकिन हरियाणा ने अब इसे सीधे फैसलों की मेज पर रख दिया है। सरकार ने ऐलान किया है कि दिल्ली की सीमा तक पहुंचने से पहले यमुना का पानी सुधरी गुणवत्ता के साथ बहे। इसके लिए मार्च 2028 की ठोस समयसीमा तय कर दी गई है। राज्यपाल प्रो़ असीम कुमार घोष ने शुक्रवार को विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत में अपने अभिभाषण में नायब सरकार के इस विजन को प्रदेश के सामने रखा।

सरकार ने दो-टूक कहा है कि निर्णय केवल इरादों तक सीमित नहीं है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए आठ कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) जमीन पर उतारने, औद्योगिक अपशिष्ट पर सख्ती और सीवेज के पूर्ण उपचार की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर दी गई है। यानी अब सवाल ‘क्या होगा’ का नहीं, बल्कि ‘कितनी तेजी से होगा’ का है। चूंकि सरकार ने संकेत दिया है कि यमुना सफाई मिशन प्रशासनिक प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा गया है। हरियाणा में यमुना करीब 180 किलोमीटर बहती है और दिल्ली से निकलने के बाद फिर 70 किलोमीटर राज्य की सीमा में रहती है। यानी नदी की सेहत में हरियाणा की भूमिका निर्णायक है। इसी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए ‘यमुना एक्शन प्लान’ के तहत औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू सीवेज को ट्रीट करने की व्यापक कार्ययोजना बनाई गई है। सरकार मार्च 2028 तक 146 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले 8 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) स्थापित करेगी। ये प्लांट औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शुद्ध करेंगे। इसके अलावा 622 एमएलडी क्षमता के 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जाएंगे, ताकि शहरों और कस्बों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदी में न जाए। अभिभाषण में स्पष्ट किया कि यमुना को प्रदूषणमुक्त करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने एसवाईएल के निर्माण के प्रति भी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे राज्य लंबे समय से अपने जल अधिकारों से जोड़कर देखता है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रोत्साहन राशि 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है।

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रेल कॉरिडोर’बनेगा इकोनॉमी का रिंग रोड
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करीब 11607 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हरियाणा आॅर्बिटल रेल कॉरिडोर राज्य की लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्षमता को नयी रफ्तार देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के चारों ओर एक ‘रेल रिंग’ की तरह काम करेगा, जिससे मालगाड़ियों को दिल्ली के भीतरी नेटवर्क में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा। पातली-मानेसर प्राथमिक सेक्शन पहले ही मालगाड़ियों के लिए खोल दिया गया है। पूरा प्रोजेक्ट जून 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे औद्योगिक क्लस्टरों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, माल ढुलाई की लागत घटेगी और ट्रैफिक दबाव कम होगा।

सड़कें चौड़ी, कनेक्टिविटी मजबूत

पर्यावरण एजेंडे के साथ-साथ बुनियादी ढांचे का विस्तार भी समानांतर चलेगा। राज्य की सभी 12 फुट चौड़ी सड़कों को 18 फुट चौड़ा किया जाएगा। मार्च 2026 तक 1275 किलोमीटर सड़कें चौड़ी करने का लक्ष्य है, जबकि शेष 2225 किलोमीटर का काम मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। शहरी परिवहन को अपग्रेड करने के लिए पानीपत में इलेक्ट्रिक बस डिपो तैयार हो चुका है। यमुनानगर-जगाधरी में 31 मार्च तक डिपो बन जाएगा। गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित 10 शहरों में 650 स्टैंडर्ड फ्लोर एसी बसें शुरू होंगी।

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