नये साल का स्वागत अगर घर में बने पारंपरिक व स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ किया जाये तो इस अवसर की खुशियां और बढ़ जाती हैं। ऐसे भोजन में अपनापन होता है। वहीं नए-नए व्यंजनों की खुशबू पूरे घर में बिखरेगी। देश के अलग-अलग राज्यों के मशहूर व्यंजनों का स्वाद लेना इस उत्सव को और रंगीन बना देगा। खासकर, रात के समय इन व्यंजनों का सेवन बेहतर हैं।
नए साल के स्वागत को लेकर हर तरफ उत्साह और उल्लास का माहौल है। कोई दोस्तों के साथ पार्टी की तैयारी में जुटा है, तो कहीं परिवार के साथ घर पर ही जश्न मनाने की योजनाएं बन रही हैं। ऐसे में रसोई भी उत्सव का केंद्र बन जाती है, जहां नए-नए व्यंजनों की खुशबू पूरे घर को साल के पहले दिन ही खास बना देती है। त्योहार हो या नववर्ष, भारतीय परंपरा में स्वाद और पकवान सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार है और अपनापन व खुशियां बांटने का माध्यम है।
नववर्ष के मौके पर देश के अलग-अलग राज्यों के मशहूर व्यंजनों का स्वाद लेना इस उत्सव को और रंगीन बना देता है। कहीं पंजाब का सरसों का साग और मक्के की रोटी, तो कहीं राजस्थान की दाल-बाटी। रात के भोजन के लिए देश के अलग-अलग राज्यों की रसोई में ऐसे कई व्यंजन हैं।
पंजाब का स्वैग- साग और मक्के की रोटी
पंजाब में सर्दियों का यह व्यंजन केवल भोजन नहीं बल्कि खेत, मौसम और मेहनतकश जीवन का प्रतीक है।
क्या चाहिए: 500 ग्राम सरसों के पत्ते, 100 ग्राम पालक, 50 ग्राम बथुआ, दो हरी मिर्च, एक इंच अदरक, दो बड़े चम्मच मक्के का आटा, नमक और एक चम्मच घी। तड़के के लिए थोड़ा सा घी, लहसुन की कलियां, लाल मिर्च, रोटी के लिए दो कप मक्के का आटा।
कैसे बनाएं: सभी हरी पत्तेदार सब्जियों को अच्छी तरह धोकर मोटा-मोटा काट लें और कुकर में नमक, अदरक व हरी मिर्च के साथ उबाल लें। पकने के बाद इन्हें मथकर दरदरा कर लें और उसमें मक्के का आटा डालकर धीमी आंच पर पकाएं। ऊपर से घी में लहसुन और लाल मिर्च का तड़का लगाएं। मक्के की रोटी के लिए आटे को गुनगुने पानी से सख्त गूंथकर थपथपाकर रोटियां बनाएं। इनको तवे पर अलट-पलट कर सेंकें। रात के भोजन का यह संयोजन स्वाद और संतुलन बनाए रखता है।
राजस्थान री आत्मा - दाल-बाटी
राजस्थान में सीमित संसाधनों से बने व्यंजन आज पूरे देश की पहचान बन चुके हैं। दाल-बाटी उसी परंपरा का प्रतीक है, जो स्वाद, पोषण और टिकाऊपन तीनों का मेल है।
क्या चाहिए: दाल के लिए एक-एक चौथाई कप तुअर, चना और मूंग दाल, आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच धनिया पाउडर, थोड़ा लाल मिर्च पाउडर, नमक व दो चम्मच घी। बाटी के लिए दो कप गेहूं आटा, आधा कप सूजी, आधा कप घी।
कैसे बनाएं: तीनों दालों को मिलाकर कुकर में मसालों के साथ गला लें। ऊपर से घी डालकर स्वाद बढ़ाया जाता है। बाटी के लिए आटे, सूजी और घी को मिलाकर सख्त आटा गूंथ लें। फिर गोल-गोल लोइयां बनाकर ओवन या कढ़ाही में धीमी आंच पर सुनहरी होने तक पकाएं। बाटियों को घी में डुबोकर दाल के साथ सर्व करें।
बिहार का सादा स्वाद - चोखा-भात
बिहार की ग्रामीण रसोई में चोखा-भात व्यंजन बिना अधिक मसालों के भी स्वाद और पोषण का संतुलन बनाता है।
क्या चाहिए: चोखा के लिए दो बड़े बैंगन, दो टमाटर, एक उबला आलू, एक छोटा प्याज, हरी मिर्च, सरसों का तेल, नमक और हरा धनिया। भात के लिए चावल और पानी।
कैसे बनाएं: बैंगन और टमाटर को सीधे आंच पर भूनकर छिलका उतार लें। फिर इन्हें आलू, प्याज, नमक, सरसों तेल और मिर्च के साथ मसलकर चोखा तैयार करें। चावल उबालकर इसके साथ परोसें। रात में यह भोजन हल्का होता है।
तमिलनाडु की परंपरा - सांभर-सादम
दक्षिण भारत में रात के भोजन में सांभर-सादम एक संतुलित और स्वादिष्ट विकल्प है। इसमें दाल, सब्जी और चावल तीनों का मेल होता है।
क्या चाहिए: एक कप अरहर दाल, एक कप चावल, सांभर पाउडर, इमली का पानी, मिश्रित सब्ज़ियां जैसे लौकी, गाजर, सहजन, नमक, हल्दी और तड़के के लिए राई, करी पत्ता व सूखी मिर्च।
कैसे बनाएं: दाल और चावल अलग-अलग पकाएं। कढ़ाही में सब्जियां उबालकर उसमें इमली का पानी और मसाले डालें। फिर पकी दाल मिलाकर उबाल आने दें। तड़का लगाकर इसे चावल के साथ परोसें।
कर्नाटक की पहचान - बिसी बेले भात
कर्नाटक में बिसी बेले भात एक संपूर्ण और संतुलित भोजन माना जाता है। इसमें दाल, चावल और सब्जियों का मेल होता है।
क्या चाहिए: एक कप चावल, आधा कप तुअर दाल, एक कप कटी हुई मिक्स सब्ज़ियां (गाजर, बीन्स, मटर, कद्दू), दो बड़े चम्मच इमली का पानी, तीन बड़े चम्मच बिसी बेले भात मसाला, छोटा चम्मच हल्दी, नमक, दो बड़े चम्मच घी, राई, करी पत्ता, सूखी लाल मिर्च।
कैसे बनाएं: सबसे पहले चावल और दाल को अलग-अलग या साथ में कुकर में नरम होने तक पकाएं। दूसरी ओर कढ़ाही में घी गरम कर राई, करी पत्ता और लाल मिर्च का तड़का लगाएं। इसमें सब्जियां डालकर हल्का भूनने के बाद हल्दी व नमक मिलाएं। अब पकी हुई दाल-चावल डालकर मिलाएं। इसके बाद इमली का पानी और बिसी बेले भात मसाला डालकर धीमी आंच पर 10–15 मिनट पकाएं। थोड़ा घी ऊपर से डालने पर इसकी खुशबू और स्वाद दोनों निखर जाते हैं। इसे रात में गरमागरम परोसा जा सकता है।
-लेखिका खानपान मामलों की यूट्यूबर हैं।
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