Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

सतर्कता में ही सुरक्षा यौन रोगों से

यौन रोगों और संक्रमण की सबसे बड़ी वजह लापरवाही ही होती है। असुरक्षित संबंधों व जागरुकता की कमी से भी ये रोग फैलते हैं। दुनिया में सालाना करोड़ों लोग यौन जनित संक्रमण (एसटीडी) से ग्रसित होते हैं। रोगग्रस्त व्यक्ति अपने...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

यौन रोगों और संक्रमण की सबसे बड़ी वजह लापरवाही ही होती है। असुरक्षित संबंधों व जागरुकता की कमी से भी ये रोग फैलते हैं। दुनिया में सालाना करोड़ों लोग यौन जनित संक्रमण (एसटीडी) से ग्रसित होते हैं। रोगग्रस्त व्यक्ति अपने पार्टनर को संक्रमित कर सकता है। हेपेटाइटिस, एड्स व एचपीवी जैसे गंभीर रोग भी इनमें शामिल हैं। यौन रोगों के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिये।

भारत में यौन जनित संक्रमण (एसटीडी) से हर साल लगभग 3.5 करोड़ लोग ग्रसित होते हैं। अमेरिका में यह संख्या 6.5 करोड़ से भी ज्यादा है। हर साल लगभग 1.9 करोड़ से ज्यादा नए मरीज यौन रोगों यानी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज़ से ग्रसित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि हर साल दुनियाभर में सेक्सुअल ट्रांसमिटेड टीवी इंफेक्शन (एसटीआई) से 10 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं।

एसटीडी एक आम बीमारी है जो यौन संपर्क के दौरान होने वाले संक्रमण से होती है। यानी कि संबंधों की प्रक्रिया के दौरान यौन रोग,एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं। हालांकि इसका मतलब यह भी नहीं है कि स्त्री और पुरुष के बीच बनने वाले संबंधों से एसटीडी की ही बीमारियां फैलती हैं। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को एसडीटी की बीमारी है तो वह अपने पार्टनर को संक्रमित कर सकता है। इसके अलावा,असुरक्षित यौन संबंध और समुचित जानकारी का अभाव यौन रोगों की सबसे बड़ी वजह बनते हैं। स्त्रियों और पुरुषों में सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज़ के लक्षण अलग-अलग होते हैं। जानिये यौन रोग किस तरह से हमारी जीवनशैली को प्रभावित करते हैं :

Advertisement

पुरुषों में एसटीडी लक्षण

Advertisement

पुरुषों में यौन रोगों के लक्षण आम तौर पर पेशाब में संक्रमण, पेशाब के दौरान दर्द होने, सूजन, दाने और खुजली के रूप में हो सकते हैं। इसके अलावा अंडकोष में घाव और चकत्ते होना भी एसटीडी के लक्षणों में शामिल हैं। टेस्टिस में सूजन भी यौन रोगों के ही लक्षण हैं। असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से ही एड्स जैसी जानलेवा बीमारी भी होती है। कई बार यौन संबंधी रोगों के लक्षण कई हफ्ते बाद भी सामने आते हैं। एसटीडी की बीमारी को हम आम तौर पर दो बैक्टीरिया गोनोरिया और क्लैमाइडिया के रूप में ही जानते हैं लेकिन सेक्सुअल कॉन्टेक्ट में आने की वजह से कई और तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं। इनमें हेपेटाइटिस और एड्स भी शामिल है।

महिलाओं में यौन बीमारियों के लक्षण

महिलाओं में यौन बीमारियों के लक्षण दर्द और शारीरिक संपर्क के दौरान असहजता,पेशाब में दर्द,जलन और सूजन के तौर पर दिखाई देते हैं। जननांगों के आसपास घाव,चकत्ते और दाने भी यौन संक्रमण से होने वाली बीमारियों के लक्षण होते हैं। इसमें अंगों के आसपास खुजली भी प्रमुख लक्षण है। महिलाओं में सबसे ज्यादा यौन संक्रमण बीमारी एचपीवी है। एचपीवी यानी ह्यूमन पैपलियोमा वायरस। यह संक्रमण त्वचा से त्वचा के स्पर्श से फैलता है। अगर किसी महिला के जननांगों से लगातार स्राव होने के साथ-साथ खुजली, संबंधों की प्रक्रिया में दर्द और पेशाब में जलन और दूसरी समस्याएं होती हैं तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

लापरवाही है बड़ी वजह

यौन बीमारियों और संक्रमण की सबसे बड़ी वजह लापरवाही ही होती है। इसके अलावा अशिक्षा व जागरुकता के अभाव की वजह से भी यौन संबंधी रोग फैलते हैं। सेक्स के दौरान ड्रग्स का इस्तेमाल भी यौन रोगों की एक बड़ी वजह है।

स्वास्थ्य के लिए लाभकारी विटामिन सी

विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बढ़ाकर सर्दी-जुकाम से लड़ता है, कोलेजन के निर्माण से त्वचा को चमकदार व स्वस्थ रखता है, और आयरन के अवशोषण में मदद करता है। यह हड्डियों, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं की मरम्मत के लिए भी आवश्यक है। मुख्य स्वास्थ्य लाभ : विटामिन सी शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता है और श्वेत रक्त कोशिकाओं के कार्य को बेहतर बनाता है। यह कोलेजन उत्पादन में सहायता करता है, जो त्वचा को झुर्रियों से बचाकर चमकदार और कोमल रखता है। यह घावों, चोटों और ऊतकों की मरम्मत में तेजी लाता है। वहीं विटामिन सी भोजन से आयरन को शरीर में अवशोषित करने में मदद करता है, जिससे एनीमिया यानी खून की कमी का खतरा कम होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। एस्कॉर्बिक एसिड कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ता है। यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। मसूड़ों का स्वास्थ्य : यह मसूड़ों से खून आने (स्कर्वी) की समस्या को रोकने में मददगार है। विटामिन सी के प्राकृतिक स्रोत : खट्टे फल (संतरा, नींबू), अमरूद, शिमला मिर्च, आंवला, कीवी, स्ट्रॉबेरी, और ब्रोकोली विटामिन सी के बेहतरीन स्रोत हैं।

 -हील इनिशिएटिव

Advertisement
×