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क्रिकेट के शौक से जुड़ा अम्पायर का कैरियर

अम्पायरिंग एक ऐसा कैरियर है जिसमें आप क्रिकेट के खेल से जुड़े रहते हुए भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। अगर आपको क्रिकेट के नियमों को जानने में रुचि है, फैसला लेने का आत्मविश्वास है और मैदान पर अनुशासन...

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अम्पायरिंग एक ऐसा कैरियर है जिसमें आप क्रिकेट के खेल से जुड़े रहते हुए भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। अगर आपको क्रिकेट के नियमों को जानने में रुचि है, फैसला लेने का आत्मविश्वास है और मैदान पर अनुशासन में रहना व खेलना पसंद है, तो अम्पायरिंग एक बेहतरीन कैरियर विकल्प हो सकता है।

भारत में क्रिकेट केवल खेल नहीं, जुनून का दूसरा नाम है। लाखों युवा बल्लेबाज या गेंदबाज बनने का दिन-रात सपना देखते हैं। लेकिन उनमें से बहुत कम को यह मौका मिल पाता है। हालांकि क्रिकेट के शौक को बुलंदियों तक पहुंचाने का एक और रास्ता है । वो है क्रिकेट अम्पायर बनना। आपने अकसर देखा होगा कि जहां क्रिकेट का मैच चल रहा होता है, वहीं मैदान पर अमूमन सफेद टोपी और काली पैंट में एक व्यक्ति खड़ा होता है, यही वह अम्पायर है, जो बेहद महत्वपूर्ण और सम्मानित रोल निभाता है, जो कि क्रिकेट के खेल को स्वाभाविक और विवेकपूर्ण बनाये रखता है। अम्पायरिंग एक ऐसा कैरियर है जिसमें आप खेल से जुड़े रहते हुए भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। ..तो अगर आपको क्रिकेट के नियमों को जानने में रुचि है, फैसला लेने का आत्मविश्वास है और मैदान पर अनुशासन में रहना और खेलना पसंद है, तो समझिये अम्पायरिंग आपके लिए एक बेहतरीन कैरियर विकल्प हो सकता है।

क्रिकेट अम्पायर का काम केवल आउट देना या नो बॉल कहना नहीं है। एक अच्छे अम्पायर में क्रिकेट के सभी नियमों का गहरा ज्ञान और निर्णय लेने की त्वरित क्षमता के साथ-साथ निष्पक्षता और ईमानदारी का गुण होना भी जरूरी है। खिलाड़ियों के साथ और विशेषकर कप्तानों के साथ संवाद कुशल होना तथा दबाव के क्षणों में शांति बनाये रखना भी क्रिकेट अम्पायर की खूबी है। अम्पायर डीआरएस तकनीक यानी टीवी अम्पायर के रूप में भी काम करते हैं। इसलिए उन्हें तकनीकी समझ भी रखनी पड़ती है।

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अम्पायर बनने की चरणबद्ध प्रक्रिया

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भारत में अम्पायर बनने का कोई एक रास्ता नहीं है, वैसे यह एक चरणबद्ध प्रक्रिया होती है। सबसे पहले लोकल क्रिकेट से शुरुआत करें, अपने गांव, मुहल्ले, जिले या शहर की क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े अधिकांश जिला क्रिकेट संघ शुरुआती स्तर के अम्पायर कोर्स कराते हैं। दूसरा चरण राज्य क्रिकेट संघ का होता है जैसे मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ, तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन आदि। ये संगठन भी समय-समय पर अम्पायरिंग कोर्स के लिए परीक्षाओं का आयोजन करते हैं। तीसरा चरण है बीसीसीआई पैनल में शामिल होना। दरअसल स्टेट लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उम्मीदवारों को बीसीसीआई की अम्पायरिंग परीक्षाओं में बैठने का मौका मिलता है और वे सफल होते हैं तो बीसीसीआई के पैनल अम्पायर बनते हैं। इस क्रम में चौथा और आखिरी चरण इंटरनेशनल लेवल होता है। बीसीसीआई पैनल के अम्पायर आगे बढ़कर आईसीसी के एलीट या इंटरनेशनल पैनल तक पहुंचते हैं।

योग्यताएं और स्किल्स

अम्पायर बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आम तौरपर 10+2 होती है और आयु सीमा अधिकतर संघों में 18 से 40 के बीच तय है। अगर आप क्रिकेट भी खेलते रहे हैं तो इसका अनुभव आपको अतिरिक्त फायदा देता है। लेकिन अम्पायर बनने के लिए जरूरी नहीं है कि आपने क्रिकेट भी खेली हो। हां, अम्पायर बनने के लिए कुछ स्किल्स बहुत जरूरी है। मसलन आप क्रिकेट की नियम पुस्तिका का नियमित अध्ययन करें। अम्पायर को फिट होना और उनमें स्टेमिना का होना भी बहुत जरूरी है। स्पष्ट आवाज, सिग्नलिंग स्किल के साथ-साथ निष्पक्ष सोच का होना भी आवश्यक है।

प्रशिक्षण

भारत में अम्पायरिंग के लिए कोई एक संस्थान नहीं है, पर कई संस्थान और संगठन अलग-अलग स्तरों पर अम्पायरिंग का कोर्स कराते हैं, जिसमें राज्य क्रिकेट संघ प्रमुख होते हैं।

हर राज्य का क्रिकेट संघ अपना एक अम्पायरिंग विभाग संचालित करता है। इसी तरह बीसीसीआई भी समय-समय पर रिफ्रेश कोर्स, एडवांस क्लास और फिटनेस टेस्ट आयोजित करता है। जबकि बंगलुरु में स्थित नेशनल क्रिकेट अकादमी में क्रिकेट अम्पायरों के लिए भी ट्रेनिंग और वर्कशॉप होती हैं। कई निजी अकादमियां भी बेसिक अम्पायरिंग कोर्स कराती हैं। हालांकि इन्हें चयन करते समय उनकी मान्यता को जरूर क्रॉस चेक कर लें। करीब 2 से 4 सप्ताह के अम्पायरिंग कोर्स की फीस आमतौर पर 3000 से 20,000 रुपये तक होती है।

फीस के स्तर

क्रिकेट अम्पायरों को शुरुआती स्तर यानी लोकल क्लब स्तर के मैच की अम्पायरिंग करके भी प्रतिदिन 800 से 2000 रुपये मिलते हैं। स्टेट लेवल पर यह बढ़कर 3000 से 10,000 रुपये के बीच मिल जाते हैं और बीसीसीआई के डोमेस्टिक मैच में यह फीस बढ़कर 15,000 से 40,000 रुपये के बीच हो जाती है। जब आईपीएल और इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचते हैं तो प्रति मैच की फीस 1 लाख से 3 लाख रुपये के बीच होती है। साथ ही यात्रा भत्ता और दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं।

सफल कैरियर बनाने का तरीका

सवाल है अम्पायरिंग को पार्ट टाइम से फुलटाइम गतिविधि कैसे बनाएं? ज्यादातर अम्पायर शुरुआत शौक से करते हैं और जैसे-जैसे उनका अनुभव बड़ा होता जाता है, वे फुलटाइम इसे अपना कैरियर बना लेते हैं। बेहतर है कि हर साल परीक्षा में बैठें, फिटनेस बनाये रखें, वरिष्ठ अम्पायरों से मार्गदर्शन लें, तो कैरियर के रूप में अम्पायरिंग के क्षेत्र में कारगर सफलता मिलनी संभव है। अम्पायरिंग के कैरियर में ग्रोथ भी लगातार है। पहले आप फील्ड अम्पायर बनते हैं, फिर आपकी ग्रोथ थर्ड अम्पायर के रूप में हो जाती है, फिर आगे बढ़कर टीवी अम्पायर नियुक्त होते हैं। इसके बाद मैच रेफरी बनना संभव होता है और अंत में अम्पायर ट्रेनर या एग्जामिनर के रूप में भी आपका सुरक्षित भविष्य है। अम्पायर का काम सिर्फ ग्राउंड में अम्पायरिंग करना नहीं है बल्कि इसके अलावा भी इस क्षेत्र में कई कैरियर विकल्प हैं।

चुनौतियां भी कम नहीं

अम्पायरिंग के क्षेत्र में भी चुनौतियां कम नहीं है। खिलाड़ियों और दर्शकों का दबाव, गलत फैसलों की आलोचना, लगातार यात्रा करना, ये इस पेशे की विशेष चुनौतियां हैं। अगर इन्हें सही से टैकल कर लिया जाए, तो ये चुनौतियां आपको भविष्य में ज्यादा बेहतर बनाती हैं। दरअसल, अम्पायरिंग क्रिकेट से जुड़ा एक सम्मानजनक कैरियर है। इसमें बहुत कम निवेश करके भी हम शानदार और सम्मानित कैरियर हासिल कर सकते हैं। इस क्षेत्र में उम्र की सीमा भी बेहद लचीली है।                             -इ.रि.सें.

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