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टोल सेवाएं भी उपभोक्ता कानून के दायरे में

कंज्यूमर राइट्स

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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत टोल प्लाजा भी उपभोक्ता सेवाओं के दायरे में है। यदि टोल संचालक डबल टोल टैक्स कटौती करे, टोल शुल्क लेने पर भी अपर्याप्त सुविधाएं दे व अवैध टोल वसूली आदि करता है तो पीड़ित उपभोक्ता संरक्षण आयोग में शिकायत कर सकता है। दोषी पाये जाने पर उस पर कार्रवाई हो सकती है।

उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने टोल प्लाजा के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं, जिनमें ‘सेवा में कमी’ के आधार पर अवैध टोल वसूली, दो बार शुल्क लेना और सुविधाएं न देना जैसे मामलों में टोल कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया गया है, साथ ही गलत वसूली गई राशि को ब्याज सहित वापस करने और मुआवजे का आदेश दिया है। इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत टोल प्लाजा भी उपभोक्ता सेवाओं के दायरे में है। वहीं टोल शुल्क लेने के बावजूद यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध नहीं कराना भी सेवा में कमी माना गया। फास्टैग से गलत कटौती होने पर भी शिकायत की जा सकती है, और आईएचएमसीएल यानी भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमि.जैसी संस्थाएं जांच के बाद शिकायत सही पाए जाने पर रिफंड देती हैं और दोषी ऑपरेटर पर जुर्माना लगाती हैं।

फास्टैग से गलत कटौती का एक मामला मध्य प्रदेश का है। सागर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से टोल प्लाजा पर 2 बार टोल टैक्स वसूली के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने टोल टैक्स कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 5 हजार का हर्जाना और 2 हजार रुपए वाद खर्च के साथ अधिक कटी टोल टैक्स राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है।

ये है विवाद की वजह

31 दिसंबर 2024 को जब सागर जिला न्यायालय के अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सागर के गढाकोटा जा रहे थे, तो सागर दमोह मार्ग पर स्थित चनाटोरिया प्लाजा पर टोलकर्मियों ने उन्हें रोका और बार-बार उनकी कार को आगे-पीछे कराया। इसके बाद कहा कि हमारी मशीन ठीक से काम नहीं कर रही है, आपको टोल टैक्स नगद देना होगा। अधिवक्ता ने कहा कि ‘उनकी कार के फास्टैग में बैलेंस है, उसी से टोल टैक्स काट लें, लेकिन कर्मचारियों ने सर्वर खराब होने की बात कहकर नगद पैसे देने को कहा, जिसपर उन्होंने 25 रुपए नगद दिए। जिसके एवज में उन्हें सुबह 10:53 बजे रसीद दी गयी। लेकिन कुछ देर में उनके मोबाइल में फास्टैग से 25 रुपए काटे जाने का मैसेज आया, जिसमें सुबह 10:51 बजे का समय दिया गया था। उन्होंने वापस जाकर टोल टैक्स वालों से शिकायत की, तो उन्होंने कम्प्यूटर की गड़बड़ी बताकर पैसे देने से मना कर दिया।

डबल टोल कटौती पर उपभोक्ता आयोग में केस दायर करने पर टोल मैनेजर ने स्वयं उपस्थित होकर अपनी गलती स्वीकार की और बताया कि तकनीकी खराबी के कारण 2 बार टोल ले लिया गया है, जिसे वे वापस करना चाहते हैं। जिस पर उपभोक्ता आयोग ने कहा कि 4 माह हो गए, अब तक क्यों वापस नहीं किया। जिसका संतोषजनक जवाब न देने पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष और सदस्य ने टोल राशि वापस ना करने और सेवा में कमी मानते हुए टोल प्लाजा को ज्यादा काटी राशि की ब्याज समेत वापसी, सेवा में कमी का हर्जाना और वाद खर्च देने का आदेश दिया।

एक ही दिन में वापसी पर पूरे पैसे काटे

इसी प्रकार टोल प्रबंधन द्वारा अधिक टोल टैक्स लेने के मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग रेवाड़ी ने टोल प्लाजा प्रबंधन को आदेश दिए कि उपभोक्ता से ली गई अधिक टोल राशि वापस की जाए,उपभोक्ता को 10 हजार रुपए हर्जाना व केस खर्च भी अदा करे। उक्त मामले में उपभोक्ता अपनी कार से सपरिवार 13 सितम्बर 2022 को रेवाड़ी से नारनौल गया था। काठुवास टोल प्लाजा पर उनकी गाड़ी के फास्ट टैग से नियमानुसार 65 रुपए कट गये, जिसके उपरांत वह उसी दिन सायं 8 : 17 बजे नारनौल से रेवाड़ी आ रहे थे ओर दोबारा काठुवास टोल प्लाजा पार करने लगे तो नियमानुसार उसी दिन 24 घंटे में वापस आने पर नियमानुसार फास्ट टैग से आधे पैसे यानी 35 रुपये ऑटोमैटिक कटने थे, परन्तु काठुवास टोल प्लाजा ने 35 रुपये के बजाय 65 रुपये काट लिये, जिसका उपभोक्ता ने विरोध किया, लेकिन टोल प्लाजा कर्मियों ने उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया।

उपभोक्ता ने की कानूनी कार्रवाई

उपभोक्ता ने एक नोटिस टोल प्लाजा प्रबंधन को भिजवाया जिसके तुरंत बाद टोल प्लाजा ने 35 रुपए शिकायतकर्ता के खाते में जमा कर दिए, लेकिन तब तक उपभोक्ता अपनी शिकायत उपभोक्ता आयोग में कर चुका था और उसका यह मकसद भी था कि टोल टैक्स वाले आमजन को परेशान करना बंद करें। उपभोक्ता आयोग ने टोल प्लाजा प्रबंधन को तलब किया। दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें आयोग के समक्ष रखी। उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया कि टोल प्लाजा प्रबंधन,पीड़ित उपभोक्ता को 10 हजार रुपए का भुगतान बतौर हर्जाने के रूप में करे। इसी तरह जयपुर के दौलतपुरा टोल प्लाज़ा पर बिना हाईवे क्रॉस किए कार के फास्टैग से 55 रुपये टोल काटने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए टोल प्लाज़ा प्रबंधक पर हर्जाना और काटे गए रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।

  - लेखक उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता हैं।

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