देश-दुनिया का विरोधाभास ही रहा है कि जो समाज सांस्कृतिक व धार्मिक रूप से अधिक प्रतिबद्ध और संवेदनशील रहे हैं, उन्हें आधुनिक विकास के मानकों पर पिछड़ा मान लिया गया। लोगों की संवेदनशीलता और धन कमाने की हवस न होने को उनकी विपन्नता मान लिया गया। एक समय सांस्कृतिक व आदर्श जीवन मूल्यों वाले भारत को जिस तरह आर्थिक साम्राज्यवादियों ने देखा, कालांतर उसी नजरिये से भारत में ओडिशा को देखा है। ओडिशा समाज में आज भी जीवन की सादगी, संतोष व सुकून को प्राथमिकता दी जाती है। काला हांडी के दाग को धोकर आज का ओडिशा विकास के नये आयाम रच रहा है।
कभी चंडीगढ़ की तर्ज पर बने भारत के इकलौते शहर, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को देखें तो सड़कें शांत व वाहनों की भीड़भाड़ से दूर नजर आती हैं। वहां सड़कों में चंडीगढ़ की तरह महंगी कारों की होड़ नहीं है। ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं है। लोगों का व्यवहार शेष भारत के मुकाबले शांत है। मंदिरों को देखें तो आज भी हजारों वर्ष पुराने परंपरागत स्वरूप में हैं। तड़क-भड़क व शोर से मुक्त, मन को सुकून देने वाले हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उड़िया समाज का सामान्य जीवन व एकजुटता भगवान जगन्नाथ के प्रति विश्वासों, आस्था व प्रसाद रूपी भोजन से जुड़ी है। देश के विभिन्न राज्यों व विदेशों में भगवान जगन्नाथ के मंदिर उड़िया समाज को एकजुट करते हैं। विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के प्रति अथाह श्रद्धा उसकी बानगी है। सुखद संयोग कि महाप्रभु के प्रसाद से प्रेरित खाद्य परंपरा उड़िया समाज की इम्युनिटी को बढ़ाती है। यही वजह है कि कोरोना काल में ओडिशा में कोरोना का प्रभाव बेहद कम देखा गया। यूं तो महाप्रभु की लीला अपरंपार है लेकिन उनकी दैनिक लीलाएं आम मनुष्यों जैसी हैं। सुबह से शाम तक के उनके अनुष्ठान एक आम आदमी की तरह होते हैं। सुबह उठकर मुंह धोना, दोपहर को समय पर खाना, दोपहर में संगीत, सोने के समय पंखा लगाना आदि। दरअसल, हर उड़िया घर की लीला महाप्रभु के दैनिक अनुष्ठान पर आधारित है। स्कॉटलैंड में महाप्रभु मंदिर में भी व भक्तों के घर में भी, यही सब दोहराया जाता है। काफी उड़िया कुज़ीन महाप्रभु के अनुष्ठानों की वजह से हैं।
ओडिशा के आम लोगों का भोजन श्री जगन्नाथ पुरी मंदिर की सात्विक भोजन परंपरा की थाली के साथ जुड़ा है। ओडिशा देश के सर्वाधिक चावल उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां के खाने को सिर्फ व्यंजनों को समझना मात्र नहीं है, वरन एक गहरी सांस्कृतिक परंपरा को नजदीक से महसूस करना है। ओडिशा की भौगोलिक स्थिति व जलवायु के कारण चावल यहां का मुख्य भोजन है। ओडिशा का खान-पान सादगी और स्वाद के गहरे संतुलन के लिये पहचान रखता है। भोजन की खासियत यह है कि इसे कम तेल व कम मसालों के साथ बनाया जाता है। रोज के खाने में चावल के साथ दालिमा यानी सब्जी वाली दाल खायी जाती है।
हर उड़िया का ख्याल रखे पखाल
चिकित्सकों की कसौटी पर बेहद पौष्टिक साबित हुए पखाल को ओडिशा सरकार वैश्विक ब्रांड बनाने की कोशिश में है। पिछले दिनों पखाल गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हुआ है। ये हर उड़िया घर का भोजन है। दरअसल, गर्मियों के दौरान, हर उड़िया घर की पहली पसंद पखाल ही होता है। यह रातभर पानी में भिगोया पका हुआ चावल होता है। कालांतर जिसे हल्का फरमेंट किया जाता है। जिसे आम तौर पर नींबू, दही या बड़ी चूरा के साथ पेश किया जाता है। यह गट हेल्थ के लिये बहुत लाभदायक है। परंपरागत रूप से उड़िया भोजन में सरसों का तेल और पंच फुटन यानी पांच मसालों के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है। जो खासा पाचक होता है। इसी तरह स्वास्थ्यवर्धक सब्जी संतुल, जिसे न के बराबर मसालों के साथ उबाला या हल्का फ्राइ किया जाता है।
आध्यात्मिकता से आलोकित मर्म
आध्यात्मिक ओडिशा की धड़कती हुई आत्मा के दर्शन पुरी तीर्थ में होते हैं। जहां श्रद्धालु पवित्र श्री जगन्नाथ मंदिर की भव्यता का अनुभव करते हैं। पवित्र मंदिर की सहस्राब्दी पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं में सराबोर होते हैं। वहीं आनंदबाजार में सामूहिक भोजन के अनोखे रीति-रिवाजों पर आधारित समावेशिता और प्राचीन पाक संस्कृति की व्यापक जानकारी श्रद्धालु हासिल करते हैं। ओडिशा के तीर्थ देश को बताते हैं कि कैसे अत्याधुनिक भीड़ प्रबंधन, तीर्थयात्रियों की सुविधाएं और धरोहर संरक्षण ढांचे से सामंजस्यपूर्ण तरीके से काम किया जा सकता है। जिससे पवित्र धार्मिक विरासत व परंपराओं की रक्षा हो सके।
पत्थरों पर लिखी कविता
13वीं सदी का ऐतिहासिक कोणार्क सूर्य मंदिर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित है। इसे कलिंगा वास्तुकला की उत्कृष्टता के रूप में विश्वभर में सराहा जाता है। सूर्य देव के लिए बनाए गए विशाल पत्थर के रथ के समक्ष पर्यटक संवाद करते नजर आते हैं। सूर्य मंदिर प्राचीन कलिंगा राज्य के उच्च तकनीकी धातुकर्म और ईंट-पत्थर की तकनीकों का मूक साक्षी है। विश्वप्रसिद्ध चौबीस पत्थर के रथ के पहियों का प्रतीकात्मक महत्व, जो सटीक सूर्य घड़ियों के रूप में काम करते हैं। पुरातत्व विभाग व ओडिशा सरकार समुद्री जलवायु से स्मारक की रक्षा करने वाली आधुनिक बहु-संस्थागत इंजीनियरिंग में जुटी है। निस्संदेह, कोणार्क केवल प्राचीन अनूठी निर्माण कला का एक स्मारक मात्र नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली धरोहर का जीवंत प्रमाण भी है।
खुले आकाश तले एक आर्ट गैलरी
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित रघुराजपुर क्राफ्ट्स विलेज, भार्गवी नदी के शांत किनारे पर बसा है। इसे खुले आकाश तले एक आर्ट गैलरी के रूप में प्रतिष्ठा मिली है, जहां कला एक विरासत में मिली जीवनशैली है। बताते हैं कि इसी रघुराजपुर गांव के कारीगरों ने विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्यमंदिर को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। रघुराजपुर में आगंतुकों को पारंपरिक सिद्धहस्त कारीगरों और चित्रकारों की जिंदगी की एक करीबी झलक देखने को मिलती है। यहां ट्रीटेड फैब्रिक पर विश्व प्रसिद्ध पत्तचित्र, स्क्रॉल पेंटिंग्स, सूखे ताड़ के पत्तों पर नाजुक एचिंग ,ताला पत्तचित्र और लकड़ी की नक्काशी के जीवंत प्रतिरूप देखे जा सकते हैं। यहां संस्थागत बाजार कनेक्शन और डिजिटल ई-कॉमर्स पूल के माध्यम से ग्रामीण कारीगरों को सशक्त बनाने और अगली पीढ़ी के लिए पारंपरिक कला को व्यावसायिक रूप से जीवित रखने की कोशिश की जा रही है। सही मायने में भारत की विविध सांस्कृतिक धारा का समृद्ध रूप ओडिशा के प्राचीन स्मारक संरक्षण, गहरी जड़ों वाली आध्यात्मिक संस्कृति और फलती-फूलती खाद्य संस्कृति में नजर आता है। पर्यटकों को ओडिशा की प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक परंपरा से रूबरू होने का भी मौका मिलता है।
जीवनदायी लाइफ साइंसेज
आस्था की संस्कृति में मानवता की रक्षा हेतु यहां एक जीवंत वैज्ञानिक संस्कृति भी फल-फूल रही है। भुवनेश्वर के बीआरआईसी-इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज संस्थान की शोध उपलब्धियों, सुविधाओं और सामाजिक पहलों से इसकी पुष्टि होती है। बीआरआईसी- आईएलएस के निदेशक डॉ. देबासिस दास प्रमुख उपलब्धियों के साथ आईएलएस बायोइनक्यूबेटर और नवाचार व उद्यमित्ता को बढ़ावा देने के प्रयासों का जिक्र करते हैं। जिनमें क्रमशः चिकनगुनिया और बाल रोग संबंधी दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से संबंधित शोध शामिल था। संस्थान की विभिन्न इकाइयों में चल रहे शोध, वैज्ञानिक विकास और सामाजिक गतिविधियां रोगियों को दुर्लभ रोगों से बचाने के लिये सुरक्षा कवच प्रदान कर रही हैं।
इसरो की उड़ान में सीटीटीसी की भूमिका
आज मंगलयान से लेकर गगनयान तक के महत्वपूर्ण पुर्जों को सेंट्रल टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर द्वारा अंजाम दिया जा रहा है। सीटीटीसी अत्याधुनिक तकनीक, डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी संस्थान है। स्वदेशी विमान तेजस के कल-पुर्जे भी यहीं तैयार होते हैं। संस्थान में देश-विदेश के औद्योगिक और रक्षा क्षेत्र के लिए विभिन्न प्रकार के सटीक पुर्जों के निर्माण और तकनीकी विकास पर काम होता है। यहां हर वर्ष तकनीकी विषयों के 10 से 12 हजार विद्यार्थियों को इंटर्नशिप भी कराई जाती है।
महिला कृषकों के लिये अग्रणी संस्थान
दुनिया में अपने तरह के अकेले ‘केंद्रीय कृषिरत महिला संस्थान’ के जरिये खेती में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि कृषि में स्वामित्व की दिशा में महिलाओं की भूमिका में वृद्धि की जा सके। संस्थान में नई कृषि तकनीकों, शोध और महिलाओं के लिए संचालित सहायक योजनाओं के माध्यम से उनकी भूमिका मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। वैज्ञानिक कृषि नवाचारों के जरिये आधी दुनिया के जीवन में खुशहाली लाने के लिये प्रतिबद्ध हैं। संस्थान ने पराली के निस्तारण की अनूठी पहल की है। पश्चिम बंगाल,बिहार व अन्य राज्यों में पराली को नष्ट करने के बजाय उसी खेती में आलू उगाने की विधि विकसित की है। इससे जहां पराली के नीचे विद्यमान नमी के चलते पानी की खपत कम होती है, वहीं पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सकता है।
ओडिशा की उप मुख्यमंत्री से बातचीत
पर्यटन व नारी शक्ति बदलेगी तस्वीर![]()
हाईकोर्ट में प्रेक्टिस करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रही प्रवति परिदा छह साल तक समाज कल्याण बोर्ड की चेयरपर्सन रहीं। वे पहली बार विधायक बनी और राज्य की पहली उप मुख्यमंत्री बनी। उनके पास महिला-बाल कल्याण, मिशन शक्ति व टूरिज्म मंत्रालय हैं। राज्य की समृद्धि के लिये वे धार्मिक व व्यावसायिक पर्यटन को अपनी प्राथमिकता मानती हैं। भुवनेश्वर में उनसे मुलाकात के दौरान हुई बातचीत के कुछ अंश:-
समृद्ध विरासत का संवर्द्धन
ओडिशा के पास धार्मिक विरासत, समुद्र के बीच की प्राकृतिक संपन्नता व जैव विविधता का व्यापक भंडार है। इस दिशा में पिछली सरकारों ने नहीं सोचा। हम रेल व हवाई कनेक्टिविटी बढ़ा रहे हैं। राज्य में जंगल का क्षेत्र बढ़कर 37 फीसदी हो गया है। व्यापक समुद्री सीमा के चलते हम ‘बीच’ के विस्तार पर जोर दे रहे हैं। राज्य को विरासत में समृद्ध तीर्थस्थल व प्राकृतिक सुषमा मिली है। विदेशी आक्रांताओं ने राज्य की समृद्ध विरासत को लूटा है। पश्चिमी ओडिशा की सांस्कृतिक राजधानी बलंगीर और हीरापुर के विकास के लिये क्रमश: बीस व 88 करोड़ का प्रावधान किया गया है। पर्यटकों के लिये सौंदर्यीकरण हमारी प्राथमिकता है।
कैमरा व मोबाइल हैं प्रतिबंधित
श्री जगन्नाथ पुरी व लिंगराज मंदिरों में मोबाइल व कैमरे पर प्रतिबंध की वजह हमारी सुरक्षा की चिंताएं हैं। महाप्रभु पर बार-बार अटैक हुआ है। राजाओं और हमारे पुरखों ने उनकी सुरक्षा की है। हमने आक्रांता सैनिकों से बेटियों की शादी करके भगवान को बचाया है। कई बार भगवान पाताल हुए। हमने भगवान को बहुत छुपाकर बचाया। हमारे महाप्रभु जैसा हैं ठीक हैं। आप महाप्रभु पर शोध करेंगे तो कई सच जानेंगे।
नारी शक्ति की समृद्ध विरासत
राज्य में देवगिरी, खारवाल खंडगिरी, उदयगिरी में समृद्ध प्राचीन जैन व बौद्ध विरासत विद्यमान है। उदयगिरि की गुफाओं में देख पाओगे कि खारवाल के समय से पहले की बहुत सारी महिलाओं की प्रतिकृतियां हैं। महिलाएं हाथी की महावत हैं। हाथ में बरछा लेकर पुरुषों से लड़ रही थीं। उनके पीछे राजा थे। मध्य भारत में महिलाएं बहुत पॉवरफुल थी। सम्राट अशोक से राजा के हारने के बाद जब रानी मैदान में सामने आयी, तभी अशोक पराजित हुआ। ये चंडासुर से धर्मासुर बनने की प्रक्रिया थी।
आज सरकार आर्थिकी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित कर रही है। उनका सालभर का टर्नओवर 50 हजार करोड़ है। बीस हजार करोड़ बैंक से आते हैं, जिसे हम इंटरेस्ट फ्री कर देते हैं। महिला सशक्तीकरण के चलते 610000 सेल्फहेल्प ग्रुप हैं। लाखों सेल्फ हेल्प ग्रुप से 70 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। लाखों की संख्या में लखपति दीदी हैं। बैंक ने महिलाओं को लोन देना प्राथमिकता बनाया है। महिलाएं वर्क फोर्स हैं। उड़िया महिलाएं आलसी नहीं, अंतर्मुखी हैं। निरंतर काम कर रही हैं। वर्कफोर्स के नाते बाहर जा रही हैं। गलत तरीके से बाहर भेजी महिलाओं को ढूंढ लाये हैं।
जैव विविधता का संवर्धन
राज्य में बायोडायवर्सिटी का समृद्ध खजाना है। मैंग्रोव फॉरेस्ट का समृद्ध भंडार है। मगरमच्छों की दुर्लभ प्रजातियां हैं। इसके अलावा स्पाटेट डीयर आदि सैकडो़ं जानवर हैं। ओडिशा के पूर्वी भाग में ऐतिहासिक खूबसूरत तटीय शहर केंद्रापाडा का विकास किया जा रहा है जो पांच पवित्र क्षेत्रों में से एक है। जो धार्मिक स्थलों और मैंग्रोव के लिये दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हम हीराकुंड रिवर फ्रंट बढ़ा रहे हैं। रिजरवायर बढ़ा रहे हैं म्यूजियम्स संरक्षित कर रहे हैं।
पटनायक परिवार की लिगेसी
यहां पटनायक मायने बीजू पटनायक हैं। वे अपने समय में मोस्ट पॉपुलर थे। वे ज्यादा समय सत्ता में नहीं रहे। कोई पांच व छह साल सत्ता में रहे। लेकिन दुस्साहस के कारण लोकप्रिय थे। नवीन सत्ता में उनके बेटे के रूप में आये। लोगों का मोह भंग। उनकी ताकत गवर्नमेंट ऑफिसर थे। अधिकारी सत्ता के साथ चलते। लोग उनको अच्छा इंसान मानते थे। लेकिन अच्छे स्टेट्समैन नहीं थे। होते तो राज्य इतना गरीब नहीं होता।
बीमारू प्रदेश की छवि क्यों
हमारे सरकार में आने से पहले भी सरप्लस इकोनॉमी थी, आज भी है। पहले नेताओं ने जैसा को तैसा रखने की नीति अपनायी। दो साल में हमने जो किया, कहीं बाहर से नहीं लिया। महिलाओं को सुभद्रा योजना के तहत 25 करोड़ दिया। पहले नेताओं ने सोचा कि यहां माइन्स हैं, रोजगार का खजाना है। लोगों को बाहर ले जा रहे थे काम करने के लिये। मोदी जी ने उत्कर्ष उड़ीसा कार्यक्रम को संबल दिया। कहा- इनवेस्टमेंट करो, ये मोदी की गारंटी है। उसके बाद सेमिकंडक्टर की दो इकाई आई। गुजरात के उद्यमी टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में काम कर रहे। उद्यमी आएंगे, इन्वेस्ट करेंगे। उद्योगों के लिये अच्छा वातावरण है, जहां पर मिनरल्स हैं,माइन्स हैं, वहां उद्योग पनपेंगे। कनेक्टविटी पर काम कर रहे हैं। दो समुद्री पोर्ट राज्य को मिले हैं। दो और मिलेंगे। कनेक्टिविटी बेहतर होगी तो उद्योग बढ़ेंगे। पुरी एअरपोर्ट बना है। इनवेस्टर को तुरंत पहुंचना है मार्केट में। टूरिज्म के क्षेत्र में कोई निवेश को आता है, राज्य लैंड व सब्सिडी देता है। हम नई टूरिज्म पॉलिसी लाए हैं। भरोसा है हॉस्पिटेलिटी सेक्टर को बल मिलेगा। भूमि सुधारों के जरिये मालिकाना हक पाने को आसान बनाया गया है।
अब बीमारू प्रदेश नहीं
यह पुराने दिनों की बात है कि उड़ीसा गरीब प्रदेश है। रुग्ण प्रदेश की छवि टूट रही है। कांग्रेस के समय में कालाहांडी के नाम पर हमारी भुखमरी का मजाक उड़ाया गया। आज काला हांडी एअर कनेक्टिविटी से जुड़ रहा है। उस क्षेत्र में डायमंड व सोने की माइन निकली हैं। पैडी का 3100 रुपये भुगतान लोगों को मिल रहा है। साल में धान की दो फसल होती हैं। सरकार सब खरीदती है। एक-एक किसान के खाते में छह-सात लाख आते हैं।
पर्यटन संस्कृति में अपसंस्कृति का खतरा
हमारी प्राथमिकता धार्मिक पर्यटन है। हमने उभरती विद्रूपताओं को ध्यान में रखा है। तमाम हैरिटेज साइट पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए टूरिस्ट पुलिस लगा रखी है। नशा मुक्त भारत अभियान चला रहे हैं। आदिवासी इलाकों में सामुदायिक रूप में रह सकते हैं। लेकिन कुछ घटनाओं के बाद ट्राइबल के घर-परिवार में रुकने की इजाजत नहीं। हमारा मुख्य फोकस टूरिज्म से रोजगार बढ़ाने पर है। ऐतिहासिक व धार्मिक पर्यटन के लिये बड़ी संख्या में गाइड तैयार करना है। हॉस्पिटेलिटी में रोजगार अवसर बढ़ाने हैं। पर्यटन में महिलाओं की भूमिका बढ़ाई है, लेकिन महिलाओं को सुरक्षा की दृष्टि से सामूहिक रूप से टीम के रूप में जोड़ा है।
रोजगार की प्राथमिकता के लिये नीति
आज ओडिशा टूरिज्म की प्राथमिकता यूनेस्को सर्टिफाइड व एएसआई प्रोटेक्ट संरचनाएं हैं। टूरिज्म कॉरपोरेशन साल भर में आने वाले एक करोड़ टूरिस्टों की देखभाल करता है। उनके ठहरने के लिये होटल, रेस्टोरेंट व सफाई आदि की व्यवस्था करता है। महासप्तमी के दिन बहुत लोग आते हैं। इस दिन सूरज की पहली किरण के चंद्रभागा नदी पर पड़ने के वक्त भगवान कृष्ण के पुत्र रोगमुक्त हुए थे। अब बीच पर तीन महीने के लिये एक टैंट सिटी भी लगाते हैं। खजुराहो की तर्ज पर कोणार्क डांस फेस्टिवल में तमाम ख्याति प्राप्त कलाकार पर्यटकों के लिये आकर्षण होते हैं।
धार्मिक विरासत का संरक्षण
हमारी कोशिश है कि मंदिरों को उनके मूल स्वरूप में संरक्षित किया जाए। सरकार संरक्षण के लिये पर्याप्त सुविधाएं दे रही है। हमारी पर्यटन नीति आस्था व संस्कृति पर केंद्रित है। हम तीन हजार दो सौ मंदिरों के संरक्षण को संकल्पबद्ध हैं। उनके लिये विशेष फंड का प्रावधान किया गया है। तीन मंत्रालयों का समूह संरक्षण, अतिक्रमण रोकने और रखरखाव का कार्य देखता है। कुछ राज्य संपदा के अधीन हैं तो कुछ की पुरातत्व विभाग देखरेख करता है।
हमारी ताकत : ओडिशा डायसपोरा
देश-दुनिया में जहां-जहां उड़िया समाज है, हम वहां संपर्क करने का प्रयास करते हैं। हमने असम, जयपुर, अहमदाबाद,सूरत, सूरजकुंड में लोगों से संपर्क करके ओडिशा पर्व आयोजित किए हैं ताकि ओडिशा की कल्चर समृद्ध हो व प्रवासियों का ओडिशा के विकास में योगदान हो सके। हम देश-दुनिया के आस्थावानों को जगन्नाथ प्रभु के चारों धामों से जोड़ने के प्रयास में हैं। इस राज्य में बारह महीने में तेरह फेस्टिवल होते हैं। यहां कल्टीवेशन के साथ फेस्टिवल जुड़े हैं। यहां के हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट को दुनिया भर में सराहा जा रहा है।

