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जॉब पाने का नया स्किल फर्स्ट मॉडल

भर्ती के ट्रेंड में बदलाव

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आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ऑटोमेशन तथा स्टार्टअप के इस दौर में बिना कुशलता अच्छा कैरियर बनना असंभव है, जबकि अगर बहुत बड़े संस्थान या विश्वविद्यालय की डिग्री नहीं है, तो भी जाॅब मिल जायेगा। क्योंकि इस दौर में आपने ‘क्या पढ़ा है’ के बजाय आप क्या बहुत कुशलता से कर सकते हैं, यह मायने रखता है।

अब डिग्री नहीं कौशल हमारा भविष्य तय करेगा। देश में कैरियर की दुनिया गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है। वह दौर बीत गया, जब किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की डिग्री या तकनीकी संस्थान के स्टूडेंट होने के नाम पर ही बड़ी-बड़ी कंपनियां ज्यादा ना-नुकुर किए नौकरी दे देती थीं। लेकिन अब कंपनियों को डिग्रियां संतुष्ट नहीं कर पातीं। उन्हें चाहिए आपके अंदर काम से संबंधित हुनर, काम से संबंधित डिग्री। बिना कुशलता अच्छा कैरियर बनना असंभव है, जबकि अगर बहुत बड़े संस्थान या विश्वविद्यालय की डिग्री नहीं है, तो भी आपका काम चल जायेगा। क्योंकि इस दौर में आपने ‘क्या पढ़ा है’ के बजाय आप क्या बहुत कुशलता से कर सकते हैं, यह मायने रखता हैं। इसीलिए यह दौर स्किल फर्स्ट कैरियर मॉडल कहा जा रहा है।

हालांकि यह बदलाव अचानक नहीं आ गया। पहले डिजिटल क्रांति आयी, फिर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का दौर आया और ऑटोमेशन तथा स्टार्टअप संस्कृति ने गहरे तक अपनी जड़ें जमायी हैं। इसके बाद अब स्किल फर्स्ट कैरियर मॉडल दस्तक दे रहा है। आज कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो तुरंत काम कर सकें। पहले वे अकुशल लोगों को भर्ती कर लेती थीं और सालों में उन्हें कुशल बनाकर अपना काम चलाती थीं। आज किसी कंपनी के पास ये फुर्सत नहीं।

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क्यों कमजोर पड़ा डिग्री मॉडल

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पारंपरिक शिक्षा प्रणाली का ढांचा बहुत धीमी गति से बदलता है। ऐसे में अकसर विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम अपने दौर से पीछे हो जाते हैं। मसलन, एक इंजीनियरिंग छात्र चार साल में डिग्री पूरी करता है, लेकिन तकनीक की रफ्तार इतनी तेज है कि इन चार सालों में तीन बार तकनीक नई हो चुकी होती है। ऐसे में कंपनियां उन लोगों को अपने यहां भर्ती करना बेहतर समझती हैं, जो वर्तमान तकनीक में दक्ष हैं। क्योंकि कंपनियां अपने क्वालिटी उत्पाद चाहती हैं। यही कारण है कि जहां लाखों इंजीनियर और मैनेजमेंट के डिग्रीधारी बेरोजगार हैं, वहीं ऐसे लाखों लोग अच्छी नौकरियों में हैं, जिनके पास उच्च संस्थानों की डिग्री न होकर, काम की कुशलता है।

टेंड में स्किल फर्स्ट मॉडल

सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने यहां भर्ती के लिए डिग्री की अनिवार्यता को या तो अनदेखा कर रही हैं या खत्म कर दिया है। ऐसे उम्मीदवारों को अपने यहां रखने में प्राथमिकता दे रही हैं, जिन्हें अनुभव हो या जो कार्यक्षमता में माहिर हों। यही कारण है कि 2025 में सबसे ज्यादा नौकरी पाने वाले लंबे समय तक इंटर्न करने वाले प्रशिक्षु थे। दरअसल कंपनियों को पहले दिन से ही व्यापक उत्पादकता की दरकार होती है। इसलिए वो प्रशिक्षित कर्मचारियों को चाहती हैं। आज विभिन्न ऐप से कुशलता हासिल करने वाले युवकों को भी धड़ल्ले से नौकरी मिल रही है और वे बड़े-बड़े डिग्रीधारी पिछड़ रहे हैं, जिन्हें काम की नॉलेज नहीं। स्टार्टअप्स तो कतई डिग्रियों के मोह में नहीं फंसते।

डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बदल दी दुनिया

आज डिजिटल ऑनलाइन शिक्षा के प्लेटफॉर्म मसलन कोरसेरा, स्किल इंडिया, अपवर्क, फीवर, ये ऐसे प्लेटफॉर्म हैं,जो लाखों युवाओं को नौकरियां दिला रहे हैं। क्योंकि ये बहुत तेजी से नये रंगरूट को प्रशिक्षित कर रहे हैं, भले उनके पास बहुत तेजतर्रार पृष्ठभूमि न हो। ये प्लेटफॉर्म नई तकनीक और कुशलता को सीखने का सबसे अहम जरिया बन गये हैं। विशेषकर दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों के छात्रों को स्किल्स में महारत हासिल करने के लिए शहरों में जाने की जरूरत नहीं है। वो अपने घर में भी ऑनलाइन स्किल सीख सकते हैं और उसे काम में उपयोग कर सकते हैं।

सरकारी क्षेत्र में भी तरजीह

तकनीक में कुशल युवाओं को सिर्फ प्राइवेट कंपनियां ही नहीं बल्कि सरकारी क्षेत्रों में भी प्राथमिकता मिल रही है। खुद सरकार भी कौशल विकास को प्राथमिकता देने के लिए अब प्रतिबद्ध है। साल 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा अधिक व्यावहारिक और कौशल आधारित होनी चाहिए। इसमें इंटर्नशिप, व्यावसायिक शिक्षा और प्रोजेक्ट आधारित तकनीकों को सीखने पर जोर दिया जाता है। यही कारण है कि आजकल कॉलेज या कॉलेज से निकलने के बाद नहीं बल्कि अब स्कूल में ही छात्र कोडिंग , डिजाइन जैसी कुशलताओं को सीख रहे हैं। आज के ये बदलाव युवाओं के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों ही तरह के हैं।

ज्यादा मांग में हैं ये कौशल

* डेटा एनालिसिस और डेटा विजुअलाइजेशन,

* साइबर सिक्योरिटी, * डिजिटल मार्केटिंग,* क्लाउड कंप्यूटिंग,

* वीडियो एडिटिंग और कंटेंट क्रिएशन,* यूआई/यूएक्स डिजाइन,

* ड्रोन ऑपरेशन, * रोबोटिक और आटोमेशन,* कम्यूनिकेशन और समस्या समाधान,* प्रोजेक्ट मैनेजमेंट।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2030 तक भारत में 50 फीसदी से ज्यादा नौकरियां एप आधारित या ऐसी होंगी, जिन्हें एआई रिप्लेस कर सकता है। यही कारण है कि आज 70 फीसदी कंपनियां स्किल आधारित भर्ती को प्राथमिकता दे रही हैं और सही मायनों में डिजिटल कौशल रखने वाली आज की पीढ़ी पहले किसी भी दौर की पीढ़ी के मुकाबले 4 से 10 फीसदी तक की ज्यादा कमाई कर रही है।

                                                                               -इ.रि.सें.

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