साल 1865 में पंजाब में जन्में लाला लाजपतराय एक बहुमुखी प्रतिभा थे। अपने पेशे वकालत से ज्यादा वे लेखन व सामाजिक-राजनीतिक कार्यों में सक्रिय रहे। लेकिन उनका बड़ा लक्ष्य था देश की आजादी, जिसके लिए वे जेल भी गये, निर्वासन भी झेला और अतत: देशहित में बलिदान भी दिया।
ब्रितानी साम्राज्य को खटकने वाली स्वतंत्रता सेनानियों बाल-पाल-लाल की लोकप्रिय तिकड़ी में से एक थे लाला लाजपत राय उर्फ शेर-ए-पंजाब। इनका जन्म 28 फरवरी 1865 को फिरोजपुर (पंजाब) जिले के ठडेकी गांव में हुआ था। पिता राधाकृष्ण अग्रवाल और मां गुलाब देवी ने भी अपने-अपने ढंग से आजादी की लड़ाई में भाग लिया था। मगर उनके बेटे ने तो अंग्रेजी साम्राज्य की बुनियाद ही हिला दी थी। लाला जी ने साल 1880 में कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा पंजाब विश्वविद्यालय की एंट्रेंस (प्रवेश) परीक्षा उत्तीर्ण की थीं, 1882 में उन्होंने जूनियर प्लीडर और 1886 में प्लीडर की परीक्षाओं में सफलता पायी थी।
वकालत व राजनीतिक सक्रियता
लालाजी ने सन 1883 में वकालत का पेशा शुरू किया, लेकिन राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में में सक्रियता के कारण वकालत का पेशा चल नहीं सका। उन्होंने 1888 में पंजाब हिंदू सभा की स्थापना की तथा 1892 में लाहौर में दयानंद एंग्लो-वैदिक कालेज की स्थापना की।
रचनात्मक कार्य व आजादी के लिए संघर्ष
तमाम दूसरे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह लाला लाजपत राय आला दर्जे के लेखक भी थे। उन्होंने छत्रपति शिवाजी, स्वामी दयानंद और भगवान कृष्ण जैसे महापुरुषों पर पुस्तकों की रचना की। वह सन् 1898 में पंजाब नेशनल बैंक के निदेशक बने तथा 1904 में अंग्रेजी समाचारपत्र ‘द पंजाबी’ का प्रकाशन शुरू किया। ब्रितानी सरकार उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर 9 मई सन 1907 को उन्हें गिरफ्तार कर मांडले में रखा। कैद के दिनों में ही लाला जी ने ‘द स्टोरी आफ माई डिपोर्टेशन’ जैसी महत्वपूर्ण किताब लिखी। फिर 11 नवंबर 1907 को मांडले से उनकी बिना शर्त रिहाई हुई। जब लालाजी लाहौर लौटे तो जनता ने उनका स्वागत किया और उन्हें ‘पंजाब केसरी’ का नाम दिया। लेकिन साम्राज्यवादी सरकार ने उन्हें परेशान करना नहीं छोड़ा। साल 1914 में ब्रितानी सरकार ने उन्हें देश छोड़ने का आदेश दे दिया। तो लाला जी अमेरिका व जापान की यात्रा पर चले गये।
‘यंग इंडिया’ तथा होम रूल लीग
अमेरिका में ही उन्होंने सन 1916 में ‘यंग इंडिया’ साप्ताहिक पत्र तथा इंडिया होम रूल लीग की स्थापना की। साल 1920 में जब कलकत्ता में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन हुआ तो लालाजी को उस अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया। इसी साल उन्होंने ‘सर्वेंट्स आफ द पीपुल सोसायटी’ की स्थापना की।
1925 में लाला लाजपतराय ने ‘वंदे मातरम’ नामक उर्दू दैनिक पत्र का प्रकाशन व संपादन शुरू किया। अब तक लाला जी उच्चकोटि के लेखक के रूप में स्थापित हो चुके थे, उन्होंने मिस मेयो की ‘मदर इंडिया’ किताब के जवाब में ‘अनहैप्पी इंडिया’ जैसी चर्चित किताब लिखी। इसके अलावा आर्यसमाज, इंग्लैंड, दैट टू इंडिया और यंग इंडिया किताब भी लिखी। 30 अक्तूबर 1928 को साइमन कमीशन के विरोध में लाहौर में जुलूस का नेतृत्व करते हुए पुलिस की लाठी के प्रहार से लगी चोटों के कारण 17 नवंबर,1928 को लाहौर में उनकी मृत्यु हो गयी।
स्पेशल क्विज : कैंसर के इलाज की नई तकनीक
* कैंसर के नये इलाज में सबसे बड़ा बदलाव किस सोच के कारण आया है?
-प्रिसिशन एप्रोच यानी हर मरीज के कैंसर को अलग मानकर इलाज
*कैंसर के इलाज में इम्यूनोथैरेपी क्या करती है?
-इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए सक्रिय करती है।
* कैंसर में प्रोटानथैरेपी किस प्रकार का इलाज है?
-इस उन्नत रेडिएशन थैरेपी से आसपास के अंगों को कम से कम नुकसान होता है।
* लिक्विड बायोप्सी क्या है?
-खून सैंपल से कैंसर का पता लगाने व निगरानी की तकनीक।
* कैंसर की नई तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
-कम साइड इफेक्ट्स और बेहतर जीवन गुणवत्ता।
*आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग कैंसर इलाज में कैसे हो रहा है?
-त्वरित डायग्नोसिस, इलाज की योजना और दवा चयन में।
* फोटोथैरेपी किस सिद्धांत पर काम करती है?
-प्रकाश संवेदनशील दवाओं और रोशनी से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना।
*‘कैंसर वैक्सीन’ का उद्देश्य क्या है?
-शरीर को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और खत्म करने के लिए प्रशिक्षित करना।
* नई तकनीकों के बावजूद कैंसर इलाज की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
-उच्च लागत और समान पहुंच न होना।
* कैंसर इलाज का सबसे बड़ा लक्ष्य क्या माना जा रहा है?
-लंबे समय तक नियंत्रित रखना।

