कार्यसंस्कृति में वर्क फ्रॉम एनीवेयर का सम्मोहन
बड़ी तादाद में कार्यक्षेत्र ऐसे हैं जिनमें इंटरनेट की बदौलत कहीं से भी काम करना संभव है। कोरोना के बाद लोग हिल स्टेशनों, समुद्र किनारे या गांव में बैठकर मल्टीनेशनल कंपनियों का काम करने लगे। यहीं से वर्क फ्रॉम एनीवेयर...
बड़ी तादाद में कार्यक्षेत्र ऐसे हैं जिनमें इंटरनेट की बदौलत कहीं से भी काम करना संभव है। कोरोना के बाद लोग हिल स्टेशनों, समुद्र किनारे या गांव में बैठकर मल्टीनेशनल कंपनियों का काम करने लगे। यहीं से वर्क फ्रॉम एनीवेयर का विचार व्यवहार में उतरा। बस लैपटॉप हो, इंटरनेट कनेक्शन हो और मानसिक एकाग्रता चाहिये। कंपनियां इस मॉडल को स्वीकार कर रही हैं, क्योंकि ऑफिस स्पेस पर खर्च नहीं करना पड़ता।
कीर्तिशेखर
कोरोना महामारी ने जिस बदलाव को मजबूरी में शुरू कराया था, वह अब स्थायी जीवनशैली का विकल्प बनता जा रहा है। पहले सवाल था- क्या घर से काम करना संभव है? अब सवाल बदल चुका है- क्यों न कहीं से भी काम किया जाए? इसी सवाल से जन्मी है वर्क फ्रॉम एनीवेयर की अवधारणा यानी ऐसा काम जिसे करने के लिए न तो ऑफिस की दीवारें जरूरी हैं, न किसी तय शहर की सीमा, बस आपका अपना लैपटॉप हो, इंटरनेट कनेक्शन हो और थोड़ी सी मानसिक एकाग्रता, इसके बाद कहीं पर भी आप अपना ऑफिस शुरू कर सकते हैं।
कहीं से तक की यात्रा
वर्क फ्रॉम होम ने लोगों को यह सिखाया कि जरूरी नहीं कि हर काम मीटिंग रूम में ही बैठकर किया जाए। मतलब केवल कुर्सी पर बैठना नहीं बल्कि आउटपुट मायने रखता है। इसके बाद लोगों ने महसूस किया कि इंटरनेट की बदौलत कहीं से भी काम करना संभव है। कोरोना और उसके बाद से ही लोग हिल स्टेशनों, समुद्र किनारे या गांव में बैठकर मल्टीनेशनल कंपनियों का काम करने लगे। यहीं से वर्क फ्रॉम एनीवेयर का विचार व्यवहार में उतरा।
सवाल है लोग क्यों काम करने के यह ढंग चुन रहे हैं? क्योंकि महानगरों में बहुत भीड़ है, मकान के भारी-भरकम किराये व ट्रैफिक जाम की समस्या भी। घर और परिवार से दूर रहने के कारण हर समय मानसिक अशांति रहती है। इसलिए युवा लोग वर्क फ्रॉम एनीवेयर का विकल्प बड़ी सहजता से चुन रहे हैं।
अवधारणा का असल मकसद
इस अवधारणा का मतलब यह नहीं कि कहीं भी घूमते-फिरते रहें और जब मौका मिले या मन करे तो काम कर लें। अभी भी काम के समय काम की ही प्राथमिकता है। फिर भी इंटरनेट ने बौद्धिक काम करने वाले लोगों को यह सुविधा तो दी ही है कि अगर पहाड़ में घूमने जाएं, तो वहां से भी अपना काम करें। गांव जाएं या कहीं किसी जरूरी यात्रा पर निकल रहे हों तो भी अपना काम अपने साथ रखें यानी स्थान का चुनाव कामगार या कर्मचारी को करना है। मगर आप अपने काम को बहुत गंभीरता से लें ।
जिन क्षेत्रों में सफल है यह मॉडल
यह मूलतः सर्विस सेक्टर में ही संभव है कि आप कहीं से भी अपनी विशेषज्ञता संबंधी सेवाएं अपने नियोक्ता को दे सकें। हर काम वर्क फ्रॉम एनीवेयर के ढांचे में फिट नहीं होता। मसलन- आईटी और सॉफ्टवेयर, डिजिटल मार्केटिंग, राइटिंग, कंटेंट राइटिंग, डिजाइनिंग, ऑनलाइन टीचिंग, ऑनलाइन एजुकेशन, कस्टमर सपोर्ट और फाइनेंस एनालिसिस भी इस अवधारणा के चलते संभव है। जिन कामों में फिजिकल उपस्थिति या मशीनरी की मौजूदगी की जरूरत नहीं होती, उन क्षेत्रों में यह मॉडल तेजी से अपनाया जा रहा है। कंपनियां इस मॉडल को स्वीकार कर रही हैं, क्योंकि इससे उनको ऑफिस स्पेस पर खर्च नहीं करना पड़ता। लोगों को भर्ती करने के लिए पूरी दुनिया का दायरा मिल जाता है।
चुनौतियां भी हैं
कहीं से भी काम करने की आजादी में चुनौतियां ये हैं कि यह काम वहीं हो सकता है, जहां इंटरनेट की सुविधा अच्छी हो, बिजली चौबीसों घंटे हो और सुरक्षित और एकांत की जगह हो। वहां दफ्तर जैसा माहौल बनाने की सुविधा हो। इसके अलावा सेल्फ डिसिप्लेन भी जरूरी होता है। हां, ऐसे काम करने के तरीके से यह नहीं पता चलता कि हम कब दफ्तर में हैं, कब दफ्तर से आजाद हैं। क्योंकि और निजी जीवन गड्डमड्ड हो जाता है। इसलिए बहुत सारे लोग शुरू-शुरू में यह फॉर्मूला अपनाते हैं, लेकिन जल्द ही ऊब कर ऑफिस आने लगते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
वर्क फ्रॉम एनीवेयर करते समय भले तनाव कम होता हो, आजादी खूब महसूस होती हो, लेकिन हम सामाजिक संपर्क से कट जाते हैं और अकेलेपन की आशंका से घिर जाते हैं। इसलिए कई बार कहीं से भी काम करने की सुविधा का नुकसान मानसिक रूप से बीमार हो जाने के रूप में सामने आता है। इसलिए लोग अब हाइब्रिड मॉडल को बेहतर मान रहे हैं यानी चार दिन घर में और दिन दफ्तर में काम करना, सही संतुलन है। हां, महिलाओं के जरूर काम करने की इस शैली का फायदा मिलता है, क्योंकि इसके चलते उन्हें मातृत्व और कैरियर में संतुलन बनाने में मदद मिलती है।
आवश्यक सुविधाएं
* कार्य के स्थल या घर में तेज रफ्तार इंटरनेट कनेक्शन होना जरूरी है। वहीं लैपटॉप के साथ पॉवर बैकअप की व्यवस्था * ऑफिस जैसे स्थान का होना जरूरी * रोज सुबह तैयार होकर दफ्तर की तरह काम शुरू करना जरूरी * कंप्यूटर और साइबर सिक्योरिटी का ज्ञान * लगातार तकनीक में भी माहिर होते रहना व लगातार उत्साह बनाये रखना भी आवश्यक है।
-इ.रि.सें.

